सभी जीव का जीवन और निरोगी काया इस बात /नियम पर निर्भर करती है कि जीव ने अपने जीवन में अपने लिए निर्धारित समय और समय के अनुसार निर्धारित ब्रह्माण्ड से मिलीं जीव काया ऊर्जा कार्य ऊर्जा का कैसे उपयोग सदउपयोग दुर्उपयोग किया । यदि वह अपने जीवन के लिए ब्रह्माण्ड से मिली ऊर्जा का सदुपयोग किया करता है तो निसंदेह 100साल या अधिक समय जीवन जिया करता है । यदि वह अपने जीवन के लिए मिली जैविक विचार और कार्य करने के लिए मिली ब्रह्माण्ड ऊर्जा का दुरुपयोग किया करता है तो 100 साल और 50 साल के मध्य में अपना जीवन अपनी हिकमत तिकारत के अनुसार 60, 70,80,90 -100साल जिया करता है । जीव को जन्म लेने के बाद अपना जीवन खुशहाल समृद्धि योजना से जीने के लिए आजकल की शिक्षा में ऊर्जा दुर्उपयोग सिखाया जाता है जिससे जीव अपना जीवन सौ साल से पहले पूरा करके दुनिया में से चला जाता है।
ऊर्जा के उत्पत्ति :- नियम
लाँ आफ थर्मोडायनामिक्स ( आक्सीकरण, अपचयन)
लाँ आफ इनर्जी ट्रांसफर (चालन,संवहन, विकिरण )
लाँ आफ इनर्जी फिक्सिंग ( मैटाबोलाईट रुपान्तरण ) फोटोसिंथेसिस )
जीव को निजदृष्टिकोण से निजी जीवन के क्षेत्र में उपलब्ध ऊर्जा उपयोग का ज्ञान होना चाहिए
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