मंगल दोष जन्म कुंडली के 1, 4 ,8 ,12 वें भाग में अशुभ युति क्रूर भयंकर ग्रहों के सानिध्य से उत्पन्न होता है । जैसे 1 शनि 2 राहु 3 वरुण ,4 यम के सान्निध्य से निकटता से द्रष्टि से ।
यदि युति सानिध्य श्रेष्ठ ग्रह बृहस्पति, शुक्र, चंद्रमा मंगल के साथ में है तो मंगल दोष का प्रभाव क्रम शः घटता जा ता है
मंगल दोष तब अनुवांशिक होजाता है जब माता पिता दोनों मंगल दोष से ग्रस्त होते हैं तब मंगल दोष उनकी संतान में स्थानांतरित हो जाता है ईसे व्यर्थ मित्थया न समझेंं यह वास्तव में होता है । इस पर अमेरिका में 2002–3 में अध्ययन हुआ है । विधवा परित्यक्त आ अपराधी आक्रामक महिलाओं और लड़ाकिया विलेन माईन्ड लोगों पर अध्ययन किया गया , तो पाया कि उनके मस्तक पर v शेप में अतिरिक्त रूप से बाल पाये गये 75%महिलाओं के माथे पर यह v का निशान छोटे या बड़े रूप में पाया गया ,पुरुषों में लड़ाकू अपराधियों के माथे पर 60% से अधिक लोगों में पाया गया था इसे आप नैट पर vidow peak पर देख सकते हैं । वैज्ञानिक विवेचना आप नैट से , स्वयं पढ़ें ।
यदि कुंडली में मंगल 1,4,8,12 वें स्थान पर नहीं है परन्तु माथे पर छोटे या बड़े क्षेत्र में बाल हैं ।कलमची माथा है सामने पार्शव में माथे पर बाल नहीं हैंं । तो पंडित से पत्री कुंडली विवेचना की आवश्यकता नहीं है । जातक झगड़ू ,झगड़ालू ,झगड़े खोरा निकलेगा जिसका मतलब है मंगली या आक्रमण कारी ।
मंगली और मंगल दोष में यह अन्तर है कि मंगली लड़ाकू भिड़ंत -तिया होता है जिसकी अक्सर लड़ाई झगड़े में विजय /जीत होती है । जबकि मंगल दोष वाला पुरुष हो या मंगली स्त्री इनकी सदैव झगड़े में ,लड़ाई में हार /पराजय होती है परंतु इन्हें लड़ने में मजा /आनन्द आता है ,जिससे यह जीवन भर लड़ते हारते रहते हैं ।और लड़ाई की हार से कोई सबक शिक्षा नहीं लेते ।
किससे लड़ना है? कब तक लड़ना है ? कहाँ तक लड़ना है ? लड़ाई में ये लड़ते हुए मंगली दोष वाले कहीं तक ,किसी भी सीमा तक अनितिक क्रूर दुष्ट पन की मानवीय सीमा से परे पशुओं के भी स्तर से नीचे जा सकते हैं .।ज़नूनी ,वहशीपन से आगे ।
मंगल कुंडली में जिस भी स्थान पर भी होता है सिर्फ 3 तीसरे स्थान में अकेले होने पर शुभ होता है ,ऐसे लोग जीवन में सिर्फ जीतने को पैदा होते हैं ,इनकी कभी भी लडाई में हार नहीं होती । परन्तु यदि 3 रे घर में कमजोर ग्रह बुध आजाये तौ यह शुभ मंगल भी भ्रात दोष कृष्ण कुंडली में बदल जाता है ,ऐसे जातक का जीवन जिन्दगी भर अपनो से दूसरों से लडऩे में जाता है उसे मानसिक शांति नहीं मिलती , उसे अकारण असमय में भी अपने हो या पराये सभी लड़ाई का मजा लेने को ढूँढते रहते हैं और वह आजीवन दूसरों के लिए लड़ता ,लड़वाता रहता हुआ लड़ाई में खप जाता है यदि अच्छे सज्जन हितकारी लोगो में रहना नहीं सीखा ,तो उसका जीवन रण भूमि में पूरा होता है ।
