बेताल के अनुसार सिर में आत्मा का निवास स्थान होता है ।शरीर में सिर अमूल्य है जीवन स्रोत है ।समस्त जैविक सूचनाएं सिर में होती हैं ।जीवन सिर से संचालित होता है । सिर विहीन शरीर के आन्तरिक अंग हृदय, आंत, यकृत, किडनी, आदि बदल जाने के बाद सिर उनका संचालन नियंत्रण करने में समर्थ होता है ।
अतः जहाँ सिर है वही शरीर है वही सिर धारी आत्मा शरीर नियंता है ।
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