क्या गर्भावस्था और माहवारी साथ-साथ हो सकते हैं?

यह प्रश्न यदि किसी कोरा पर महिला से पूछा जाता तो अच्छा विश्वासनिय जबाब मिलता ।अब कारणवश मेरे प्रोफाइल में आगया है तो इसका जबाब लिखना मेरी नैतिक जिम्मेदारी है।जीवविज्ञान पी.जी.टी.होने से मैं इसका पुस्तकीय जबाब लिख रहा हूँ ।
महावारी एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे महिलाओं में प्रति माह 28 दिन के अन्तराल पर महिलाओं के गर्भाशय की आन्तरिक शुद्धि/सफाई होती है ।इस प्रक्रिया में गर्भाशय के अन्दर की ऊपरी परत ऐन्डोमैट्रीयम स्तर की क्रियाशील कोशिकाएं गर्भ न ठहरने के कारण पुरानी पड़ने पर निष्क्रिय होजाती हैं ।जिससे महिलाओं में गर्भ धारण की क्षमता समाप्त हो जाती है ।महिला तब तक गर्भ धारण नहीं कर सकती जब तक उसके गर्भाशय में से यह पुराने महीने की कोशिकाओं की पुरानी पर्त नहीं हटकर गर्भाशय में से बाहर नहीं निकल जाती ।क्योंकि इस पर्त में पिछले /पुराने महीने की अनिषेचित अन्डाणु कोशिका चिपकी होती है ।जब तक गर्भाशय में पुराने महीने के अनिषेचित अन्डाणु कोशिका हो या निषेचित अन्डाणु कोशिका तब तक महिला की महावारी नारी धर्म की क्रिया रूकी रहेंगी ।
स्त्रियों में प्रत्येक माह गर्भधारण के लिए उसके दोनों अंडाशय ओं में से केवल एक अंडाशय से एक अन्डाणु गर्भाधान क्रिया के लिए गर्भाशय की ओर आता है ।जिससे स्त्रियां एक बार में एक बच्चा जनतीं हैं । अपवाद कारण कभी कभी दोनों अन्डाश्यों से दोनों अन्डाणु आ जाते हैं जिससे दो बच्चे एक साथ अलग अलग शक्ल सूरत के पैदा हो जाते हैं ।यह स्वाभाविक प्राकृतिक नारी गर्भ धारण क्रिया नहीं है ।
गर्भाश्य में अन्डाश्य से आये अन्डाणु का नर शुक्राणु से पूर्ण मिलन /निषेचन हो जाता है तो माहवारी पूर्ण रूप से रुक जाती है गर्भ ठहर जाता है ।परंतु यदि गर्भ नहीं ठहरा है तो तब तक गर्भ नहीं ठहरेगा जब तक स्त्री के गर्भाशय में से पुराना अनिषेचित अन्डाणु और नर के मृत शुक्राणु ओं अंश पूरी तरह से बाहर नहीं निकल जाता ।इसलिए महिलाओं में गर्भ धारण धर्म के लिए पिछले पुराने महीने के अनिषेचित अन्डाणु और मृत नर शुक्राणु ओं का गर्भाशय में से बाहर निकलना अत्यंत जरूरी है जिसके लिए महिलाओं के गर्भाशय की पूर्ण सफाई और उसका नवीनीकरण जरूरी है जिससे गर्भाशय में पुनः नया गर्भ धारण किया जा सके ।
महावारी मासिक नारी धर्म क्रियाओं का नियंत्रण दो नारी धर्म हार्मोन एस्ट्रोजन, प्रोजैसट्रोन रसायन ओं की मात्रा नियंत्रण पर निर्भर करता है ।एस्ट्रोजन से नारी शरीर का ताप सामान्य की तुलना में कुछ थोड़ा सा बढ़ता है । शरीर का ऊर्जा स्तर बढ़ जाता है ।नर के प्रति आकर्षण भाव उत्पन्न होने लगता है । शरीर में रक्त संचार बढ़ने से हल्का सा रक्त दाब बढ़ने से गर्भाशय की ओर विशेष रक्त संचार होता है ।