विद्युत धाराएं और चुम्बकीय धाराओं की गति तिर्यक/समानान्तर से होती हुई पृथ्वी के गुरूत्वाकर्षण बल के कारण क्रमशः निंचे गिरती हुई अंत में पृथ्वी के अंदर जाकर समाप्त हो जाती है क्योंकि विद्युत और चुम्बक दोनों ऊर्जाओं का विशाल स्रोत पृथ्वी के अंदर है।बादलों में बनी हुईं विद्युत भी निंचे की ओर गिर कर शान्त होती है । विद्युत ऊर्जा चुम्बक ऊर्जा दोनों का स्रोत कारक बिन्दु जमीन के अंदर है जहाँ से यह अपने गति गुँण से पृथ्वी के धरातल पर से बाहर निकल कर वातावरण /वायुमंडल /बादलों की ओर जाती है और एक निश्चित दूरी के बाद वापस बादलों से धरती की ओर आकर्षित होकर लौटने लगती है जिसे बिजली गिरना कहते हैं ।
जबकि अग्नि ऊर्जा में ऊपर की ओर चलने का प्राकृतिक गुँण होता है क्योंकि वह पृथ्वी के ऊपर सूर्य से आयी है ।
मेरे कहने का तात्पर्य यह है कि जो विद्युत धारा बिजली के तारों में समानान्तर /तिर्यक बह रही है उसके अंदर भी निंचे जमीन की ओर गिरने का प्राकृतिक गुँण होता है ।क्योंकि वह जमीन से निकल कर आयी है तो जमीन के अंदर जाकर शान्त होगी इसे भूसंपर्कण का नियम कहते हैं । इस नियम का इस्तेमाल हम विद्युत धारा के खतरनाक प्रभाव से बचने के लिए घर में अर्थ वायर हरे रंग का , भवन पर अर्थ वायर भूसंपर्कण तार जस्ता का लगाते हैं आसमानी बिजली से घर को बचाने के लिए ।
अब आपके प्रश्न का जबाब जब पक्षी तार पर बैठते हैं तो उनके पैरों पर जलहीन मृत कोशिकाओं के उष्मा विद्युत कुचालक शल्क होते हैं जिससे पैरों के निंचे से बहने वाली विद्युत धारा उनके पैरों से ऊपर की ओर नहीं चल पाती जैसे सूखे मृत नाखून जो माँस से बाहर होते हैं उन से होकर विद्युत धारा तेजी से शरीर में नहीं चलती है परंतु हाथ गीले होने पर विद्युत धारा तेजी से शरीर में घुस कर शरीर को क्षति ग्रस्त कर देती है ।पक्षी जब तार के ऊपर बैठे हुए होते हैं तो उनके शरीर के ऊपर के पर जो विद्युत कुचालक होते हैं वे भी विद्युतधारा को शरीर के अन्दर प्रवेश करने से रोकते हैं।
विद्युत आवेश सदैव तार की बहरी सतह पर चलता इसी प्रकार यह शरीर पर पहले चरण में बाहर चलता है बाद में दूसरे चरण में शरीर के देरी तक विद्युत आवेश चलते रहने पर यह शरीर में नमी के प्रभाव से रक्त जल के द्वारा शरीर के अन्दर जाकर पहलेशरीर की पेशियों को सिकोड़कर हाथ पैरों की गति बंद करता है सबसे अन्त में शरीर के अन्दर जाकर शरीर की हृदयी पेशियों को बंद करता है ।
परंतु अक्सर कभी कभी जब पक्षी अचानक तार पर से जमीन की ओर निंची उड़ान लेते हैं तो ऐसी विचित्र परिस्थिति में वे विद्युत धारा के निंचे गिरते तीव्र विभव क्षेत्र में आ जाते हैं ऐसे मैं यदि उनका पंजा खुलकर तार को छोड़ चुका होता है और वे तार से अलग हो चुके होते हैं तो वे विद्युत धारा के संचालन प्रभाव करंट से बच जाते हैं । यदि शरीर तार से निंचे झुक गया पंजे खुल नहीं पाये तो ऐसी परिस्थिति में तार से नींचे के प्रबल वैद्युत क्षेत्र में शरीर के निंचे आते ही उनके शरीर में करंट दौड़ जाता है जिससे पंजे खुलने के बजाए तार पर तेजी से कस जाते हैं ।पक्षी भी विद्युत तार पर मरजाते हैं नींची उड़ान लेने की गलती कर ने पर इस निंची उड़ान की गलती से बचने के लिए पक्षी सदैव तार पर से ऊंची ऊपर की उड़ान भरते हैं कभी कभी पक्षी के पंजे खुल कर विद्युत तार से अलग हो जाते हैं लेकिन पक्षियों के पूँछ पर तार के निंचे गिरते विद्युत क्षेत्र में रह जाते हैं जिससे पक्षी के ऊपर ही परों में आग लग जाती है और पक्षी उच्च विभव हाई वोल्टेज के क्षेत्र में आने पर या वर्षा के मौसम में शरीर के पर भीगे होने ही आसानी से विद्युत दुर्घटना के शिकार हो जाते हैं विशेष कर बड़े पूँछ पर वाले पक्षी जैसे मोर ।
जबकि चमगादड़ के शरीर पर बाल होते हैं और बालों के निंचे की त्वचा नम गीली होती है , और झिल्ली पर उसमें रक्त संचालन होने से वह भी गीली नमी युक्त होती है और चमगादड़ के पेड़ पर उल्टा लटकने की प्राकृतिक आदत चमगादड़ विद्युत तार के ऊपर पैरों को निंचा करके शरीर को तारों से ऊपर उकड़ूं या सीधा नहीं बैठ सकता ऐसे में वह जैसे ही तार के ऊपर बैठ कर संतुलन बनाने के लिए लटकने के लिए तार के निंचे आता है तार के निंचे गिरने वाला आवेश तेजी के साथ चमगादड़ के शरीर में चला जाता है चमगादड़ तार से चिपके अपने पंजे नहीं खोल पाता उसके पंजे तार पर कस जाते हैं शरीर में विद्युत आवेश आने पर शरीर की पेशियों में अपने आप सिकुड़न आने से जीभ तालू से चिपक जाती है जीभ के न फैल पाने से वह बोल नहीं पाता मुँह की पेशियाँ सिकुड़ जाने से मुँह अपने आप कसकर बंद हो जाता है थोड़ी देर बाद हृदय की पेशियाँ सिकुड़ जाने से हृदय की पेशियों का फैलना बंद हो जाने से हृदय अपना कार्य बंद कर देता है जिससे शरीर में रक्त संचार बंद शरीर की सभी कोशिकाओं को जीवित रहने के लिए आक्सीजन आपूर्ति बंद दिमाग बंद शरीर मृत इस प्रक्रिया को पूरा होने में 2–3मिनट का समय लगता है ।
पक्षियों का परचिंग मैकैनिज्म पेड़ की डाल पर बैठने का नियम ऊपर से निंचे की ओर है स्थाई संतुलन जिससे पक्षी रात को पेड़पर बैठे हुए भी सोई अवस्था में निंचे नहीं गिरते ।
जबकि चमगादड़ का परचिंग मैकैनिज्म पेड़ की डाल पर उल्टा लटकने का है निंचे से ऊपर की ओर लटकने पर स्थाई संतुलन जिससे चमगादड़ रात में पेड़ पर उल्टे लटके होने पर सोई हुई अवस्था में निंचे नहीं गिरते ।
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