पेट में सामान्य से ज्यादा गैस बनने से क्या-क्या हानियां होती हैं?

पेट में गैस बनने का मतलब उदर में आंतों और आमाशय में कृमि एस्केरिस और अन्य बैक्टीरिया आदि सक्रिय हो गए हैं। जिससे शरीर को मिलने वाला  शुगर पोषण की क्षमता मात्रा घट गई है
 शरीर के अंग जैसे हृदय आमाशय यकृत गुर्दे शरीर की पेशिया पूरी तरह से शुगर और अन्य धातुओं जैसे सोडियम कल्शियम मैग्नीशियम आयोडीन आदि का पोषण पूरा-पूरा नहीं मिल पाने के कारण अपनी क्षमता खोने लगते हैं। जिससे शरीर में असक्तता कमजोरी आने लगती है । ब्लड प्रेशर गिरने लगता है। चक्कर आने लगते हैं, पैर लडखड़ा ने लगते हैं संतुलन बिगड़ जाने के कारण मनुष्य गिर जाता है।
  इसके अलावा गैस बनने का एक मुख्य कारण ज्यादा नेगेटिव होकर सोचते रहने से या आति उग्र चिंतन करने से, ज्यादा लक्ष्य केंद्रित होकर पढ़ाई लिखाई करने से नींद खराब हो जाती है। जिससे निद्रा में व्यवधान उत्पन्न होने लगता है। नींद पूरी तरह से ठीकस नहीं आती है। जिससे मानसिक तनाव बन जाता है।
  गैस का सबसे ज्यादा बुरा खतरनाक प्रभाव हृदय और मस्तिष्क पर पड़ता है । पेट में गैस बनने का सबसे बड़ा स्त्रोत अमाशय और छोटी बड़ी आंत तथा मलाशय है। आमाशय के ज्यादा बड़े होने के कारण और इसके हृदय के नीचे की स्थिति के कारण जब आमाशय में गैस अत्यधिक मात्रा में उत्पन्न होकर भरने लगती है तब वह हृदय की ओर दबाव लगाकर हृदय की गति को रोकने का प्रयास करने लगती है। इसके शुरुआती दौर में हृदय की धड़कन गति मंदा होने पर रक्त के संचार में व्यवधान उत्पन्न होने से समस्त अगों को रक्त की आपूर्ति मंद हो जाती है।।
  जिसका सबसे बड़ा प्रभाव मस्तिष्क पर पड़ता है जो समुचित रक्त ना मिलने के कारण अपना कार्य करना अत्यंत धीमा कर देता है जिससे मनुष्य को चक्कर आने लगते हैं। हृदय पर गैस का दवाव पढ़ने से जीवन शंका उत्पन्न होने के  कारण  दिमाग को जीवन संकट के सिग्नल जाने लगते हैं जिससे हृदयकी गति धड़कन अनियमित होने लगती है। कभी ज्यादा तेजी से हृदय धड़कने लगता है तो कभी हृदय की धड़कन अत्यंत मंद होने लगती है यह दोनों स्थितियों ही मनुष्य के जीवन के लिए खतरनाक है। 
  हृदय की धड़कन मंदा होने पर पेशियां में सामान्य रक्त सप्लाई नहीं हो पाने के करण पेशियां भी ग्लूकोज और ऑक्सीजन की कमी से अपना कार्य पूरी क्षमता से नहीं कर पातीं जिससे शरीर का संतुलन लड़खड़ाने लगता है। जिससे मनुष्य कभी होश में या कभी बेहोशी में चाल खराब हो जाने से गिर जाता ह। 
  ऐसे में गैस की रोग को हल्के में नहीं लेना चहिए । यदि शरीर में असामान्य रूप से बहुत ज्यादा गैस बन रही है। उसे स्थिति में सचेत होकर रहना चाहिए। पहले तो गैस का इलाज कराना चाहिए । अनिद्रा से बचना जरूरी है, शुगर गिरने वाली आयुर्वेदिक शीतल औषधियां जैसे अर्जुन छाल , लौध , गिलोय, जलजमनी आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।

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