जन्म पत्री में जातक का टैक्सोनोमिक , अनुवांशिक , वर्तमान जीव का मूलक पशु यौनिक , भविष्य के पूर्वानुमान का डाटा ज्योतिष विद्या पर आधारित आँकड़ों /सांख्यिकी तथ्यों पर आधारित डला /लिखा होता है ।जिसको हर कोई /प्रत्येक व्यक्ति आसानी से नहीं समझ सकता है इसको समझने के लिए ज्योतिष शास्त्र का डिप्लोमा ,डिग्री , पी.एच.डी, .विद्याधर आदि कोर्स करना पड़ता है . यह भी जातक /मनुष्य का एक प्रकार का जीवन योग्यता प्रमाण पत्र होता है जो जातक /मानव को साधारण से पंडित से लेकर प्रख्यात विख्यात ज्योतिष आचार्य, विद्वान ,मनीषी ,और विद्याधर कोटि के व्यक्ति द्वारा दिया जाता है । पहले यह ज्योतिष विधा पंडितों, ब्राह्मणओं ,ठाकुरओं, बनियों तक सम्मानित रूप में सीमित थी जन साधारण के जीवन व्यवहार में नहीं थी लोग जन्म पत्री टेवा आदि नहीं बनवाते थे ।जब से लगभग तीस वर्ष से जब से कमप्यूटर लोगों के दैनिक व्यवहार में सामान्य हो गया है तब से अधिकतर लोग अपनी जन्म पत्रिका /पत्री बनवाने लगे हैं ।कोई पंडित से कोई कमपयूटर से बनवाता है लेकिन जन्म पत्रिका को समझने के लिए उच्च कोटि के ज्योतिषियों ,पंडितों, विद्या धर ब्राह्मण लोगों के पास जाना पड़ता है ।वैसे अब जन्म पत्री को पढ़ने बाँचने की सुविधा नैट पर उपलब्ध है यदि मोबाइल में कुंडली एप डाउनलोड है ।परन्तु फिर भी ज्योतिष के क्षेत्र में ज्योतिषी का स्थान कम्प्यूटर नहीं ले सकता है । यह ठीक इसी प्रकार से है जैसे पढ़ें लिखे व्यक्ति को बोर्ड शिक्षा का प्रमाण पत्र देता है उसमें उस छात्र के परीक्षा विषय और उन विषयों में उसकी योग्यता प्राप्तांकों और पूर्णांकों के अनुपात के रूप में लिखी होती है जिस केवल शिक्षक और शिक्षा सलाहकार ही समझ सकते हैं जो जन सामान्य की समझ से परे होती है जैसे यदि छात्र ने जीव विज्ञान पढ़ा है तो उसके चिकित्सा क्षेत्र में जाकर जीविका की संभावना बन जाती है ।यदि भौतिक विज्ञान पढ़ाहै तो भविष्य में इन्जीनियर की सम्भावना बन जाती हैं इस प्रकार हर विषय की योग्यता /अयोग्यता का उसके भावी जीवन में असर पड़ता है ।
ठीक शिक्षा प्रमाण की तर्ज पर कुंडली /जन्म पत्री ज्योतिष शास्त्र का प्रमाण पत्र जन्मकुन्डली, चंद्रकुन्डली जन्मपत्री , जन्मपत्रिका टेवा ये सभी उस जातक /मनुष्य के ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बने प्रमाण पत्रों का संग्रह होता है जिसमें उनकी प्राचीन विधा के अनुसार वर्तमान समय की टैक्सोनोमिक ,बायोलॉजिकल कैरेक्टर गुँण लक्षण ,जैनैटिक,फिजियोलॉजिकल ,फिजिकल , जैविक, पशुयौनिक भविष्यक संभावनाओ का ब्यौरा शब्दों, संख्याओं के रूप में गोपनीय ज्योतिष की भाषा में लिखा होता है जिसे एक्सपर्ट विशेषज्ञ ज्योतिषी ही पढ़ समझ सकता है यह पुरानी वैदिक भूतकाल वर्तमान भविष्य का वर्णन /बखान पूर्व अनुमान विद्या है । यह जिस जातक मनुष्य स्त्री पुरूष के नाम से वह बनी है ।उसका बखान किया करती है जो उसके ब्लड रिलेशन माता पिता पत्नी संतान का सटीकता से तथा मित्रों शत्रुओं, रोजगारदाता मालिक ,संपर्क में रहने वाले पशु पक्षियों के लाभ हानि की गुँण विवेचना का विज्ञान (गुप्त ज्ञान को प्रकट करनेवाला शास्त्र ह )बखान करती है जो वाचक की आत्मा प्राण चित्त धर्म की शुद्धता पवित्रता पर तनाव रहित मानसिक तटस्थ विचार पर निर्भर करता है ।लोभ लालच भय की अवस्था में ज्योतिषी के कथन भ्रम पूर्ण से लेकर असत्य विपरीत तक गलत उल्टा परिणाम दे दिया करते हैं ।
