भूत हमेशा किसी को नुकसान क्यो पहुंचाते हैं हमने आज तक ये नहीं सुना कि भूत ने किसी कि जानकारी बचाई हो ऐसा क्यों?

यह प्रश्न ही गलत है कि भूत नुकसान पहुंचाते हैं सच यह है कि कुछ भीरु डर्रु ढीढ पंगेबाज दिमाग से खाली विचार हीन आस्थावान लोग जिनका अपने विचार स्रोत अपनी खोपड़ी पर अपना नियंत्रण नहीं होने पर उस खाली खोपड़ी, जिन्दा शरीर में भूत गण आसानी से ऐसे घुस जाते हैं जैसे किसी वीराने में बने मकान हवेलियों में ढीढ उदंड लोग घुस कर रहने लगते हैं ,या फिर लम्बे समय से किसी खाली मकान में साहसी हिम्मत वाले लोग पंगेबाज बहादुर लोग घुस कर रहने लगते हैं, विवाद ग्रसित संपत्ति मकान मेंं दूसरे लोग खाली पन का लाभ उठाकर रहने लगते हैं ।
ऐसे ही जिन लोगों की खोपड़ी में उनके अपने विचार नहीं होते, दूसरों के विचार भरे होते हैं तब ऐसे में उस खोपड़ी में जीनियस लोग ब्रैन वाश करके अपने विचार घुसा देते हैं या फिर उस खाली विचार हीन ,विचार शून्य अवस्था खोपड़ी में दूसरी अशरीरी आत्माएं घुस कर उस नियंत्रण हीन शरीर पर नियंत्रण कर लेती हैं जैसे कमजोर मन तन वाले मनुष्य के घर में दूसरे लोग बलपूर्वक रहने लगते हैं। परंतु यदि उस अपनी खोपड़ी में अपने विचार हैं तो उस भरी खोपड़ी में खाली जगह नहीं होने पर कोई दूसरी आत्मा/भूत नहीं घुस /प्रवेश कर सकता।
मैं आपको अपना निजी होशहवास का अनुभव शेयर कर रहा हूँ आप विश्वास करें ना करें यह आपकी मर्जी पर घटना सच्ची है जो मेरे साथ मेरे परिवार अम्मा पिता जी की मौजूदगी में घटित हुई ।
सन् 1978में 10वीं कक्षा में था सर्दी के मौसम में मैंने अपनीं जिवित भूदेवी चाची की आवाज ऐसे सुनीं जैसे वे घर के बाहरी कमरे दुबारी में भैंस बाँध रही होंं और भैंस ने उन पर हमला करके उन्हें नीचे गिरा कर मार रही हो, जनवरी माह के महीने की शाम का समय था में खाना खा रहा था ।पहले अम्मा ने कहा खाना छोड़ जा अपनी चाची को बचा उसे भैंस ने गिरा दिया है उसे भैंस मार रही है मैं अनसुनी कर खाना खाने में लगा रहा ,फिर पिता जी ने जोर से कहा तेरी चाची भैंस ने निचे गिरा दी है भैंस तेरी चाची को सींग अड़ाकर मार रही है मैं अनसुना कर खाना खाने में डटा रहा तब पिता जीन ने खाना सामने से हटा लिया और कहा जा पहले अपनी चाची को भैंस से बचा फिर खाना खा लेना । मैं परिवार में सबसे बड़ा लम्बे कद काठी का था मुझे भी बिगड़ैल पशु ओं से लड़ने भिड़ने में मजा आता था । मैं खूँटे से बंधे बैल भैंस के सींगों को पकड़ कर उनसे भिडंत करता रहता था ।
मैं रोष मेंं उठा लकड़ी का मोटा सा डंडा लिया और उस अंधेरे कमरे मे लड़ते हुए पशु ओं को हटाने वाली सिंहय आवाज करता हुआ आगे बढ़ने लगा जहाँ से भैंस और चाची की आवाज आ रही थी पिता जी कमरे के द्वार पर खड़े हो गए जिससे मेरा मन बल बढ़े पशु बल घटे ,तभी कमरे से आवाज आनी बंद हो गई ।मैं अंदाज से डंडा घुमाता ,खटकाता अंधेरे में आगे बढ़ता जाता था तब अंदाजन कमरे के अन्तिम स्थान तक गया था । देखा कमरा में कोई नहीं था ।मैं खूब हँसा अपनी मूर्खता पर ,पिता जी के चेहरे का रंग उड़ गया भूत भय से ।उस दिन पशु बाँधने चाची नहीं आयी थी चाचा और चचेहरे भाई पशु भैंस बैल बाँधने आये थे उस कमरे में घटना घटित के बाद में ।अगले दिन बाद में घटना की चाहिए से चर्चा की तब चाची ने कहा— अपनी कदकाठी पर मत इतना इतरा पशु ओं से भिडंत के शौक को छोड़ दे नहीं तो अंजाम भुगतना पड़ेगा तुझे तू भूतलाओं की नजर में आगया है । और सुन मैं तो क्या बड़ी बड़े की भी यदि उस कमरे से ऐसी आवाज आये तो उनको भी बचाने मत जाना तेरे साथ कहीं पर भी धोखा हो सकता है भूतों का ।
