प्रकृति में दो अलग अलग जाति /भिन्न योनियों के जीवों में नैतिक प्राकृतिक रूप से संकरण नहीं हो सकता ।प्रकृति में यदि ऐसा विचित्र संबंध प्राकृतिक रूप से नैतिक बने या अनैतिक बने मानव द्वारा बनवाया जाय तो ःः
प्रकृति के आईसोलेशन शुद्ध प्राकृतिक व्यवस्था नियम के अनुसार पहली पीढी नपुंसक होगी यदि किसी कारणवश पहली पीढ़ी सपुंसक /फरटाईल होती है तो इस पीढ़ी के सदस्यो के जननांगों का आकार पूर्व की मातृ पक्षीय और पितृ पक्षीय सदस्यों से मैच /मेल नहीं करेगा और परिणाम तः संकरण से उत्पन्न सदस्यों को आपस में ही यौन संबंध /जनन संबंध बनाना होगा जिसका परिणाम यह होगा कि तीसरी पीढ़ी के सदस्य हर हाल में नपुंसक ही पैदा होंंगे ।
इसे हम घोड़े और गधे के मिलन /संकरण से समझ सकते हैं।हम देखते हैं कि घोड़े और गधे के सहयोग संकरण से उत्पन्न संतान नपुंसक खच्चर पैदा होता है नर में मूत्राँग तो होता है परंतु जननांग वृषण नहीं होते ,मादा में मूत्राँग योनि द्वार तो होता है परन्तु सफल मैथुन के लिए आवश्यक उचित आकार की योनि नली नहीं होती है जिसमें मैथुन /जननक्रिया के दौरान गधे का ,घोड़े का ,खच्चर का नर जननाँग प्रवेश कर सके और सामान्य रूप में नर शुक्राणु स्खलन (सीमैन डिस्चार्ज ) क्रिया समपन्न हो सके ।
मानव प्रयास से ऐसा अनैतिक यौन संबंध बल पूर्वक बनवाया जाय या कृत्रिमता से करवाया जाय तो खच्चर मादा का गर्भाशय अविकसित अतिछोटा होता है जिससे खच्चर मादा गर्भावस्था के दौरान मर सकती है मर जायेगी ।मादा खच्चर में जनन करने को परम आवश्यक मादा युग्मक अन्डाणु उत्पादन अंग अन्डाश्य नहीं होता जिससे उसमें नर गधे घोड़े के खच्चर के शुक्राणुओं से मिलन को स्वजातीय अंडाणु पैदा हो सकें । जिससे मादा खच्चर न घोड़े न गधे से जनन संबंध बना सकती है ।
पर मादा खच्चर हो या नर खच्चर दोनों में बरसात के मौसम /ऋतु में यौन उत्तेजना उत्पन्न होती है ।जिसके दौरान वे नर व मादा खच्चर आपस मेंं पहले बाद में गधों घोड़ो के ऊपर बैठने ,चढ़ने ,व उनको आगे चलने बढ़ने से रोकने के लिए उनके आगे खड़े हो जाते /अड़ जाते हैं ।आखिर तः उनमें भी तो जीवों की मूलक वंश वृद्धि भावना होती है।जिससे वे भी वंश वृद्धि कामना पूरक यौन क्रीड़ा व्यवहार करते हैं ।
यह विवरण मेरे निजी अनुभव पर आधारित है , मेरे घर के पास कुम्हार /प्रजाति जन रहते हैं वे गधे घोड़े खच्चर रखते हैं स्थान की कमी के कारण वे अपने गधे घोड़े खच्चर को अक्सर मेरे बाग में बाँध देते और खेतों में फसल न होने पर गधे घोड़े खच्चर को हमारे खेतों में चरने /घूमने को छोड़ देते थे ।
शेर और टाइगर के संकरण से बना लाईगर भी नपुंसक होता है प्रजनन के अयोग्य उसके शरीर का विशाल आकार इतना बड़ा और भारी हो जाता है कि शेर और टाइगर में उससे मिलने /मैथुन करने की हिम्मत नही बनती ।
इसे नेचर का आइसोलेशन रूल या जातियों की यौन शुचिता /पवित्रता का नियम कहते हैं ।जिसका मतलब है कि सभी जीवो की जातियों की शुचिता /पवित्रता बनी रहे ।सभी जातियाँ नियमित रूप से स्थिर स्थाई रहें ।
इस आईसोलेशन नियम को लेकर कर भंग करनेवाले /तोड़ने वाले ओं को न्यिओटोनिक पेन का सामना करना पड़ता है जिससे अक्सर मादा जीव को यौनिक पीड़ा होती है जिसमें अक्सर मादा जीव की मौत हो जाती है असामान्य यौन संबंध बन जाने के कारण ।। इस भय से प्रकृति /सृष्टि में सभी मादा जीव अपनी स्वजातीय नर से जनन संबंध बनाते हैं और सृष्टि चल रही है अपने आप ।
यह अमर्यादित संबंध पर एक एम्फिबियन जीव की जाति एक्सोलोटल से जीवनियोटोनिक पेन कन्सैप्ट आया है जिसमें आयोडीन की कमी से एक्सोलोटल एम्फिबियन के लार्वा /बच्चे बिना व्यस्क हुए उनके शरीर सामान्य से ज्यादा बड़े हो जाते हैं जो अपनी ही जाति को समस्या पैदा करते हैं यौंन संबंधों में ।परिणाम तः सामान्य मादाएं बड़े आकार वाले नर एक्सोलोटल से पीड़ित होती हैं उनसे मिलना मैथुन /संकरण करना पसंद नहीं करतीं वे उन स्वजातिय नर को विजातीय नर समझती हैं परन्तु बड़े आकार वाले नर उनसे स्वजातिय होने से बल पूर्वक यौन /जनन संबंध बनाने में सफल हो जाते हैं ।इसअसामान्य बड़े शरीर के नर से यौन संबंध के दौरान मादाको पीड़ा का जो यौन संबंध बनाने में पीड़ा होती है उसे नियोटोनिक पेन ( असामान्य मिलन के दौरान यौनांग क्षेत्रीय पीड़ा ) कहते हैं ।जिस कारण से सामान्य मादाएं बड़े शरीर वाले नरों से बचती हैं दूर रहतीं हैं उनसे मिलन /संकरण उचित नहीं समझती हैं । और सामान्य नरों को बड़े आकार की एक्सोलोटल लार्वा मादा सफल मैथुन न कर पाने से बार बार मैथुन को प्रेरित करती हैं जिससे सामान्य नर असामान्य रूप से बड़ी मादा से पीड़ित /परेशान होते हैं /रहते हैं ।
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