अब जन्मपत्री मिलान विवेचना का संक्षिप्त परिचय ःःःःजन्म पत्री मिलाते समय विवाह प्रस्ताव/शादी की शुरुआत में जिनकी शादी होने वाली होती है उनका उपरोक्त गुँण लक्षण विवेचना का गणितीय भाषा में कुंडली मिलान 12 श्रेष्ठ अश्रेष्ठ गुँण पुरुष जातक के ,12 श्रेष्ठ अश्रेष्ठ गुँण स्त्री जातक के ,12श्रेष्ठ अश्रेष्ठ गुँण उनकी नपुंसकता पौरूष पराक्रम अवस्था वृद्धावस्था के कुल मिलाकर36 गुँण बनते हैं ।इन 36 गुँणों में से 18 पर शादी मान्य है 18 से 24 तक उत्तम है 30 तक श्रेष्ठ है ।30 से आगे निषेध है अमान्य है गुँणों में अति समानता अति मिलान से दोनों जातक अति निकट संबंधी भाई बहिन मानकर उन दोनों के बीच प्रेम है परन्तु राग नहीं की संभावना को मानकर उनके बीच यौनसंबंध के दौरान राग की कमी से विषमरति संबंधों के कारण आजीवन संघर्ष पूर्ण संबंध रहेंगे।जबकि 30 से निंचे कम होने पर राग बने रहने से समरति संबंध से प्रेम राग पूर्ण संबंध रहेंगे ।संघर्ष लड़ाई करते हुए मिलन की भावना अपूर्णता से पूरणता की ओर ज्यादा होगी । बहन भाई के बीच मर्यादा का संबंध होता है जीनिक समानता होमोजाईगोस्टी के कारण जीनों मेंसमान जैविक जैनैटिक आवेश होने से जीवन निरंतरता की संभावना कम होती है ।जबकि अपरिचित पति पत्नी में जैनैटिक जैविक आवेश की असमानता हैट्रिक जाईगोस्टी के कारण जीनों में रिमिक्स / मिश्रण की संभावना बढ़ने से जीवन निरंतरता की संभावना ज्यादा होती है।इस कारण से कुंडली मिलान में समानता ज्यादा परन्तु पूरी तरह समान नहीं के नियमों को ध्यान रखते हुए 18 —3० /36 के गणित नियमों का पालन किया जाता है ।
अब जैविक /जीवन विज्ञान नियमों के अन्तर्गत नाड़ी मिलान में पुराने पैटर्न में बी.एम.आर. रेट शरीर की जीवन के लिए आक्सीकरण दर के आधार पर आदिनाड़ी अधिक आयु जँचने वाले, बड़े /बड़ी ,, मध्यनाड़ी सामान्य वास्तविक आयु जँचने वाले , समसमायिक आयु ,,अन्तय नाड़ी सही उम्र से कम जँचने वाले छोटे/छोटी दिखने वाले । पर वर्तमान में नाड़ी मिलान का मतलब है कि उन दोनों का 1 ब्लड ग्रुप रक्त समूह एक जैसा समान न हो ।2 यदि आपत्ति काल मे ंं नाड़ी दोष ज्यादा आ रहा है नाड़ियाँ और रक्त ग्रुप ज्यादा मैच /मिल रहा है तो ऐसी स्थिति में. rH फैक्टर भी समान + & + हो । rH + &rH — न हो ,जिससे संतान जनित दोष मृतवत्सा, काकबंध्या आदि पैदा न हों ।
गण सर्ग के अंतर्गत दोनों के सामाजिक परिवारिक जीवन शैली में समानता है तो उचित है यदि गण समान नहीं हैंं तो विचारणीय हैं परन्तु दोनों के दृष्टिकोण, अभिवृत्तियाँ अभिरूचियाँ समान होंं विरोधी गण दैत्य देव हैं दृष्टिकोण अभिवृत्तियाँ अभिरूचियाँ भी आपस में विरूद्ध हैं तो स्त्री की दूसरे नये परिवार में नहीं निभ पायेगी ,नित्य संघर्ष परिवारि व्यंग्यबाजी शादी को जल्दी ही आत्महत्या कोर्ट कचहरी तलाकबाजी से संबंध विच्छेद तक जा सकती है
