Kफॉर काइनेटिक्स:- यह लोग अपने जीवन को सिर्फ अपने लिए उपयोगी समझते हुए अपनी न्यूनतम शारीरिक मनसिक ऊर्जा उपयोग सिद्धांत के द्वारा अपने जीवन को सिर्फ अपने लिए उपयोगी समझते हुए अपनी मनमर्जी के अनुसार जीते हैं । यह समाज परिवार की अवहेलना उपेक्षा करते हुए अपने जीवन को कांईंयांपन से न्यूनतम स्तर का अति आवश्यक परिश्रम श्रम करते हुए जीते हैं। इनकी रक्त शर्करा का स्तर 60 ,120 होता है जो परिश्रम के दौरान 140 तक चला जाता है अपने जीवन को निम्नतम परिश्रम करने के कारण उनके रक्त शर्करा 140 से आगे नहीं जा पाती जिससे यह प्रमेह मधुमेह। और अन्य शारीरिक राज रोग और अन्य रोगों में रोगी नहीं बन पाते हैं इनका स्वस्थ जीवन भर उच्च कोटि का होता है। जीवन के लिए उपयोगी शिक्षा शिक्षण जगत की शिक्षाओं की परवाह नहीं करते । यह अपने जीवन को अशिक्षा,न्यूनतम शिक्षा, अल्पम शिक्षा, अर्थहीन शिक्षा, बिना धन की शिक्षा पाने वाले सत्संगी शिक्षा से प्रशिक्षित भ्रमित शिक्षा, या अपरिचित परंतु शत्रुओं के शत्रुता दृष्टिकोण वाली विपरीत गुणधर्मों से परिलक्षित शिक्षा से प्रशिक्षित होकर अपने जीवन को दूसरों की शिक्षा दिशा निर्देशों के अनुसार अबोध और बुद्धिहीन तरीके से जीते हैं ।
L एल लेबर:-यह लोग अपने जीवन को दूसरे पारिवारिक समाजिक लोगों की इच्छा आवश्यकता आकांक्षाओं के दिशा निर्देशों के अनुसार अपने लिए कम दूसरों के लिए ज्यादा ऊर्जा उपयोगिता के सिद्धांत के अनुसार परिवार समाज के लिए अधिक परिश्रम करते हुए अपने जीवन को परिश्रम उपयोगिता से जीते हैं। L फॉर लेवर यह समाज के सबसे निम्न स्तरीय परिश्रमी जगत के अल्प शिक्षित अल्प बुद्धि मेहनतकश होते हैं । यह विकास और तरक्की के आधार शिक्षा की ओर से उदासीन होते हैं । यह अपने जीवन में अपने परिश्रम को दूसरे लोगों के निशा निर्देशों के अनुसार करते हुए अपने जीवन को दूसरों के नियंत्रण में जीते हैं । इनका रक्त शर्करा स्तर 70, और140 तक होता है जो परिश्रम के दौरान 160 तक चला जाता है इनका स्वास्थ्य उच्च कोटि का होता है यह प्रमेय मधुमेह और अन्य प्रकार के शारीरिक रोगों के रोगी नहीं बनते। इनमें निजी चिंतन क्षमता नहीं होती यह दूसरे के दृष्टिकोण के अनुसार यदि यह सकारात्मक दृष्टिकोण वाले हैं तो इनका स्वास्थ्य अच्छा होने से यह रोगों के जाल में नहीं फंसते। परंतु यदि इनका नकारात्मक दृष्टिकोण बन जाता है तो यह नकारात्मक दृष्टिकोण वाली असाध्याय कुसाध्य रोगों में आजीवन फंसे रहते हुए अपने जीवन को विभिन्न प्रकार की समस्याओं में फंसे हुए अपने जीवन को निरंतर गरीबी निर्धनता में जीते हैं । यह अपने जीवन में विकास और प्रगति नहीं कर पाते ।
Mफार मैकेनिकल:- इस प्रकार के जीवन स्तर से जीवन में विकास और पगति की शुरुआत होती ह। यह अपने जीवन में मशीन के समान अधिक समय तक परिश्रम करने वाले अध्ययनशील स्वाध्यायी होते हैं । परिश्रमी प्रवृत्ति होने के कारण उनके रक्त शर्करा का स्टार 80 160 तक होता है जो उच्च परिश्रम के दौरान 180 तक चला जाता है प्रमेय और मधमेह से संबंधित अन्य शरीररोग शुरुआत रक्त शर्करा स्तर 180 केबाद शुरू होती है 180 रक्त शर्करा स्तर के बाद मूत्र में शुगर जाने लगती है 190 के बाद रक्त शर्करा पसीने से बाहर निकाल कर त्वचा के ऊपर एकत्रित होने लगती है जिससे त्वचा पर तरह-तरह की त्वचा रोग फोड़ा फुंसी मसूरीका दाद खाज खुजली एग्जिमा आदि उत्पन्न होते हैं । यह मशीनीकृत दृष्टिकोण वाले लोग भीभी स्वस्थ परिश्रमी निरोग शरीर वाले होते हैं। थे ये न इनका अधिकतर समय उपयोगीता पूर्ण अध्ययन करने में उपयोगिता पूर्ण वार्तालाप करने में उपयोगी कार्य करने में व्यतीत होता है यह अपने जीवन को सार्थकता पूर्ण नजरिया से जीते हैं। तो स्वस्थ रहते हैं । यदि उनकी शिक्षा त्रुटि पूर्ण विपरीत परिणाम की हो जाती है तो यह दुष्ट शिक्षा के प्रभाव से हाइपोकांड्रियायस मनोरोगी होने से लोगों की तरह की नकारात्मक और विविध रोगों की चर्चा सुनकर अपने को रोगी मान लेने से तरह-तरह के रोगों में घिरकर अपने जीवन को जीते हैं। यदि इनको सही समय पर सही ज्ञान सही शिक्षा मिलती है तो यह अपने जीवन में अपने लिए विकास और प्रगति का आधार निर्धारित करते हैं।
N थे फार नोटोरियस:-यह विशेष विचारक चिंतनशील अपने जीवन को अपनी इच्छा अपनी आशा अपनी आकांक्षाओं के अनुसार जागरूक जीवन पद्धति से अपने जीवन को जीते है। यह जीवन जीने के दौरान गलती होने पर, असफल / फेल होने पर रुक कर अपने लिए हित चिंतन करने वाले अपने जीवन को योजना पूर्ण तरीके से विकास और पगतिशील सार्थक जीवन जीते हैं।
ओ फार ऑपरेटर:- यह अपने जीवन को दूसरे लोगों को नियंत्रित करते हुए आप नेता या अफसर या प्रशासक बनकर समाज के बहुसंख्यक लोगों को नियंत्रित करते हुए उनके परिश्रम से लाभ उठाते हुए उनका शारीरिक मानसिक आर्थिक सामाजिक शोषण करते हुए स्वयं आति पोषित दूसरों को न्यूनतम पोषण देते हुए दूसरों के जीवन को दिशा निर्देश देते हुए विश्व में जीवन स्वामी बनाकर नियंत्रण कर्ता बनकर अपने जीवन को जीते हैं। इनका दृष्टिकोण IAS, ब्राह्मण IPSक्षत्रप IBS उच्च व्यवसायिक उद्योगपति वाला समाज नियंता धर्माधिकारी वाला धर्म समाज शिरोमणि होता है । यह अपने बुद्धि वि
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वेक से तरह-तरह के संगठनों का निर्माण करते हैं तरह-तरह की संगठनों का संचालक स्वामी रूप से करते हैं।
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