आप अपने साथी के साथ सेक्स करने से पहले अपनी सहनशक्ति को कैसे बढ़ाते हैं, क्या आप पहले उसके कपड़ों को काटते हैं या आप कपड़े के साथ सेक्स करते हैं?

आप के प्रश्न से पता चलता है कि आप और आपके साथी के बीच कामसूत्रम और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार योनि भेद / भाव प्रकरण के अन्तर्गत योनि दोष , भाव दोष है और आपने इसे ठीक करने के लिए न कामसूत्रम /रतिक्रिया रहस्य का अध्ययन किया ।और न ही शादी के समय किसी ने भी योनि भेद योनि भाव पर विचार विमर्श किया ।आपके प्रश्न के अनुसार आप अपने साथी से योनक्रीड़ा के दौरान और बाद में योन हिंसित होते हैं अर्थात आपके और आपके साथी के बीच योनि भेद ,योनि भाव का ज्यादा अन्तर है ।
आपका साथी अधिक योन ऊर्जायित है और आप उसकी तुलना में कम ऊर्जायित हैं ।आपकी योनि शशक या हिरन की है और आपके साथी की योनि भेड़िया या स्वान की है ।यह मंद शत्रु योनि दोष है उग्र शत्रु योनि दोष सिंह और बाघ से बनता जिसे आपको सहन करना और भी घातक लगता। याद रहे माँसाहारी यों के प्यार में दाँत और नाखून जब चलते हैं तो लगते भी हैं पर उन दाँत और नाखून के वार प्रहार को सहनकरने की क्षमता स्वजातीय स्वयोनिज में ज्यादा होती है जबकि विजातीय शाकाहारी ओं में सहनकरने की क्षमता मासाहारियोंं की तुलना में कम होती है शेर के प्यार का वार शेरनी या बाघिन झेल सकती है तो बाघिन के प्यार का वार बाघ या शेर झेल सकता है।गाय भैंस को भारी और हिरन को घातक शशक खरगोश को मारक बैठता है। यह सर्ग कामसूत्रम में नखर दंतक्षय आलिंगन के अन्तर्गत आता है।इसे यौन क्रीड़ा सर्ग में मर्दाना प्यार /जनाना प्यार कहते हैं । यह प्राकृतिक स्वाभाविक रूप से होता है,।
अब दूसरा यौनक्रीड़ा पक्ष का ब्यौरा जिसमें आपने हमसे हमारे बारे में पूछा है तो उसका जबाब यह है कि मैं सर्प योनि हूँ और हमार साथी अश्वा घोड़ी योनिज है हम दोनों में भी वेग दोष है लेकिन आपको मालूम हो कि सर्प सबसे बेबस जीव होते हुए भी सबसे शक्तिशाली माना जाता है बस कोई एक बार उसकी पकड़ में आतो जाय फिर वह उससे अपनी मनमानी करके मानता है जिसके आगे सभी जीव अपने को बैबस पाते हैं ।सर्प की पकड़ से बचना छूटना शेर बाघ तो क्या हाथी को भारी पड़ता है ।भेड़िया और स्वान तो उसका प्रिय आहार है।हिरन और शशक के साँस सर्प को देखते ही रूकने लगते हैं ।कामक्रीड़ा भी एक यौनभूख शिकार विधा है जिसमें जीव अपनी जाति के बन्धु जन का शिकार मित्थया भक्षण विधा में करता है जिसमें वह अपने साथी को समग्र रूप से नहीं खाता ब्लिक वह अपने स्वजातीय बन्धु के शरीर अंश शुक्र रज का ग्रहण / भक्षण अपने शरीर के द्वितीय अधोमुख योनांग से करता है ।
अब आपके हितार्थ सैक्स विधा की सक्षिप्त जानकारी जब नर नारी एक साथ एक समय पर स्खलित /डिस्चार्ज हों तो यह सर्वश्रेष्ठ सम रति कही गई है जब दोनों के बीच स्खलन में थोड़ा अन्तर हो लेकिन दोनों डिस्चार्ज हो जायें तो यह असम रति है लेकिन चलेगी ।परन्तु जब दोनों के बीच एक स्खलित हो जाय और दूसरा स्खलित न हो पाय यह विषमरति है जो अधम सबसे बुरी है जिसमें एक अतृप्त प्यासा प्यासी रह जाता /जाती है तो वह अपने पहले तृप्त हुए पार्टनर को यौनहिंसत करने लगता है इसका जिक्र कामसूत्रम के पुरुषायित प्रकरण में है जिसमें स्त्री पुरूष के समान हिंसित वयवहार करती है पुरुष को उत्तेजित मोटिवेट प्रेरित करती है कि अभी उसका मन नहीं भरा।अतः एक बार फिर से योन क्रीड़ा दोबारा नये सिरे से की जाय ।
