शिक्षा में किसी भी विषय /टापिक /प्रकरण की समग्र जानकारी के लिए उसके चार चरण / सोपान होते हैं उनके अनुसार सीखने पर समय्क श्रेष्ठ ज्ञान की प्राप्ती होती है
इसका सर्व प्रथम सोपान है फिलोसोफी या दर्शन ःःविचारधारा का अध्ययन इसमें पारंगत होने के लिए तुम्हें योग की सर्वश्रेष्ठ पुस्तक का अध्ययन करना चाहिए मैं इसके लिए आपको कनसैप्ट स्तरीय ज्ञान के लिए पतंजलि योग दर्शन और विशिष्ट स्तरीय ज्ञान के लिए पातंजल योग प्रदीप की सलाह दूँगा ताकि आप योग के दर्शन /फिलोसोफी को संक्षेप में से विस्तार तक समझ सकें ।
योग का दूसरा सोपान है आर्ट या कलाकारी /कला बाजी इसके लिए आपको किसी अच्छे गुरु को ढूँढकर गुरु के निर्देशन में पातंजल पुस्तक के दूसरे पाठ साधन पाद से योगासन योगाभ्यास योगमुद्रा योग क्रियाएं शरीर शोधन के लिए प्रत्याहार प्रयत्न द्वारा अहार/भोजनम् को सीखना होगा ।
योग का तीसरा सोपान है एक्शन या योग के यम नियम प्राणायाम प्रत्याहार के बाद अपने निजी विवेक और गुरु के विचार नियंत्रण निर्देशन विधा के अनुसार योग का तीसरा विचार निर्माणसोपान— धारणा ध्यान समाधि और निरोग शरीर को, निरोग मन को ,निरोग योनिज ऊर्जा को समझते हुए अपने जीवन में योग का प्रभाव पहले स्वयं अनुभव करते हुए फिर दूसरों को योग का प्रभाव को दिखाना की योग्यता का प्रदर्शन योग्य बनना है ।
योग का चौथा सोपान है एप्लिकेशन या योग विद्या का निजी जीवन में उपयोग करना फिर औरों के जीवन में योग विद्या के उपयोग का प्रभाव दिखाने की फिर सोचना ।
ना कि योग विद्या की किताब पढ़कर आसन प्रकरण से नटबाजी करके नटी नचनिया कला का प्रदर्शन करके योग संस्थान खोलकर /स्थापित करके योग से रोटी रोजी का उद्देश्य बना कर योगी के निचले स्तर से जीवन यापन करना निम्न कोटि के योगी का जीवन जीना .। । योग विद्या मानव की सर्वोत्तम विद्या है । । इसके संदर्भ में पातंजल प्रदीप का तीसरा पाठ विभूति पाद से रिद्धि सिद्ध को ठीक से समझना ना कि योगमिथक में से भ्रमित हो जाओ । और चौथा कैवल्य पद से सूक्ष्म शरीर और स्थूल शरीर के संबंध को समझ कर अपने मन की ब्रैन सैटिंग को अपने हित हिसाब से करना ।मन के चेतन अचेतन अवचेतन अवस्था को प्रेक्षा ध्यान से अनुभव स्वयं करना ।
योग विद्या दिखाने सिखाने की कम तन,मन,आत्मा प्राण शोधन संस्कार की विद्या है ।पहले इससे अपना हित करना फिर जग हित दूसरों के हित की सोचना उसके बाद व्यवसाय बनाने /करने की सोच बनाना ।
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