मेरे पास गाय है जिसका एक थन दो साल पहले व दूसरा एक साल पहले बंद हो गया, अब दो थन से दुध आता है। कुछ समय से आस पड़ोस की गायों में भी यह समस्या आ रही है। ये समस्या क्यों, कैसे आती है? क्या इसका कोई देशी व अन्य कोई इलाज है?

इस समस्या का कोई देशी या आयुर्वेदिक इलाज नहीं है मेरे पड़ोसी फूलसिंह ताउ जो गौताने थे पशुओं का देशी आयुर्वेदिक दवाओं से इलाज करते थे ।मैंने उनके साथ गाँव में कई ऐसे पशुओं के केस देखे थे ।जिनका इलाज सफल नहीं हुआ था।पशुओं के थन क्रमशः एक के बाद एक मरते जाते थे । अन्त में एक थन बचता था जिसमें अधिकतम दूध आता था लेकिन चार थनों की पूरी क्षमता से कम ,ऐसे में एक थन का आकार असामान्य रूप से बड़ा होजाता था तीन थन छोटे हो जाते थे ,दुधारू पशु देखने में भोंडा लगता था रोग की अन्तिम अवस्था में। . ऐन . टेढ़ा हो जाता था ।
( लगता है उस स्थान पर मिट्टी बैक्टीरिया /प्रोटोजोआ से संक्रमित हो गई है। जिससे लगता है यह पशुमहा रोग बन गया है ।)
उस टेढ़े ऐन वाले पशु को लोग अच्छा नहीं समझते । धनी लोग ऐसे टेढ़े ऐन वाले पशुओं को दूसरे निर्धन लोगों को मुफ्त में देदेते थे ।या फिर जंगलों में छोड़ देते थे ।
इस बिमारी को ताउ के शब्दों में थन मरना कहते हैं।
इस रोग में पशु के शरीर का ताप कम रहने लगता है जिसको सामान्य तौर से ऊँचा रखने के लिए करेला ,नीम ,चिरायता, पित्त पापड़ा ,जेब सामर्थ्य से जो उचित हो वह खिलाएं ।चारा में ज्वार गेहूं भूसा फिलर चारा तथा हर चारा खिलाएं । गलती /भूल से भी मक्का ,धान का ठंडा गुण वाला चारा न खिलाएं । यह रोग गरीब लोगों को असाध्य है परंतु आज इस रोग का इलाज संभव है। यह एक बैक्टीरिया /प्रोटोजोआ का संक्रमण है ।जिसके मौजूदगी से पशु के थनों में सिस्ट बन जाती हैं गाँठें पड़ जाती हैं जो दूध के मार्ग को रोकने लगती हैं अन्ततः आखिर में दूध मार्ग को पूरी तरह से रोक देती हैं । इस की उचित एलोपैथिक चिकित्सा उपलब्ध है एन्टीबायोटिक दवाओं से पूरा इलाज होता है। कृपया आलस्य न करें ।पशु की ऐलोपैथिक चिकित्सक से चिकित्सा करायें जो पूर्ण प्रशिक्षित पशु चिकित्सक बी. वी . एस . सी . की बेसिक डिग्री वाला उच्च शिक्षित हो ।
बाजार में पशुथनों में दूध की ब्लौकेज खोलने की आज होम्योपैथी क दवाईयाँ भी उपलब्ध हैं ।अच्छे प्रशिक्षित होम्योपैथिक चिकित्सक से संपर्क करें ।

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