अब आपके सवाल की अन्तिम लाईन कपड़ें वाली का जबाब देखिए यदि दोनों सम योनिज हैं तो वे आपस में सहर्ष समग्ररूपेण मिलते हैं कपड़ों की बाधा उन दोनों को स्वयं पसंद नहीं आती । यदि दोनों असम योनिज हैं विषमयोनिज हैं तो ऐसे में अपने शरीर को दूसरे के काम्य प्रहारों से बचाने के लिए दोनों एक दूसरे से बच बचकर मिलते हैं ताकि शरीर को एक दूसरे के दांत और नाखूनों से कम से कम चोट लगे ।
हिंसितकाम के वेग में जब काम हर्ष गनगनाकर उठता है उत्तेजना अपने पूरे शिखर पर होती है तो दिमाग काम करना बंद कर देता है ऐसी विकट परिस्थिति में नर नारी को हिंसा विवेक नहीं रहता है वह नारी जीव को मुँह से दाँतों से नाखूनों से ,और नारी नर को मुँह से दाँतों से नाखूनों से हिंसित करते हैं ।
मैंने कई स्त्रियों के मुॅह पर काटने चूसने के निशान देखे हैं कई अभिनेत्रियों ने टी वी पर पुरुष के संभोग के दौरान औरत की पीठ पर काटने चूसने के निशान दिखाएं , उन्होंने अपने पार्टनर के काटने को बुरा कहा है और अपनी पीठ पर काटने का जिक्र किया है जबकि उन्होंने कहा कि संभोग के दौरान उन्हें बाॅडी पोस्चर /स्वानमुद्रा /कुतिया बनना पसंद है स्वीकार किया है कि उनको संभोग संबंध के दौरान कुतिया बनना अच्छा लगता है तो भाई उस नर पार्टनर भी कुत्ता बनना पड़ेगा और संभोग करने के दौरान वह संभोग पार्टनर को काटेगा भी चूसेगा भी । संभोग क्रिया के दौरान सभी का विवेक खत्म हो जाता है वह अपने पार्टनर के साथ क्या नया कर गुजरे पता नहीं लगता है इसका पता संभोग की खुमारी उतरने के बाद लगता है ।
तुम्हारे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है तुमने अपने संभोग पार्टनर से उसकी संभोग मुद्रा , संभोग अभिरुचि , संभोग दृष्टि कोण , संभोग संतुष्टि समय के बारे में संभोग क्रिया करने से पहले कुछ भी तों पूछा नहीं और संभोग क्रिया करने लग गए ,अब जब आपका पार्टनर ने संभोगपार्टनरशिप में अपनी संभोग मूल योनि पशु मुद्रा में आकर उसने आपको काट लिया तो आपको उसका पशुज रूप कुतिया पन अच्छा नहीं लगा ।अब उससे आप संभोग का मजा तभी ले पाओगे जब आप उसके पशुज स्तर कुत्तापन पर उतरपाओगे यदि आपसे संभोग मुद्रावस्था में उसके पशुज स्तर कुत्ता बनना पसंद नहीं है आप कुत्ता पन पर नहीं उतर पाये आपका संभोग मुद्रा अवस्था में कुत्ता बनना संभव नहीं है तो बचाव अपना करो , या फिर संभोग के मजा की सजा सहन करना सीखो ।
यह ठीक उसी प्रकार है जैसे जासूसी में शराब पिलाकर रहस्य राज उगलवाने को शराब पिलाई जाती हैं नशे की सलाह में सभी सच बोलते हैं , संभोग क्रिया में भी जीव को योनि का नशा चढ़ने से वह बेहोश बेसुध हो जाता है और अमर्यादित पशु समान आचरण व्यवहार करने लगता है अपने संभोग पार्टनर पर मत चीखो चिल्लाओं उसके पशुज व्यवहार को सहन करना सीखो और संभोग विधा का मजा लो । इसके लिए कोरा पर मत चीखों चिल्लाओ । पाठक और लेखक तुमसे ज्यादा समझदार हैं ।। ज्यादातर तलाक और संबंध विच्छेद का कारण /आधार भी मूलतः संभोग क्रिया के दौरान असम /विषम रति है जिसमें स्त्री लम्बे समय तक अतृप्त रहती है तो उसका व्यवहार लम्बे समय तक यौनक्षुधा /यौनभूख तृप्त /शान्त न होने से अति हिंसित हो जाता है और वह शरीर की , मन की हिंसा पर उतर आआती है मन को पीड़ित करने को व्यंग्य भाषा /कर्कश शब्दों का प्रयोग करने लगती है और शरीर हिंसा हाथापाई पर उतर आती है । पुरुष इसे ऊसकी असभ्यता अज्ञानता कहता है लेकिन अपनी यौनविषयक अज्ञानता को नहीं समझता है ना ही स्त्री के व्यवहार में आये परिवर्तन को समझने की कोशिश करता है ।

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