संसार में ,समाज में , सभी निजी ,परिवारिक सामाजिक ,राजनीतिक , जैविक ,समस्याएं संकीर्ण विचारधारा से उत्पन्न होती हैं ।। संकीर्ण विचारधारा का अर्थ है मनुष्य का सीमित बुद्धि होने पर अत्यधिक अहंकार करना , या कुछ भी नया सीखने की इच्छा ना होना , अपितु जो पहले पुराना थोड़ा सा सीखा जा चुका है न्यूनतम मात्रा में , उसी न्यूनतम मात्रा में सीखे गए ज्ञान या पढ़े गए ज्ञान के आधार पर अपने जीवन के वह विस्तृत फैसले लेना
इसमें मनुष्य को आप तो कह रहे हैं कौन सी समस्याएं संकीर्ण विचार धारा से पैदा होती हैं तो इस मैं कहता हूं कि— इसमें निजी समस्याएं , पारिवारिक समस्याएं , सामाजिक समस्याएं , व्यावसायिक समस्याएं , ऐसी कौन सी समस्या नहीं है जो संकीर्ण विचारधारा से पैदा नहीं होती है । बल्कि मैं तो यह कहूंगा कि किसी भी मनुष्य का समस्या ग्रस्त हो ना ही उसके संकीर्ण मानसिक विचारधारा की पहचान है । जिसमें वह समय परिवर्तन के अनुसार ना तो अपने विचारों में परिवर्तन करता है । ना वह अपने अध्ययन में कुछ नया सीखता है । अपितु जो पहले सीख लिया बस उसी को अटल सत्य , परम सत्य ,अंतिम सत्य , समझता हुआ अपना जीवन पुराने ढर्रों पर जीता है । जबकि समस्याएं उन लोगों को आती हैं जो समय के परिवर्तन क्यों समझ नहीं पाते # और समय के परिवर्तन को समझने के साथ-साथ अपने मानसिक स्थिति अवस्था में परिवर्तन नहीं करपाते ।
जैसे बहुत पहले समय में किसी भी स्त्री का या लड़की का पर पुरुष से संबंध बनाना एक सामाजिक अपराध था परंतु आज यह अपराध नहीं रहा अब यदि कोई पुरुष या स्त्री किसी अन्य परिचित अपरिचित लड़की को स्त्री को उसके अवैध यौन संबंधों पर प्रताड़ित करता है या कुछ भी कमेंट करता है तो यह उसकी संकीर्ण मानसिकता की पहचान है @ ,, कारण कि पुरुषों की यौन क्षमता शुक्राणु संख्या पहले के मुकाबले कम हो चुकी है और स्त्रियां उसका विकल्प ढूंढने के लिए दूसरे पुरुषों को ढूंढने लगी हैं ऐसे में यह परपुरुष या परस्त्री के मध्य परिचय संबंध या यौनिक संबंध मान्य / स्वीकार्य है । यह संवैधानिक नियम भी आ गया है कि कोई भी विवाहिता स्त्री अपने विवाह पूर्व के बॉयफ्रेंड से संबंध बरकरार रख सकती है विवाह पूर्व के बॉयफ्रेंड से संबंध रखने में कोई पति अपनी पत्नी को यदि रोकने मारने पीटने प्रताड़ित करने का कृत्य करता है । तो उसे अदालत बुरा या अपराध बताती है ।
दूसरा पहले शादी विवाह का संबंध स्व जाती तक सीमित था लोग निर्धन थे ऐसे में यदि विवाह के पश्चात कोई समस्या आती तो मनुष्य सामूहिक रूप से मिल बैठकर उसका निपटारा कर लेते थे । परंतु आज सामाजिक संबंधों के द्वारा रक्त संबंध तक सीमित नहीं है अपितु आज सामाजिक संबंधों का दायरा रक्त संबंध से आगे परिचय संबंध परिचय संबंध से आगे जाति संबंध जाति संबंध से आगे धर्म संबंध धर्म संबंध से आगे संस्कृति संबंध और संस्कृति संबंध से आगे देश विदेश संबंध अर्थात आज की तारीख में समस्त पृथ्वी एक मनुष्य का परिवार बन चुकी है ऐसे में वह समस्त पृथ्वी समस्त पृथ्वी के किसी क्षेत्र से किसी भी जाति किसी भी धर्म किसी सामाजिक संस्कृति महिला से शादी करने के लिए स्वतंत्र है शादी के पश्चात उस स्त्री को उस मनुष्य की सामाजिक पहचान सकते हैं और संवैधानिक रूप से अपने आप मिल जाती है ऐसे में यदि कोई विजातीय शादी संबंध या संवैधानिक शादी सम्मान कोर्ट मैरिज संबंध पर किसी भी प्रकार की आपत्ति करता है कमेंट करता है तो उसकी आपत्ति और कमेंट को अपराध माना जाएगा और मैं उस मनुष्य के खिलाफ संवैधानिक कार्यवाही हो सकती है । ऐसे में आज अदालत में संविधान की अवमानना और अपनी मानहानि का केस दायर करके उस व्यक्ति को अदालत से दंडित कराकर उसे सजा और आर्थिक दंड दिलवा जा सकता है।
इस प्रकार समाज की मर्यादा में बदलती हैं परंपराएं बदलती हैं संबंध बदलते हैं रिश्ते बदलते हैं तो ऐसे में हमें उन पुराने मर्यादाओं परंपराओं रिश्ते और संबंधों को समझने की क्षमता नये परिप्रेक्ष्य में तथा पुराने परिप्रेक्ष्य में होनी चाहिए । उन्हें नये और पुराने संबंध संभावना परिप्रेक्ष्य को भली प्रकार से समझते हुए जहां तक हो सके अपने उचित खुले विचारों की मानसिक विचारधारा से अपनाना चाहिए । यदि हम संकीर्ण मानसिकता वाले रहे तो वह दिन दूर नहीं कि हम अपनों को खो देंगे या हम अपने ही अपनों से दूर चले जाएंगे और दूसरे हमें गले नहीं लगा पाएंगे हम से नहीं मिल पाएंगे तो ऐसे में हम समाज में अकेले हो कर अपना जीवन हास्यप्रद जिंदगी में हम अपने जीवन को चित्र जिंदगी से जी पाएंगे जो कि यह हमारे पढ़े लिखे होने पर भी एक प्रश्न चिन्ह होगा और साथ ही हमारी बंद बुद्धि या संकीर्ण विचारधारा की पहचान होगी ।