विटामिन डी की कमी की पूर्ति के लिए क्या धूप का सेवन काफी है? आहार में और क्या-क्या शामिल करना चाहिए?

विटामिन डी का निर्माण त्वचा के ऊपरी परत में की मैलैनोसाइटस कोशिकाएं अपने त्वचा वर्णक मैलैनिन रसायन की मदद से करतीं हैं जिसकी वजह से त्वचा का रंग मोडिफायर जींस के कारण सफेद रंग से काले रंग की विभिन्न रेंज में आता है । जितना रंग त्वचा का गहरा /काला होगा उसमें उतनी ज्यादा विटामिन डी निर्माण की क्षमता ज्यादा होगी और त्वचा का रंग जितना हल्का सफेद एलबिनो से ज़्यादा गहरा होगा उसी रंग के अनुपात में विटामिन डी का निर्माण गोरे से ज्यादा लाल , लाल गोरा से ज्यादा पक्का गेहूंआं , इस तरह जितना त्वचा का रंग ज्यादा गहरा होता चला जायेगा उसी त्वचा रंग के गहरापन के अनुपात में त्वचा केअंदर विटामिन डी के निर्माण की क्षमता बढ़ती जाएगी । काले रंग के व्यक्ति की त्वचा गोरे रंग की त्वचा की तुलना में थोड़ी देर में ज्यादा विटामिन संश्लेषण कर लिया करती है । जबकि बढ़ते गोरे पन की त्वचा में विटामिन डी के संश्लेषण की क्षमता निरंतर कम होती जाती है । विटामिन डी के निर्माण के लिए शरीर में उच्च कोटि का उत्तम क्वालिटी का कालेस्ट्राल शरीर की त्वचा में होना चाहिए । इसके लिए त्वचा की तेल घी मालिश कर के सर्दी के मौसम में धूप सेवन की सलाह दी जाती है । वैसे विटामिन डी के कैप्सूल बहुत मंहगे आते हैं मैं इसकी सलाह नहीं दूंगा । डाक्टर की सलाह से विटामिन डी के कैप्सूल का सेवन करना उचित होगा विटामिन डी का ज्यादा सेवन विटामिनोसिस की नई बिमारी पैदा कर सकता है जिसमें शरीर की हड्डियों में कठोरता का मानक स्तर ज्यादा बढ़ जाने पर शरीर की गति शीलता पर बुरा असर पड़ता हैं । मैं चिकित्सक नहीं शिक्षक हूं । अतः मुझे ऐसे सवाल बार-बार भेजना उचित नहीं है ।
ध्यान रहे यह फार्मूला मैंने सर्दी के मौसम का लिखा है याद रखें गर्मी की धूप खतरनाक होती है विशेषकर मई महीने से लेकर सितंबर महीने की तेज धूप से त्वचा में सनबर्न /धूप से त्वचा जल सकती है अतः इसे अब अपनाना प्रयोग करना खतरनाक /घातक हो सकता है ।
विटामिन डी के लिए बदनाम तिल मूंगफली उड़द दाल का सेवन करें ,या फिर ऐसे खाद्य तेलों का सेवन करें जिनमें प्रर्याप्त मात्रा में तेल होता है जैसे सरसों सूर्यमुखी मूंगफली तिल के मुलायम मृदु तेल का प्रयोग किया करें । कठोर तेलों का प्रयोग ठीक नहीं है ।
काले लोगों में अस्थिभंग के केस कम पाते जाते हैं गोरे लोगों की तुलना में गांवड़ी कारण यही है कि काले लोगों में विटामिन डी काफी मात्रा में संश्लेषित होता है त्वचा में अधिक मात्रा में मैलैनोसाइट होने से । जबकि गोरे लोगों में मैलैनोसाइटह कम होने से उनमें विटामिन डी का संश्लेषण कम होने से उनकी हड्डियां कमजोर रही जाती हैं जीवन भर । वे अपनी त्वचा को अधिकतर ढककर रहते हैं । अतः त्वचा का कालापन अभिशाप नहीं वरदान है । विटामिन डी निर्माण के लिए हड्डियों की मजबूती के लिए ।
हड्डियों की मजबूती के लिए त्वचा को ज्यादा से ज्यादा विटामिन संश्लेषण के लिए ज्यादा से ज्यादा धूप उपलब्ध करानें को त्वचा को खुला रखें । सनबर्न की चेतावनी का ध्यान रखें ।

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