अगर सरयू नदी के उस तरफ के सरयूपारीण ब्राह्मण और इस तरफ के कान्यकुब्ज हैं तो फिर सनाढ्य ब्राह्मण कहाँ के हैं?

यमुना क्षेत्रीय अलीगढ़, आगरा, मथुरा में पाये जाते हैं मूलतः ।
सनाढ्य शब्द मूलतः सारस्वत का अपभ्रंश परिवर्ति /बदलाव हुआ शब्द है ।जो सारस्वत ब्राह्मणों से निकले हैं ।आज भी सारस्वत ब्राह्मण सरस्वती नदी के क्षेत्र में हरियाणा, राजस्थान में यमुना नदी के पश्चिमी तट पर पाये जाते हैं।सारस्वत प्रथम श्रेणी के और सनाढ्य द्वितीय श्रेणी के सारस्वत ब्राह्मण हैं।सनाढ्य भूमि हीन और सारस्वत भूमिहार ब्राह्मण होते हैं।
इसी प्रकार से गौड़,या गौड़ा ब्राह्मण गांगेय, गंगा नदी और गंडक नदी के क्षेत्र में रहने वाले गौड़ देशीय ब्राह्मण हैं जो यमुना नदी के पूर्व तट से गंडक नदी के पश्चिमी तट पर के क्षेत्र में रहते हैं ।आज भी गोंडा नामक एक नगर उत्तर प्रदेश में बहराइच और लखनऊ के बीच में है ।
शर्मांं ब्राह्मण जिट्ऋषि के वंशज पगड़ी धारी पंजाब, उत्तरी राजस्थान, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश,में मूलतः, और इटारसी उज्जैन मध्यप्रदेश में, बिहार में बेगूसराय जिला क्षेत्र के निकट और आसाम में भूमिहार प्रसारित रूप में पाये जाते हैं ,त्यागी, जांगिड़, धिमान, और जट्ट आदि सभी गाँव में रहकर खेती करने वाले, ज्ञान चर्चा में प्रवीण होते हैं ये पुरोहिताई निषक्रिय /आकाश वृत्ति नहीं करते हैं ।
ब्राह्मणों के,ठाकुर,वैश्य,( बनिए ) और अन्य जातियों बारे में,इनके गोत्र के बारे में विशेष ज्ञान की इच्छा है तो मुरादाबाद निवासी मौहल्ला दीनदार पुरा के पंडित ज्वाला प्रसाद मिश्र की लिखी पुस्तक :: जाति भास्कर :: पढ़नी चाहिए ।

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