।वर्ण सर्ग में उन दोनों स्त्री /पुरुष के शरीर कद काठी वस्त्र विन्यास वेशभूषा ,ऊर्जा स्तर शारीरक मानसिक यौनिक अभिरूचियाँ क्षमता का विशेष ध्यान रखा जाता है , इन्द्र वर्ण (शासक दबंग ) देव वर्ण (समर्थ परोपकार) रत्न वर्ण (चमकना कमाउ ) अग्नि वर्ण (फुर्तीला सामान्य श्रम से न थकने वाला ) विप्र वर्ण (विशेष पुरुष लचीला दिमाग ) क्षत्रप वर्ण ( अहंकारी कठोर बुद्धि, उत्पाती उपद्रवी युद्ध प्रिय लड़ाकिया ) वैश्य वर्ण (सौम्य शान्त स्वभाव लचीला दिमाग, कर्म प्रिय )शूद्र वर्ण (शोकाकुल रौद्ररूप में रहने वाला एकांकी मजबूरी में कर्म करने वाला, मजबूरी में मनन चिंतन सोचने वाला भीरु स्वभाव का हर नये काम को करने से बचने वाला मजदूर बुद्धि मजदूर कर्म से जीवन जीने में विश्वास रखने वाला दरिद्र संस्कार युक्त ) ।उच्च वर्ण की लड़की है जैसे विप्र वर्ण तो उसे माँगकर लेने में समझदारी है रत्न वर्णा को धन से हासिल करना चाहिए, देव वर्ण को माँगकर धन देकर लें इन्द्र वर्ण / राहु वर्ण को सोच समझ कर लें ये पंगेबाज मर्यादा हीन समाज के नियम कानून से खेलने वाले /वाली होते हैं ।जन साधारण स्तर के लोग स्त्री /पुरुष इन विशेष अग्नि वर्णा इन्द्र, राहु, देव ,रत्न ,विप्र स्त्री /पुरुषों से सोच समझ कर शादी संबंध बनायें ।इनमें अग्नि ऊर्जा स्तर सामान्य से अधिक होने पर ये सामान्य ऊर्जा स्तर वाले जीवन साथी का जीवन समस्या ग्रस्त किए रहते हैं ।
योनि सर्ग में ःः अरस्तू के अनुसार मनुष्य एक जटिलतम पशु है जो कई प्रकार के पशुओं के जैसा मिश्रित व्यवहार करता है ।परन्तु मेरे विचार से उसमें एक मुख्य पशु छिपा हुआ होता है जो ज्योतिष शास्त्र में योनि के रूप में दर्ज होता .है जिससे मनुष्य में जड़ता उसके वनस्पति योनि जगत से आने की पहचान है जिसके अनुसार मनुष्य सही समय पर मनुष्य को सही क्रिया की सही प्रतिक्रिया नहीं दे पाता है दूसरा मनुष्य में पशुता उसके पशु पक्षी जगत योनि से आने की पहचान है जिससे मनुष्य मनुष्य को मनुष्य की क्रिया की अक्सर गलत प्रतिक्रिया देता है ।इसके विपरीत पशुओं में मानवता उचित समूह व्यवहार पहचान है कि ये जल्दी ही पशुयोनि में आये हैं । जिससे मनुष्य दूसरे मनुष्य स्त्री /पुरुष को गलत योन सिग्नल देकर खतरों में फंस जाता है ।पशु मनुष्य को उचित यौन सिग्नल देकर मनुष्य से यौन संबंध बनाने में कामयाब हो जाते हैं ।
योनि सर्ग में मनुष्य का यौन ऊर्जा स्तर स्वरक्षा और आक्रमण क्षमता देखी जाती है जो उसके ऊर्जा स्तर के उपयोग यानि फुर्तीले पन से देखी जाती है।ये योनिआँ पशु पक्षी पेड़ पोधोंकी है जैसे पीपल, बरगद, गूलर, पाखर ,बबूल, शिरीष, नींम आदि मछली ,मेढक, मगर,मोर ,मुर्गी ,साँप ,गाय ,भैंस ,भेड़ ,बकरी ,चूहा , हिरन , कुत्ता , खरहा ,सूअर ,हंस ,कौआ ,आदि इनमें फिर भोजन व्यवस्था के अनुसार तीन स्तर हैं शाकाहारी, माँसाहारी, सर्वभक्षी के अनुसार समयोनि ,असमयोनि ,विषमयोनि ,शत्रु योनि मित्र योनि का भेद किया गया है जिसमें शत्रु योनि दोष मारक है जैसे बाघ बकरी हिरन ,विषमयोनि दोष विचारक है जैसे बाघ भैंस गाय , असम योनि दोष चल निभ सकता है जैसे बाघ,—,भैड़िया ,कुत्ता । परन्तु श्रेष्ठ योनि संबंध तो स्व योनिज में उत्तम है जैसे बाघ बाघ ,बाघ सिंह ,।या मित्र योनि में उत्तम है जैसे बाघिन और कुत्ता ,हिरन बकरी ,गधा घोड़ी पशुओं में हाथी भैंस आदि में ।। सर्प सबसे बलवान होने से मनुष्य ओं में सर्प योनिज जातक सभी जातकों को नियंत्रण काबू में कर लेते हैं । इनको सिर्फ बंदर अति बुद्धिमान से योनि दोष लगता है ।
