किस प्रकार के जानवरों के दूसरे जानवरों के साथ सबसे अजीब संबंध होते हैं?

प्रश्न भी गोपनीय स्तर का है जैविक जीव विज्ञान का होने से .जबाब भी गोपनीय है सार्वजनिक करने के स्तर का नहीं है सामाजिक नहीं है ।अतः इसे सार्वजनिक न किया जाय न इसपर सार्वजनिक रुप में चर्चा की जाय ।
प्रश्न सही नहीं लिखा है जानवरों के स्थान पर जानवर /आदमी लिखा जाता तो ज्यादा अच्छा रहता ।
सिर्फ आदमी के बस में है ये खूबीयाँ विशेष गुँण ःःयह वाहियात कर्म करने का जैविक संबंध विविधता ।
संबंधों के प्रकार वैज्ञानिक दृष्टिकोण से CBSE की जीव विज्ञान की पुस्तक के अनुसार म्यूचुअल्जिम (साझेदारी बराबर की ) कोमन्सैल्जिम (एक पक्षिय साझेदारी )एन्टिगोनिज्म (हर हाल में विरोध करना ) , कम्पटीशन (अकारण आपस में एक दूसरे का बुरा /अहित करना /हानि करना जिसमें स्वयं को/खुद को लेकर कोई लाभ न हो —संघर्ष पूर्ण व्यवहार करना ) , विकटिज्म (शिकार करना या शिकार होना प्रत्यक्ष रूप में दूसरे को आक्रमण करके समाप्त करना ) , पैरासाईटिज्म ( बड़े जीवों के शरीर में छोटे जीवों ड घुस कर छोटे जीवों द्वारा अपना जीवन यापन करना ।) , रोग का नियम प्रकार के संबंध । । भौतिक सम्बन्ध भूतिया शरीर द्वारा एक दूसरे के भौतिक शरीर से भौतिक गुँण का लेनदेन व्यवहार जैसे ऊष्ण ताप विद्युत चुम्बक गति आकर्षण प्रतिक्रिया भंगुरता (टूटना बिखरना ) पिंडत्व (बनना सिकुड़ना )सीमित आयु जीवन अवधि निर्धारण करना ।
मानवीय सामाजिक संबंध मर्यादा शीलता से बना कर रखना स्थाई रोजगार संबंध , स्थाई यौनसंबंध शादी विवाह के बाद आयुपर्यन्त दीर्घ काल तक ।। या फिर अमर्यादित होकर क्षणिक अल्पकालिक संबंध बनाना लूटपाट धोखाधड़ी से यौनसंबंध ब्लात्कार , व्यापारिक संबंध बनाना आदि प्रकार के अनेक अल्पकालिक अल्पनियंत्रित क्षणिक समय तक । । या फिर स्वार्थ सिद्धि के साथ सीमित समय के लिए मर्यादा पूर्ण संबंध बनाने के बदले में अनुबंध /तदर्थ/एडहाँक प्रकार के संबंध रोजगार संबंध ,यौनसंबंध (लव इन रिलेशनशिप )आदि प्रकार के सामाजिक संबंधों को व्यापारिक संबंधों का रूप देकर जीवन यापन जीवन शैली अपनाना ।
अब न जाने कब यह मानव रूपी जानवर ना मालूम कब साझेदा री में यारी में ख्वारी/छल करके शिकार करले ।अपनों को / उनको मारकर खा जाय । । । ःःऔर श्रेष्ठ मानवीय जीवन पद्धति का आदर्श रूप म्यूचुअल्जिम (साझेदारी ) का कब परिवर्तन हो जाय खराब खतरनाक जीवन पद्धति के पशु जीवन पद्धतियाँ जैसे एन्टिगोनिज्म (विरुद्ध ) ,कम्पटीशन , एमनसैलिज्म (स्वार्थ) विकटिज्म (शिकार ) पैरासाईटिज्म (परजीवीता ) और रोगिज्म (जंजालिता ) में बदल जाय ।
न जाने कब साझेदारी में अपने पालतू पशुओं गाय भैंस बकरी कुतिया से गधी से उनकी बिना रजामंदी के उनसे अमर्यादित यौनसंबंध बना दे । न जाने कब उनके छोटे बच्चों से खुद तो बलात्कार करे ही न जाने कब उनसे दूसरे विजातीय पशुओं से भी बलात्कार करवा दे ।बड़ो से भी विजातीय पशुओं से कब बलात्कार करवा दे ।जैसे बकरी को कुत्ते से , बिल्ली को कुत्ते से , बिल्ली को बंदर से , भैंस को साँड से ,गाय को भैंसे से ,
और बकरी कुतिया गाय भैंस गधी घोड़ी सूअरी से नर आदमी आप भिड़ जाय बलातकार करने ,या औरत भिड़ जाय इनके नरों से बलात्कार करने ।

No comments:

Post a Comment