ऐसी छोटी छोटी चीज़ें क्या हैं जिनसे वज़न कम करके एक बड़ा बदलाव लाया जा सकता है?



वजन कम करने का सिर्फ एक ही सही प्रमाणिक तरीका है जीवो के शरीर में भी कोशिश की ऊर्जा उत्पादन ईकाई माईट्रोकोन्डिया की संख्या ओं की जानकारी और उन माईट्रोकोन्डिया के आक्सीकरण क्रियान्वयन के पैटर्न की सम्यक जानकारी ःःसंक्षेप में यह जानकारी नैट ज्ञान से आधारित है और मेरा अनुभव शामिल है मैं इसका अनुमोदन /स्वीकृत करता हूँ
माईट्रोकोन्डिया की संख्या लीवर सैल मै1000–2000, हृदय सैल में 5000–6000तक तथा मस्तिष्क कोशिश न्यूरॉन में 10000–50000 तक होती है यह संख्या स्थिर स्थाई नहीं है समय आयु कार्य आवश्यकता लिंग आदि कारकों के अनुसार बदलती रहती है । माईट्रोकोन्डिया सदैव संतान में उसकी माता से आते हैं । मनुष्य में पिता के माईट्रोकोन्डिया कभी भी नहीं आते कारण कि पिता के माईट्रोकोन्डिया उसके मिलन युग्मक/शुक्राणुओं की पूँछ में रहते हैं जो स्त्री युग्मक अण्डाणु से निषेचन /पूर्ण मिलन प्रक्रिया में अण्डाणु के नाभिक/केंद्र में नहीं प्रवेश कर पाते । पूँछ टूट कर अण्डाणु कोशिका से बाहर रह जाती है ।जिससे बच्चों का जैविक ऊर्जा संचालन ,नियंत्रण , जैविक निजी ऊर्जा स्तर उनकी माँ के समान होता है । इससे कहा जाता है कि बच्चों की सेहत ,स्वास्थ्य उनकी माँ से ड्राफ्ट होता है । सेहत का उत्तर दायी घटक माईट्रोकोन्डिया उनकी माँ से आता है ।
माईट्रोकोन्डिया में ही भोजन का पूर्ण आकसीकरण /दहन होता है ,जिससे जीव / बच्चों की जीवन जैविक क्रियाएं संचालित होती हैं ।ऊर्जा उत्पादन होता है । ग्लूकोज और फैट के आक्सीकरण /दहन से ।
भोजन के अनुसार यदि मानसिक शारीरक श्रम /कार्य किया जाता है ।तो वजन के बढ़ने की सम्भावना बिल्कुल भी नहीं है ।
वजन तब बढ़ता है जब खाये गये भोजन की कैलोरी मात्रा के अनुसार श्रम कैलोरी ऊर्जा व्यय नहीं की जाती है ।
यदि पौष्टिक भोजन में वसा ,फैट ज्यादा लेते हैं और शारीरिक श्रम उतना नहीं करते हैं वसा के प्रमाण के अनुसार तो वसामें आयी अतिरिक्त कैलोरी ऊर्जा शरीर में वसा/फैट में बदल कर शरीर का वजन बढा देती है । यदि काम/श्रम ज्यादा है भोजन में कारबोहाइड्रेट, वसा कम परिमाण में ली जाती है तो शरीर की रिजर्व संचित वसा जलकर शरीर का वजन घट जाता है ।
इसके अलावा शरीर में कारबोहाइड्रेट के अधिक सेवन/खाने से कारबोहाइड्रेट भी वसा में बदल जाता है जिस कारण चावल शुगर खाने से भी वजन बढ़ता है ।
अंतर सिर्फ इतना है कि कारबोहाइड्रेट से बनी बसा लचीली होने से वह आसानी से आक्सीकरण प्रक्रिया में जाकर शीघ्रता से जलकर जल्दी ऊर्जा देती है उतनी हानिकारक नहीं होती है जबकि जन्तु वसा घी चर्बी कठोर होती है । पादप वसा तेल की तुलना में , जिसके सेवन से कालेस्ट्राल सम्बंधित समस्या एं उत्पन्न होती है ।
अब यदि वजन घटाने में आप ज्यादा जागरुक हैं तो खाने के आईटम भोजन घटको का ज्यादा विशलेषण विवेचना करने की आवश्यकता नहीं है ।
जरुरत है ब्रैन माईट्रोकोन्डिया की अधिक संख्या देखते हुए ज्यादा से ज्यादा मानसिक श्रम करना सक्रिय रहना पढ़ाई लिखाई चित्रकारी वार्ता (बात चीत ) आदि बौद्धिक कार्य करना या फिर कठिन से कठिन अधिक तम परिश्रम करना । अपने को सक्रिय रखना , न्यूनतम जरूरी निद्रा लेना । गोपनीय कार्य करते रहने से शरीर के वजन बढ़ने का प्रश्न ही पैदा नहीं होता है ।
वजन उनका बढ़ता है जो न शरीर से श्रम /मेहनत करते हैं । न दिमाग को मेहनत करते देते हैं ,न चिंता करते हैं न चिंतन और न होते हैं चिंतित कैसी भी विषम विपरीत परिस्थितियों के पैदा होने पर भी ,जीते हैं अपने जीवन को बेफिक्र ई से ।

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