अब कुंडली चर्चा मे जातक के 12गुँण का विवेचन मिलान किया जाता है । 1 में सूर्य से पोषण नियंत्रण क्षमता 2 चंद्र से प्रेम और छल 3 मंगल से आक्रमकता लड़ाई में हार ,जीत ,4 राहु दुस्साहस कल्पना शीलता 5 गुरु से ज्ञान अज्ञान 6 शुक्र से भोग अभोगी ,7 वृहस्पति से विस्तार भाव संकुचन 8 यम /मौत मर्यादा शीलता ,मर्यादाहीनता 9 शनि से विवेकशीलता विवेकहीनता ,10 इन्द्र से दबंगई प्रभाव शीलता, 11 से वरुण मित्र शत्रु को बाँधने की योग्यता/कला 12 पृथ्वी से अस्तित्व ।यदि ये ग्रह स्वग्रही अपने घर में हैं तो बलवान हैं श्रेष्ठ हैं यदि ये दूसरे के अश्रेष्ठर में चले जाते हैं तो युति संयुक्त ग्रह प्रभाव दिखाते हैं जिससे उस घरग्रही का प्रभाव श्रेष्ठ युति से घट जाता है अश्रेष्ठ युति से प्रभाव घट जाता है जिससे तरह तरह के दोष पैदा हो जाते हैं जैसे सूर्य दोष, चंद्र दोष, मंगल दोष, राहु दोष, गुरू दोष ,शुक्र दोष ,वृहस्पति दोष , सब दोसों का शिरोमणि यम दोष /केतु दोष , इन्द्र दोष, वरूण दोष , पृथ्वी /संतति दोष ।और इन दोषों के काल प्रभाव के अनुसार घटने बढ़ने के प्रभाव के अनुसार दिशा /दशा ,महादशा कालिक सिमित समय अवधि के दोष पैदा होते हैं ।खत्म होते हैं । इनके निराकरण /निष्तापन के लिए आप किसी श्रेष्ठ ज्योतिषी से विचार विमर्श करें मुझे प्रश्न न भेजें न करें ।मेरा ज्ञान क्षेत्र ज्योतिष नहीं है मैंनें जो लिखा अपना अनुभव से लिखा है ।
प्रत्येक मनुष्य को अपना भविष्य में श्रेष्ठ भविष्य फल जानने की चिंता होती है ताकि वह अच्छे भविष्य को लेकर निश्चित रहे इसके लिए वह अच्छी भविष्यवाणी करनेवाले लोग मधुर बोलने वाले उत्तम भविष्यवाणी करनेवाले सलाहकारओंके पास जाता है समस्या उत्पन्न होने पर।। शादी विवाह मनुष्य की सभी समस्याओं में से एक बहुत बड़ी समस्या होती है हिन्दुओं में । क्योंकि जिस परिवार से जिस लड़की को वे अपनाने जाते हैं वह अक्सर सभी कुछ अपरिचित जुए जैसा खेल /कार्य होता है जिसे करते समय /खेलते हुए समय अनिश्चितता का माहौल/दौर बना रहता है ,।ऐसे में असंख्य शंकाएं मन मेंं उत्पन्न होती रहती हैं उस अपरिचित लड़के लड़की के बारे में उनके परिवार के बारे में ऐसे विकट परिस्थितियों में उनके परिवार वाले गुप्त विधा ज्योतिष के जानकर के पास जाते हैं वह उन दोनों की जन्म कुंडली/जन्म पत्री ,टेवा के आधार पर उन दोंनो की गुँण दोष विवेचना करता रहता है बाद में जब श्रेष्ठ गुँण अधिक और अश्रेष्ठ गुँण दोष का विवेचन हो जाता है अच्छे गुणों की संख्या ज्यादा हो जाती है दोषों का पूजा पाठ से निपटारा हो जाता है तब मन के शंका रहित होने पर कुंडली मिलान अच्छा होने पर शादी प्रस्ताव की प्रक्रिया आगे बढ़ाकर शादी विवाह संपन्न कराया जाता है ।
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