मेरा सारा नयी जवानी का जोश ठंडा पड़़ गया ।पशु भिडंत का ख्याल छोड़ मैं मनुष्य ओं से भी बचने/दूर रहने लगा ।सभी अचरज में आ गए मुझे क्या हो गया ,हँसना लड़ना भिड़ना बंद मैं चुप गुम सुम रह कर भूतों के वार की प्रतिक्रिया का इंतजार करने लगता । अब मेरे दिमाग में भूत भय पड़ गया पर मैंने इसे गंभीरता से नहीं लिया । पर अंतर्मन में भूतभय चढ़ चुका था ।
लगभग तीन वर्ष बाद मेरे साथ 19८1 मेंं जब मैं बी.एस.सी. प्रथम सत्र में था मेरे साथ जून माह में शुक्ल पक्ष में फिर भूत दर्शन हुआ चाँदनी रात में अबकी बार भूत नहीं भूतनी थी जिसके बारे में जब परिवार में चर्चा की हुलिया बताया गया तो पता लगा उस औरत की प्रसव पश्चात मौत हो चुकी थी वह अक्सर अपने परिवार वाले को कभी कभी सीमा लाँघने पर परेशान करती थी जिसमें यदि उसके घर वाले चले जायें तो उनको बीमारकर दिया करती थी लेकिन हमसे मैं अम्मा पिता जी मेरा छोटा भाई से कुछ नहीं कहती थी । उसके इस मर्यादा शील व्यवहार पर सभी को आश्चर्य होता था ।मृत्यु बाद भी वह हमारे परिवार के प्रति दयालु थी क्योंकि हमने कभी भी लोगों के कहने पर भी उसके प्रति उसे अपशब्द नहीं बोला करते थे।उसकी उसके घर में एक नियत निश्चित जगह थी मकान का दोनों दक्षिणी दिशा के ऊपर नीचे के चार कमरे यानि आधा मकान चार में से दो दक्षिणी कमरे उसके थे ।
इस घटना का ब्यौरा ःः
1981का जून माह गर्मी का समय था उसके घर वाले उसके भय से घर छोड़ कर बूलंदशहर में अपना मकान बनाकर शिफ्ट हो गये थे अब उनका खाली सारा मकान हमारे नियंत्रण में था अधिकार में नहीं हम उनके मकान का उपयोग कभी कभार सोने में करते थे , तभी एक रात लगभग11–12बजे के बीच खूब स्पष्ट चाँदनी खिली हुई थी अचानक मेरी आँख खुलीं मैंने मच्छर ओं के कारण खुद को ओढ़ने के कपड़े में पूरी तरह ढक रखा था ।एक औरत की पायलों की आवाज सुनी महसूस किया कि कोई औरत है जो मेरे चारपाई के चारों ओर घूम रही है मैं डर गया और सोचने लगा कि यह कौन सुन्दर सी औरत है जो इस चाँदनी रात में मेरे खाट के चक्कर लगा रही है यह यहां क्यों आयी है और अब क्या करेगी ।मैं उसके रूप से खुश हुआ वह बिरोजी रंग की साड़ी, और नीला ब्लाउज पहने भरे शरीर वाली हल्के गेहूँआँ रंग की थी ।उसनें मेरी खाट के दो चक्कर लगाये और अपने घर के दरवाजे पर रूककर कुछ सोचने लगी मैं इस इन्तजार में था कि यह अब क्या करेगी तभी उस स्पष्ट चाँदनी में मैंने देखा कि उसने अपने आप एक हाथ को उठाकर किवाड़ ओं के उपर साँकल के कुन्दे पर हाथ रखा और साँकल वाली किवाड़ को ऊपर उठाया और तभी साँकल को खींच कर नीचे गिरा दिया जिससे बड़े जोर की आवाज हुई और मेरे पास से कुछ दूर पर मेरी अम्मा भी सोये से जाग गई उसने मुझे जोर से आवाज दी नरेश और मैंने भी हुँकारा देकर अपनी सही सलामत स्थिति व्यक्त की ।वह दरवाजा काफी मजबूत था उन कुंडी लगी किबाड़ो को खोलना औरत तो क्या सामान्य कदकाठी के मजबूत शरीर के आदमी को खोलना आसान नहीं था ,जिसे उस औरत ने यूँ ही हल्के से हाथों से आसानी से खोल दिया था । तभी अम्मा को शंका हुई उसने सोचा शायद मैं किवाड़ खोल कर उनके घर के अंदर गया हूँ ।