राहु चौथे घर में अकेला स्वग्रही है तो शुभ है ऐसा जातक अपने जीवन में मित्रों से हानि नहीं पाता शत्रुओं से हार नहीं पाता पिता माता गुरु पत्नी संतान से दाब दबाव नहीं राजा से भय दंड नहीं इन्द्र वर्ण पुरुषों के नेताओं के प्रभाव में नहीं इस पर तान्त्रिक जादू नहीं चलता यदि सूर्य मंगल गुरु शनि में से एक भी बलवान ग्रह स्वगृही हो या उत्तम युति में हो । राहु मनुष्य को कर्मठ स्वाभिमानी खुद्दार आत्मनिर्भर बनाता है ।राहु प्रधान जातक दुस्साहसी शत्रु पक्ष में जाकर शत्रु पर वार /आघात करने वाला , छलिया जासूसी करने में निपुण होता है । यह किसी के भी आगे हाथ फैलाना माँगना पसंद नहीं करता है इसकी भरपूर कोशिश यही होती है कि सभी इसके आगे हाथ फैलायें पर डर से भय से गरीबी से मजबूरी से ।यह आँख उठाकर भीख मांगने वाले तक से अपनी महत्वाकांक्षा के प्रबल होने से चिढ़ जाता है इतना ज्यादा महत्वाकांक्षी होता है ।
बाकी सभी ग्रहों के सान्निध्य में आते ही यह उनका प्रभाव कम करने लगता है उनके बल को हरण करने में समर्थ होता है ।राहु की युति से सूर्य का पोषण भाव कम सूर्य को स्वार्थी बना देता है राहु प्रधान पिता माता पत्नी गुरु स्वार्थी होने से उनके सान्निध्य में संतान साथी बेगौरी से पिता माता गुरु पत्नी विमुख उल्टी चाल वाले विद्रोही हो जाते हैं मंगल लड़ाई भूल जाता है चंद्र माता शीतलता छोड़ देती है गुरू ज्ञान नहीं देता शुक्र संघर्ष में उलझ जाता है शनि का विवेक गायब इन्द्र का प्रभाव गायब वरुण का युद्ध कौशल गायब पृथ्वी की उर्वरता गायब ।राहु ज्योतिष का सबसे बलवान ग्रह है जो सभी का प्रभाव घटाकर चाल खराब करता है ।
अब आगे से फलितं के प्रश्न न किये जाय मैं व्यवसायिक ज्योतिषी नहीं हूँ ।
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