और गर्भाशय में जमीं हुई पिछले पुराने महीने की ऊपरी परत की कोशिकाओं का स्तर उखड़ने लगता है जिस से। महिलाओं को महावारी के शुरू आत में किसी को हल्का कम या किसी को ज्यादा असहनीय दर्द होता है । कोशिकाओं की परत के उखड़ ने से गर्भाशय के अन्दर रक्त बहने लगता है जो योनि नाल से होता हुआ योनि द्वार से बाहर निकलता है । जिसे महिलाओं में माहवारी या मासिक योनि रक्त स्राव क्रिया कहते हैं । यह 3 -5दिन तक क्रिया चलती है वैसे इसका सामान्य काल 4दिन है जो महिला के शरीर में रक्त की मात्रा स्तर पर निर्भर है ।
गर्भधारण पश्चात शरीर में प्रोजैसट्रोन हार्मोन स्तर बढ़ने से महिलाओं के शरीर का तापमान सामान्य हो जाता है।गर्भ शरीर में स्थिर स्थित हो जाता है। यदि गर्भ धारण ना हो तो अर्ध माह 14दिन बाद शरीर का ताप प्रोजैसट्रोन हार्मोन स्तर बढ़ने से सामान्य हो जाता है।शारीरिक ऊर्जा स्तर भी सामान्य होने लगता है।नर के प्रति आकर्षण भाव गिरने /कम होने लगता है ।
सामान्य तः यह नियम है कि महावारी पश्चात महिला के गर्भवती होने पर महावारी क्रिया रुक जाती है ।गर्भधारण और महावारी एक साथ नहीं चल सकतींं हैं ।यदि गर्भधारण के बाद महावारी लक्षण योनि से रक्त स्राव होता है तो गर्भपात हो जाता है ।स्थित गर्भस्थ शिशु समय से पहले गर्भाअवधि पूर्व गर्भाश्य से बाहर निकल कर योनि द्वार से बाहर निकल जाता है।यह दुर्घटना अक्सर गर्भधारण के शुरू के 3–4महीनों में आसानी से घट सकती है यदि गर्भ के प्रति जागरूक नहीं है तो, गर्भ स्थिति नियम सावधानी बरतने में गलती ?/भूल हो गई तो । 4महीने बाद यह दुर्घटना घटने के अवसर कम हो जाते हैं । कभी कभी गर्भवती स्त्री के गर्भ क्षेत्र में उदर के निचले भाग पेढ़ू में आघात लगने से, घात चोरी मारने चोट लगने से भी गर्भस्राव योनि मार्ग से रक्त आ जाता है । जो उचित समय पर उचित चिकित्सा से ठीक हो जाता है । इसको गर्भावस्था में माहवारी न समझा जाय । महावारी का विशेष लक्षण है रक्त का 3 - से 4 दिन आना ।
अब अपवाद या नियमहीनता की घटना का प्रमाण
कारणवश उस महिला का नाम नहीं लिया जा सकता है।वो जिन्दा नहीं है । एक दिन वह महिला किसी दूसरी महिला को अपना संस्मरण बता रही थी । कि उसका चौथा बच्चा गर्भ में था वह पेट से थी इस दौरान खुद उसे बच्चे के पैदा होने तक आठ माह तक लगातार माहवारी होती रही ।आठ बार माहवारी आयी वह हर बार माहवारी के समय घबरा /डर जाती थी कि गर्भपात हो जायेगा अबकी बार ,और इसी डर के चलते हुए उसको आठ महीने हो गए तब नौवें महींने में लड़का हुआ ।इस असामान्य अपवाद की घटना की चर्चा करते समय उसे मेरी मौजूदगी का ध्यान नहीं रहा बाद में जब मैं उसकी नजर आया, तब वह हँसकर बोली , . अये लोग तुम खड़े रये छुप कै हम लुगाइयों की बात सुनते रये इ बताऔ तुमनै का सुनौ ? तब मैंने अज्ञानी मुद्रा भाव बना कर कहा ,भावी मैंने कछु ना सुनौ । मेरौ ध्यान कहूँ और हौ मोय ना पतो तुम का बात कर रयी हीं ।