वह उठकर मेरे पास आयीं और इस तरह से बिना मौसम कि बिना हवा के इस घर का दरवाजा कैसे खुला इस पर पूछने लगीं तब मैंने बताया अम्मा अभी अभी बिरोजी साड़ी नीला ब्लाउज पहने एक औरत इस घर में किबाड़ खोलकर अंदर गयी है वह कौन है और इस रात में अकेली यहां क्यों आयी है बस फिर क्या था अम्मा सारा वाकया समझ गई और मुझे अपने साथ सुलाया सारी रात जागकर मेरी रखवाली की ।और रात भर दरवाजे पर नजर जमाये रही कि वह औरत अब कब दरवाजे से बाहर निकलेगी । रात बीत गई पर कोई भी दरवाजे से बाहर नहीं निकला सवेरे तक । सवेरे बाद दिन में देखा तो पता चला घर खाली था घर में कोई अन्दर नहीं गया था तो दरवाजा किसने और क्यों खोला यह चर्चा का विषय रहा ।बाद में उस औरत के बारे में पता चल गया कि वह इन्जीनियर साहब की पहली पत्नी थी जो अक्सर कभी कभार अपना घर देखने आया करती थी ।
एक और भूतिया घटना बाद में मेरे परिवार की ःः
मेरी अम्मा21 जुलाई 2015 को मर गयीं थीं । पर ठीक एक साल बाद 2016 को कड़ी ठंड के जनवरी माह की एक शाम को लगभग 10बजे रात्रि के अर्ध पूर्व मेरी मां की जैसी आवाज में कोई आवाज आयी पहले मेरे नाम से नरेश ओ भैया जिसे सुनकर मेरी बेटी दरवाजा खोलने की सोचने लगी डरते हुए ,तभी उसने मेरी छोटी बेटी को जगाया कहा कीर्ति बाहर अम्मा खड़ी है छोटी बेटी जगते ही बोली तेरा दिमाग ठीक नहीं है अम्मा तो पिछली साल मर चुकी है बरसात में अब एक साल बाद वह कैसे और क्यों कर आयेगी ।तभी उसने बड़ी बेटी को आवाज दी तब बड़ी बेटी बोली सुन अम्मा फिर से दोबारा अवाज दे रही है अबकी बार आवाज बड़ी बेटी गुड्डन के नाम से थी किबाड़ो के हिलाने /हिचकाने की आवाज भी आयी । तभी मेरी छोटी बेटी बोली बुढ़िया तेरा दिमाग ठीक है क्या तुझे मरे एक साल हो गया अब क्या लेने आयी है तभी मेरा काला कुत्ता जोर से भौंका भौंकने लगा । फिर सब कुछ शान्त हो गया ।पर बेटियाँ रातभर डर से लैम्प जलाकर जागती रहींं कहीं बुढ़िया यानि मेरी अम्मा कहीं किबाड़ो में से होकर न आ जाय ।मेरी छोटी बेटी मेरी अम्मा को बुढ़िया कहती थी ।क्योंकि अम्माँ उसे बहुत परेशान करती थीं लाड़ में । अगले दिन मेरे पड़ोसियों और मेरे छोटे भाई के परिवार ने बताया हँसते हुए खुशी खुशी कि रात अम्मा आयी थी हमने भी आवाज सुनी थी पर हमें ये भी पता था कि अम्मा मरे एक साल हो गया पर डर के मारे हमने किबाड़ो को इसलिए नहीं खोला भूत है अम्मा का अम्मा नहीं । और ये भूत प्रेत किसी के नहीं होते हैं कहीं हमें न परेशान करने लगें बाद में ।भाईसाहब यानि कि मैं टंटर मंटर खुद तो जानते हैं इनकी टोली में/मित्र मंडली में गुनिया ओझे भी हैं ये तो ऐसे भूतलाओं परेतों से निपट लेंगे । हमारे लिए मुश्किल हो जायेगी यदि अम्मा या अम्मा के फेर में कोई दूसरा भूत प्रेत धोका कर गया तो हमसे नहीं सुलटा जायेगा उस कपटी भूत से ।
इसके अलावा मुझसे कःई बार भूतों से मुलाकात हुई है लेकिन आज तक कोई भूत प्रेत ब्याधा ने मेरा बुरा नहीं किया है अपितु कःई बार मेरे दुश्मनों को छकाया परेशान किया है वजह में भूतों से पंगा परीक्षा नहीं लेता ।वे न मुझे छेड़छाड़ करते /परेशान करते हैं ।आखिर कुछ तो है इस शरीर में ऐसा ,जिसके कारण शरीर में सक्रियता है और जो ना हो ना रहे इस शरीर में तो शरीर निष्क्रिय मृत हो जाता है । वही भूत है इनकी भी एक अद्भुत दुनिया है ।जो गुप्त रूप से है । अतः इनसे पंगा परीक्षा न लो ।

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