जनन प्रक्रिया में कहीं किसी जाति के जीवों में समान आयु होने पर पहले नर परिपक्व हो जाते हैं जैसे फसल वर्ग के पोधों में मछली मेंढक सूअर साँड प्राय शाकहारी वर्ग में । तो कहीं पर किसी जाति में समान आयु होने पर नारिआं /मादाएं नर की तुलना में पहले यौन परिपक्व हो जाती हैं जैसे फल वर्ग के पोधों में , ज्यादातर सृष्टि में विशेषकर माँसाहारी वर्ग बुद्धि जीवी प्राईमेटस वानर मानव जाति में मादाएं पहले शारीरिक ,मानसिक, यौनसक्रिता में नर से पहले परिपक्व मैच्योर हो जाती हैं ।
यदि गर्भ में नर भ्रूण और नारी भ्रूण एक साथ साथ में आते हैं गर्भ में समान सुविधा मिलने पर तब भी माँ के गर्भ में नारी भ्रूण का समग्र विकास होता है नर भ्रूण का विकास बाधित होता है । समान सुविधा उपलब्ध होने पर गर्भ से बाहर निकल आने पर भी उन दोनों बच्चों में लिंगीय विकास प्रक्रिया नारी शिशु अवस्था एक वर्ष , बच्ची तीन वर्ष , बालिका (कन्या) पाँच , किशोरी (भवानी ) बारह वर्ष, युवती पंद्रह वर्ष ,रमणी सोलह वर्ष , वयस्क /प्रौढा अठारह से बीस वर्ष , तक है जबकि नर का विकास शिशु अवस्था दो वर्ष ,बच्चा सात वर्ष , बालक पंद्रह वर्ष ,किशोर अठारह वर्ष ,युवक इक्कीस वर्ष , वयस्क पच्चीस वर्ष प्रौढ़ तीस वर्ष की आयु तक हो पाता है जबकि नारी आयु विकास की प्रक्रिया अठारह से बीस वर्ष में पूरा कर लेती है । नर के समय्क समग्र विकास में तीस वर्ष तक लग जाते हैं नर का विकास नारी की तुलना में धीमी गति से चलता है । नारी के नर से पहले विकसित होने को प्रोटोगाईनस सैक्ससिग्नल डेवलपमेंटकहते हैं। जबकि नर के धीरे धीरे मंद गति विकास को हाईपोगाईनस सैक्ससिग्नल डेवलेपमेन्ट कहते हैं।
प्रकृति में विकसित जीवों में यौनक्रिया से पूर्व यौनसंबंध बनाने से पहले यौन परिचय के दौरान अक्सर नर मादा से संबंध बनाने में दूसरे नरों को बाधा समझते हुए उन नरों से आपस में युद्ध /लड़ाई करते हैं जिसमें अक्सर मादाएं भी घायल /हिंसित हो जाती हैं , । प्रकृति में इस यौन हिंसा को रोकने के लिए नर और मादा में अलग अलग यौन पहचान लक्षण बनाये जिन्हें सैकैन्डरी सैक्ससिग्नल कैरैक्टर द्वितीयक लैंगिक लक्षण कहते हैं जिससे नर एक दूसरे नर की /मादा की पहचान कर लेते हैं तथा मादाएं भी नर की दूर से पहचान कर के यौनसंबंध संघर्ष से पूर्व अपने व्यवहार में परिवर्तन कर लेती हैं अप्रभावी होने लगती हैं नर के निकट आने पर ।जिससे वे अपने को नर के हिंसित यौनव्यवहार नख दंत प्रहार से अपने शरीर को बचा सकें नर का कम से कम विरोध हो ,नर कम से कम क्रोधित हो और समागम समय में यौनक्षेत्रिय /योनांग हिंसित करें शरीर की हिंसा न करे समागम पश्चात नर चला जाय । इसे सैक्सुअल डाईमौर्फिज्म या एक अपूर्ण जीवों की जाति जो दो अपूर्ण उपजाति नर व नारी /मादा रूप में प्रतिष्ठित हो ।
इसी विकास ब्यौरे को ध्यान रखते हुए पंच तंत्र में चाणक्य /विष्णु गुप्त ने लिखा है नारी पैदा होते समय ही नर से दस वर्ष बड़ी होती है मानसिक अवस्था में । शादी के लिए जरुरी होता है आकर्षण का नियम जो रिक्तता में कमी से उत्पन्न पूरकता के नियम पर आधारित है वृहद अरण्यक उपनिषद के प्रथम श्लोक से आरंभ हैं । बाद में मैं रिक्तता में आवेश प्रवाह पर विस्तार से लिखूंगा नर नारी के बीच आकर्षण के कारण |
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