क्या सक्रिय लकड़ी का कोयला काले मस्से और मुहासे का इलाज करता है?



यह अफवाह कहूँ या मित्थया कथन या फिर अपने आप को खुद ही धोखा देने जैसा है ।मैं इस पर अपना निजी सत्य अनुभव बयान कर रहा हूँ ।
मेरी बेटी को29सितंबर2015 को बेटा हुआ ,पैदा होने के8दिन बाद बेटे को दस्त की शिकायत बनी जो ठीक होने में नहीं आयी बच्चा खूब माँ का दूध पीता रहता दस्त करता रहता दस्तों की अधिकता से उसका मलद्वार स्थान के आस पास का स्थान की त्वचा गलकर फटने लगी ,बच्चे का इलाज 9 वें दिन से शुरू करवा दिया MBBS ,MD , बाल रोग विशेषज्ञों चिकित्सक द्वारा ,देशी आयुर्वेदिक दवाई मल्हम नीम, बोरोप्लस आदि जिसने बताया । पर मलद्वार क्षेत्र के आसपास की त्वचा कभी कभार ठीक दिखाई देती फिर अगले दिन फटी हुई क्षतिग्रस्त दिखाई देती । सभी परेशान कि ये कैसा रोग है जो दिल्ली में बाल रोग विशेषज्ञ ओं से भी ठीक नहीं हो पा रहा है ।
डाक्टर लोग हमारा ध्यान रोग के स्थान से हटाने को कोई नीली इंकी दवा ई देता ,कोई क्रिस्टल वायलट की बैंगनी रंगों की दवाएं देते . हमको जब तक रोग क्षेत्र दवाइयों से छिपा होता दिखाई नहीं देता ।एक सप्ताह के बाद कारनिफिकेशन प्रक्रिया पश्चात जब पुरानी त्वचा हटती तब रोग ग्रसित स्थान की त्वचा फिर से दिखाई देने लगती हम सभी परेशान थे ,ये कैसा रोग है जो ठीक नहीं हो पा रहा है । इस बीच रोग की बढती स्थिति देख कर उस पर नीम का स्वनिर्मित मल्हम लगाया जाता तो आराम हो जाता था ।3दिन बाद फिर वही क्षतिग्रस्त त्वचा दिखाई देने लगती । मेरा मन परेशान आखिर ये कैसा रोग है जिसमें फायदा नहीं होता है । बाल रोग चिकित्सक और अन्य शुभ चिंतन कर्ता सफाई की कमी बताया करते मैं परेशान था इस नये रोग से । तभी एक दिन एक बूढी पडोस की माँ आयीं और बताया
बच्चे को चुन्ने का या ततैया का रोग हो गया इसका इलाज कोई पुराना हकीम /वैद्यक कर सकता है ये रोग नये डाक्टर ओं की समझ से परे है ।
बस यही वाक्य काफी था । हमको जागरूक करने को । हमारे पास ही बुलंद शहर में पुराने यूनानी तिब्बी हकीम जी के पुत्र काली नदी के पुल के पास रहते हैं । मैं ने बच्चे को उन्हें दिखाने को भेजा साथ में छोटी बेटी को कैमरा मोबाइल देकर कहा कि वो जब हकीम थी इलाज करें तो वह विडिओ बना ती रहे ।
हकीम जी ने इलाज शुरू किया जो हुआ वह चमत्कार था ।बच्चे के मल द्वार से छोटे छोटे कृमि यों के बच्चे लार्वा छोटे छोटे गिंडार जैसे जमीन पर गिर ने लगे । वैद्य जी ने कृमि नाशक दवाई खिलाने को दी ,बच्चे की अति अल्प आयु को विषैली कृमि नाशक दवाई नहीं खिलाई पर 10दिन बाद बच्चे को फिर भेजा ,तो देखा अबकी बार लार्वा/छोटे न होकर बड़े बड़े थे जो मल द्वार से गिर रहे थे ।
बस फिर क्या था , रोग के कारक लार्वा के फोटो मिलने के बाद में उनके अध्ययन में जुट गया . मैं ने प्राणी शास्त्र में परजीवी यों का फिर से अध्ययन किया तो पता चला
बच्चे को माईसिस रोग हो गया था जिसका इलाज आपरेशन से आँतों की सफाई करना था वह भी एक माह के बच्चे की , आपरेशन की कामयाबी की सफलता आधी । बच्चे के लिए दवाई के साथ दुआ पूजा स्तुति शुरू इस दोरान बच्चे को जीवन क्षमता बढाने की दवा एं चलती रही .बाद में फिर दोबारा हकीम जी को दिखाया गया ,अन्तिम बार के वाकये पर पाठक बन्धु यकीन नहीं करेंगे बच्चे के मल द्वार से छोटे छोटे मकड़ी जैसे छोटे छोटे पंख वाले 4/5 कीड़े गिरे जिनको देख कर बच्चे का बाप यानि मेरा दामाद को गश /हल्का बेहोश होने लगा ।
प्रश्न कर्ता भाई मेरा आपसे अनुरोध है कि ऐसे बहम को मानसिक बल न दें ।कारबन /काला कोयला चेहरे पर लगाने पर मुँहासे आपको उस समय दिखाई नहीं देंगे जब तक चेहरे पर कोयला का चूर्ण/पाउडर लगा रहे गा ।जैसे ही कोयला पाउडर हटेगा मुँहासे फिर से दिखाई देंगे । मुहासों का कारण बाल की जड़ो में ,त्वचा के रोम कूप छोटे छोटे त्वक छिद्रों में रहनेवाले बैक्टीरिया /माईक्रो आर्थोपोडा आदि सूक्ष्म जीव के उपस्थित हो ने से होता है जो तैलीय त्वचा में त्वचा की तैलीय ग्रंथियों के तेल से बन्द होकर मर जाते हैं ।
इनका इलाज त्वचा की सफाई ह न कि त्वचा पर कोयला पाउडर लगाकर संक्रमित त्वचा को आँखों से ओझल रखना ।
यही बात एपिथिलियक कैंसर /त्वचा पर बने मस्सों पर भी लागू होती है । मस्सों का देशी /आयुर्वेदिक /यूनानी ईलाज बहुत अच्छा उप लब्ध ह । सावधानी बरतें त्वचा की जलन के प्रति /खुजली के प्रति जागरूक रहे । त्वचा को जलन खुजली से बचायें मस्से खुद ब खुद कम हो जायेंगे । होम्योपैथी क दवा थूजा का सेवन होम्योपैथी क चिकित्सक के निर्देशन में करें ।

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