मानसिक उत्पीड़न किसे कहते हैं?

 मानसिक उत्पीड़न व्यक्ति के पास और समाज के परम चतुर्भुज लोगों के द्वारा दुष्ट लोगों के द्वारा दैनिक व्यवहार में अपनाई जाने वाली वह युक्ति वह कला वह विज्ञान है जिसमें एक मनुष्य शांत और चुपचाप रहते हुए भी दूसरे मनुष्य को अपने व्यवहार से अपने व्यंग बाण से अपने क्रियाकलाप से इतना अधिक मानसिक रूप से उग्र व्यस्त और तनाव मैं कर देता है कि वह व्यक्ति सोचते-सोचते इतना परेशान हो जाता है कि मानव जनित समस्या का उचित हल नहीं मिल पाने पर उस मनुष्य का लगातार सोचते रहना और सोचते-सोचते उस मनुष्य के मस्तिष्क में दर्द मन में बेचैनी बन जाना और अंतिम अवस्था में मन मस्तिष्क का इतना व्यग्र हो जाना कि उसका व्यवहार खराब हो जाए और वह मरने मारने पर उतारू हो जाए या उसके मन मस्तिष्क में आत्महत्या के विचार आने लगे तो किसी भी मनुष्य को दूसरे मनुष्य द्वारा आत्महत्या के लिए उकसाने की मनोवैज्ञानिक विधि विज्ञान तकनीकी कला को मानसिक उत्पीड़न करना कहते हैं

ऐसी मनुष्य जो दूसरे मनुष्यों का निरंतर मानसिक उत्पीड़न करते रहते हैं यह उनकी विकृत मानसिकता कही जाती है जो एक प्रकार का मानसिक अपराध शेडिस्ट या दूसरों को पीड़ा पहुंचा कर खुश होना कहा जाता है । यह एक प्रकार का मानसिक अपराध है जिसके लिए सही साबित हो जाने पर अदालत में ले जाने पर मानसिक उत्पीड़न करने वाले व्यक्ति को सजा और जुर्माना दोनों देने का विधान है।

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