जीवन में प्रगति आक्रमक रवैया , सक्रियता , विस्तारवादी सोच पर निर्भर है या रक्षण निष्क्रियता और संकुचनवाद पर निर्भर है !

मनुष्य के जीवन में प्रगति उसकी सोच के रवैया पर निर्भर करती है यदि मनुष्य का आक्रामक  व्यवहार आक्रमणकारी रवैया / सोच सक्रियता विस्तारवादी सोच के नर विचारों  की अधिकता है ।उसका जीवन ऊर्जा सामान्य लोगों की तुलना में अधिक उच्च   स्तर  ह । तो ऐसे में उसकी प्रगति संघर्ष शील सोचविचार से  आसान होती है । परंतु यदि उसमें रक्षण  निष्क्रियता अल्प सक्रियता जैसा रवैया और संकुचन वादी सोच है।उसका बौद्धिक शारीरिक ऊर्जा स्तर सामान्य या सामान्य से कम है । तो उसकी प्रगति के संभावना कम ही है।

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