तब वह आश्वस्त हुई ,कि मैंने उसकी चर्चा नहीं सुनी थी ःसच बोलने से लड़ाई होने का डर जो था ।
अब महावारी के अपवाद की एक घटना ः इस पर किसी को भी विश्वास नहीं होगा ।हमारे कुल में एक शादी समारोह था जिसमें शामिल होने के लिए रिश्तेदार आये थे ,उन रिश्तेदार ओं में एक वृद्धा महिला 75 वर्ष से ज्यादा उम्र होगी उसे रजोनिवृत्ति30 वर्ष पूर्व होचुकी थी । उसे महावारी सूचक लक्षण बनने लगे बाद में उसे स्त्री रोग विशेषज्ञ को दिखाया गया तब उसका इस आसमयिक बिमारी से पीछा छुटा । तो भाई इस टोपिक पर इन बातों पर ज्यादा शंका सवाल मत करो । और ना ही ऐसे सवाल कोरा पर छोड़ा करो । ऐसी बातों की चर्चा समाज में खुले में करनेवाले की पिटाई होने की संभावना रहती है ।
गर्भधारण के साथ महावारी के बनने /पैदा होने का प्रश्न ही पैदा नहीं होता है ।नारियों मेंं गर्भावस्था में महावारी नारी का एक विकार रोग है जो उसके अधिक तनाव में काम भावनाओं के बढ़ने से होता है हो सकता है तुमने भी कहीं से ऐसी घटना को सुनकर कोरा पर असामान्य प्रश्न डाला है ।जिसका असामान्य जबाबी संस्मरण मैंने भी लिख दिया है।इसकी सत्य ता विश्वास के परे है इसे सार्वजनिक रूप से सार्वजनिक क्षेत्र समाज में मत चर्चा करना। सार्वभौमिक सत्य समझने की गलती/भूल मत करना ।
एक और ऐसी असामान्य महावारी से जुड़ी घटना अपवाद
नियम यह है कि गर्भाधान /गर्भधारण महावारी के बाद ही होता है परंतु कुछ बच्चे /लोग ऐसे भी होते हैं जो बिना महावारी के पैदा हो जाते हैं इन बच्चों /लोगों को लामर कंस अंशी कहते हैं ,कंस का जन्म भी बिना महावारी के हुआ था ।ये अपवित्र आत्मा एं होती हैं जो महावारी के बिना हुए अशुद्ध गर्भाशय में आती हैं ।
ऐसे बच्चे प्रायः गर्भपात के बाद कभी कभी बिना महावारी के पैदा हो जाते हैं ये चंडाल स्वभाव के क्रूर कर्मा ,ऋण आवेशित होते हैं इन पर आकाशीय बिजली गिरने की संभावना ज्यादा रहती है ।इसमें मेरी अनुमति शामिल है । मेरे परिवार में से कईयों का वृत्तांत मुझे मालूम है ।जब भी बादलों में बिजली कड़कड़ाती है तो बादल इनके ऊपर ज्यादा समय रुकता है । वैसे मुझे यह लक्षण अनुवांशिक लगता है ।दुष्ट ता का लक्षण अनुवांशिक होता है जो बच्चों में उनके पितर वर्तमान में से आता है पर सभी में नहीं आता समान रूप से नहीं आता । अनुवांशिक ता 1से50% तक विश्वास योग्य हैअनूवाँशिकता 10%सत्य नहीं होती ।माँबाप के पूरे के पूरे 100%गुण लक्षण संतान में नहीं आते हैं ।आँशिक लक्षण आते हैं ।
यह प्रश्न भी गोपनीय है समाज में सार्वजनिक रूप से सार्वजनिक क्षेत्र में चर्चा करने योग्य नहीं है ।
तो इसका जबाब भी गोपनीय है ।
सार्वजनिक क्षेत्र में से चर्चा करने पर चर्चा करने वाला झूँठों में गिना जायेगा ।

No comments:

Post a Comment