जीवन उत्तपत्ति धारणा के अनुसार जीव चार प्रकार से पैदा होते हैं ।उद्भिज , स्वेदज , अंडज , जरायुज । भारतीय पुराने विज्ञान मत के अनुसार ।
उद्भिज जीव ःः ये जीव भूमि पर उसके धरातल को तोड़कर अपने आप अपनी निजी जैविक क्षमता से पैदा होते हैं । इसके अलावा पहाड़ों पर टूटे शिला खण्डों के मध्य जो जीव वनस्पति दिखाई देते हैं ,मानवीय क्रियाओं के बिना पैदा होते हैं बिना कृषि कर्म के ,जो प्रज्या कर्म प्रजनन करते दिखाई नहीं देते . उन सभी जीव ओं को उद्भिज जीव कहते हैं ,वनस्पतिक जीव .अदृश्य सूक्ष्मदर्शी जीव . वायरस ,बैक्टीरिया, प्रोटोजोआ, पोरीफैरा ,सीलेन्ट्रेटा ,प्लैटीहैल्मिंथ ,निमैटोडा ,एनिलिडा .मोल्सका ,इकाईनोडर्मेटा मत्स्य मछली मेढक आदि ।
स्वेदज ःः ये सूक्ष्म जीव उन बड़े जीव ओं के शरीर पर पैदा होते हैं जिन्हें पसींना /स्वेद अधिक मात्रा में आता है, जो अपने स्वेद को पूर्ण रूप से साफ /स्वच्छ नहीं कर सकते ,कर पाते हैं ।ऐसे में उनके शरीर के स्वेद की गंध के अनुसार उनके शरीर पर तरह तरह की शरीर गंध के अनुसार तरह तरह के सूक्ष्म दर्शी अदृश्य दर्शी जीव पैदा हो जाते हैं । सूक्ष्म कवक सृष्टि दाद छाजन एक्जिमा ,बैक्टीरिया सृष्टि ,प्रोटोजोआ सृष्टि, सूक्ष्म आर्थोपोडा जूँ चीलर, कलीली आदि परजीवी सृष्टि उत्पन्न हो जाती है यदि उनके शरीर की सुरक्षा के लिए बनी शरीर में बनी तैलीय ग्रंथियां प्राकृतिक रूप से कार्य करने में पूरी तरह से सक्रिय नहीं होती हैं ।
उनके शरीर पर शरीर सुरक्षा के लिए प्राकृतिक तेल, म्यूकस की परत नहीं होती है ।
अण्डज ःः ये जीव अपनी जातक वृद्धि के लिए प्रजनन की लैंगिक अण्डज विधि का प्रयोग करते हैं ।इन जीव ओं में एक समान जाति के नर जीव उसी स्वजातीय मादा से प्रज्या कर्म मिथुन संसर्ग करते हैं ,मादा स्वजातीय जीव नर स्वजातिय जीव के शरीर अंश शुक्र अणुओं को अपने शरीर के स्त्रिय अंगों में धारण कर लेती ह ।बाद में मादा के स्त्रिय अंगों के अण्डज संकाय में उपस्थित अण्डों से एक एक से एक के अनुसार मिलन कर्म निषेचन होता है ।बाद में निषेचित अण्डे में जीव का सूक्ष्म रूप भ्रूण बनता है , जो अण्डे में विकसित हो जाता है जीव के छोटे बच्चे के रूप में ।बाद में जीव का छोटा रूप उसके बच्चे के रूप में अण्डे से बाहर आता है । सरीसृप जगत, छिपकली कछुआ साँप मगरमच्छ ,पक्षी जगत के सदस्य परवाजी पंख ,परों से युक्त मुर्गा मोर कौआ , आदि तथा स्तनपयी जगत में डकबिल एकिडना अंडे देते हैं ।
जरायुज ःः ये सभी जीव वाहय कान वाले होते हैं इनकी त्वचा पर बाल होते हैं ,इनकी एक जाति दो उप जातक रुप नर व नारी /मादा रुप में होते हैं ,सैक्सुअल डाईमौरफिज्म . सिंगल सैक्स इन टू कास्ट । ये स्तनपयी जगत के बच्चे पैदा कर ने वाले जीव हैं इन जीवों की मादा बच्चे पैदा करती है ।बच्चों के पैदा होने से पहले उनका विकास मादा के गर्भाशय में एक सुरक्षित आवरण जेर में पलेसैंटा नाभि नाल द्वारा निर्धारित समय तक होता है ।पूर्ण विकास पश्चात एक निर्धारित निश्चित समय पश्चात बच्चे नाभि नाल सहित जेर में सुरक्षित रूप से मादा के योनिद्वार अंग से बाहर आता है ।उतपत्ति के समय बच्चे के जेरीसुरक्षा आवरण में आने से इन्हें जरायुज कहते हैं । मनुष्य गाय भैंस बकरी बंदर सिंह कुत्ता आदि
No comments:
Post a Comment