त्रिकालदर्शी किसे कहते हैं और क्यों
जो व्यक्ति टाइम ट्रेवल आर्ट साइंस जानता है। वह समय के चारों आयामों में से 3 आयामों में वर्तमान काल ,भूतकाल ,भविष्य काल मैं दर्शन की क्षमता सीख जाता है । अर्थात वह इन तीनों तरह के समय में योग वशिष्ठ के अनुसार आ जा सकता है। परंतु मन का चौथा आयाम जिससे गुप्त काल भी कहा जाता है जिसमें मनुष्य प्राणी का मान मरने के बाद शरीर के इंतजार की प्रतीक्षा में विश्राम करता है ऐसे गुप्त काल में टाइम ट्रैवलर्स व्यक्ति त्रिकालदर्शी व्यक्ति नहीं पहुंच पाता है। इसमें केवल मनुष्य का अवचेतन मन ही जा पाता है ।। उसमें त्रिकालदर्शी व्यक्ति के आने जाने की सामर्थ नहीं रहती है ऐसा विचित्र को तू वही मनुष्य कर सकता है । जिसका अपने मन की सभी प्रकार की चैतन्य अचैतन्य अवचेतन और सुपर चेतन अवस्था में आने जाने की स्थिति पर अपनी इच्छा से नियंत्रण कर लेता है। वही व्यक्ति त्रिकालदर्शी या टाइम ट्रैवलर बन सकता है । यह मन की निर्मल अवस्था कही जाती है जिसमें मन की गति को रोकने वाला कोई भी किसी भी तरह का भावनात्मक , वासन आत्मक कामनात्मक बाधा मन की गति को नहीं रोक पाती है और मन की गति कालचक्र के तीनों आयामों में आबाध /निर्बाध रूप से होने लगती है।
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