शेष विवेचना अपने अनुभव से जातक स्वयं सीखेंगे ।
1 घर में पिता से ,2 में माता से 4 में पड़ोसियों मित्रों ,युगल सहायक ,पति का पत्नी से ,पत्नी का पति से वैर । 5वें में गुरु से 6 में शुक्र से 7 में विस्तार /वृद्धि से 8 वे में यम से यानि स्वयं ही स्वयं का शत्रु आत्महंता 9 शनि विवेक शत्रु अपने शुभ चिंतन कर्ता ओं का बुरा सोचने, करने वाला , 10 वाँ ईन्द्र शत्रु राजा से पंगा लेकर अपना अहित करने वाला शंम्मूक वंशी ,11 वें मे सेवक शत्रु 12वें में कुल शत्रु कुल हंता सिद्ध होता है । अपने झगडालू स्वभाव ,लड़ने की आदत से ।
यह रहा संक्षेप में लेख ःः लोगों में मंगल दोष को लेकर चिंता होती है ,परंतु मंगली दोष से बड़े बड़े भयंकर दोष है जैसे यदि इन 1,4,8,12में चंद्रमा आजाय तब चंद्र दोष से वंश ,कुल ,जाति ,पित्री भावी पीढ़ी दोष से युक्त पुरुष स्त्री जातक चंद्र बल की प्रधानता से भीरु ,स्त्री समान आचरण करने वाला अधिक पुत्रियों वाला ,पुत्रहीन, पुत्रशोक आदि सामाजिक समस्या ओं से ग्रस्त होता है । यदि स्त्री की कुंडली में इन स्थान पर विग्रही अशुभ युति नीच सूर्य आजाये तो स्त्री में सूर्य बल अतिरिक्त बढ़ जाने से सूर्य बली होती है जो भय हीन ,लज्जा हीन ,दुस्साहसी होने से पितर कुल को ,पति कुल को समस्या ओं से ग्रस्त करती रहती है । यदि इन ग्रहों में विग्रही नीच गुरु आजाये तो जातक को सुधारने में श्रेष्ठ से श्रेष्ठ गुरु भी असफल होता है । यदि इन ग्रहों में विग्रही नीच शनि आजाये तो जातक विवेक हीन हो जाता है सही निर्णय नहीं ले पाता जीवन भर , उसकी जिंदगी में उसके अधिकांशतः फैसले /निर्णय गलत होने से वह जीवन भर उचित अवसर चूकने /छोड़ने की महामूर्खता पूर्ण गलती दर गलती करता हुआ जीवन मर अभिशप्त जीवन जीता है ।
ज्योतिष शास्त्र आँकड़ों का साँख्यकि गणित है ,एक सेकेंड की काल त्रुटि हुई और फलित ज्योतिष का परिणाम कुछ का कुछ होता है ,कुंडली तक में बदलाव आता है ।अतः यह विश्वासनीय कम है ।जबकि गुणों का विज्ञान अनुवांशिकी , शरीर मुद्रा ज्ञान बाँडी लैंग्वेज आधुनिक होने से विश्वसनीय हैं ।
पर बुद्धिमानी इसी में है कि यदि अपनी कमी /भूल का पता लग /चल जाय तो ः
सुधार करो अपने स्वभाव में , आदत में सोच मेंं ,व्यवहार में ,कर्म में ,, ।
बदलो अपनी किशमत अपना भाग्य सिर्फ अपने लड़ाकू विचार व्यवहार त्याग /छोड़ कर ,ःःःःखोलो अपने दिमाग के द्वार , स्वागत करो ,स्वीकार करो ,ग्रहण करो नये आधुनिक विचार ।
लिखने वाले ने लिख दिया —विधाता ने , । बाँचने वाले पंडित ने बाँच दिया । सुनने वाले ने समझ लिया ,अब दोष किसी का नहीं ।
होनी होने को बनी ,शिक्षा रोकने को बनी ,इतने पर भी घटना घटित हो तो दोष किसी कि नहीं , विधाता बली है ।
राम राम भाई जी पढ़ने वाले को ..ःः पंडित जी की ।
यह कुंडली बाँचने की विधा है ।