मांगलिक का विवाह मांगलिक से ही क्यूँ होता है? मान लो अगर विवाह गैर मांगलिक से हुआ तो क्या होगा?

मनुष्य के शरीर में तीन तरह की ऊर्जाएंं होतीं हैं सिर में मानसिक ऊर्जा (सोचने बोलने चिंतन करने की ) श्रम ऊर्जा (हाथ पैर मेंं गति कर्म की )प्रज्या ऊर्जा (लबीडो /यौनसक्रिता ) मांगलिक स्त्री /पुरुष में ये तीनों ऊर्जा केंद्र सामान्य स्त्री /पुरूष की तुलना में ज्यादा सक्रिय होते हैं । जिससे जब इनकी ऊर्जा संसारिक कार्यों में पूरी नहीं निकल पाती है तो ये अपने शरीर की अतिरिक्त ऊर्जा को अपने जीवन साथी के ऊपर निकालने लगते हैं झगड़ा करके ,अब यदि इनका जीवन साथी चंचलता पूर्ण मंगली ,दंगली ,जंगली युग्ल रूप में इसके समान स्तर का है मंगली है तो वह क्रिया की प्रतिक्रिया देकर अपने जीवन साथी को सहयोग देता है ,रोक देता है ,सहन करलेता है । यदि वह मंगली नहीं है दोनों का ऊर्जा स्तर समान नहीं है तो वह अपने को असहज महसूस करता है और एक निश्चित सीमा से ज्यादा अति महसूस होने पर मंगली जीवन साथी से अपने आप को छुड़ाने, बचने, दूर जाने, की पलायन वादी सोच अपनाने,लगता है और मंगली उसे पकड़ बनाने की सोच बनाने लगता है परिणाम दोनों के बीच संघर्ष झगड़ा लड़ाई शुरू जो आगे बढ़ा तो संबंध विच्छेद/तलाक ,या तलाक न हुआ, तलाक को रोका , तो मंगली उग्र ऊर्जा प्रभाव से साधारण जीवन साथी की हत्या कर दिया करता है ।। और यदि मंगली ने हत्या न की तो मंगली के बढ़ते ग्रह बल दोष के कारण प्रकृति उस साधारण नोन मंगली को मारकर मंगली का जीवन निष्कंटक कर दिया करती है।जिस कारण हिन्दू ज्योतिष शास्त्र में विश्वास मानने वाले मंगली से बचा करते हैं ।
मंगली की पहचान यह है कि मंगली का स्वभाव आक्रामक होता है इसके माथे के बीचों बीच मध्य में v आकर में खुह बाल होते हैं विडोपीक टोपिक का नैट पर अध्ययन करें । बढ़ी हुई अतिरिक्त मानसिक, शारीरिक, यौन ऊर्जा के कारण मंगली को लड़ने में, संघर्ष में, युद्ध में मजा आता है इसे स्वभावतः लड़ाई अच्छी लगती है साधारण मंगली को, संघर्ष अच्छा लगता है दंगली को , युद्ध अच्छा लगता है जंगली को । अब यदि उस मंगली जातक में लड़ाई का विवेक है तो वह दिमाग से लड़ता है जीतता रहता है जीवन में अधिकांश लड़ाईयों को उसका जीवन मंगलमय होता है श्रेष्ठ मंगली है , यदि उसमें लड़ाई का विवेक नहीं है तो वह लड़ाई शरीर से लड़ता है दंगली है , यदि लड़ाई का विवेक नहीं है कौन से ,किससे, कहाँ तक लड़ना होगा ? सीमा हीन लड़ाई की सोच रखने वाला लड़ाकू, जंगजू ,खाड़कू जंगली मांगलिक दोष युक्त होता है इससे बचने की जरुरत है कब दूसरे को मार दे कब खुद मारा जाय मारामारी में ।
मंगलीक के इस मंगली दोष से बचने के पंगेबाज सोच ,स्वभाव, आदत के कारण साधारण सोच के मनुष्यों ने यह अवधारणा बना ली है ।ज्योतिषयों पंडितों ने जन सामान्य में मंगली के प्रति भय पैदा कर दिया है कि मंगली की शादी विवाह मंगली से करना चाहिए ।ऐसा कुछ नहीं है मैंने माथे पर बीचों बीच v क्षेत्र में खुह बाल लक्षण युक्त अनेकों महिलाएँ / पुरुष देखे है जो मंगल दोष युक्त होते हुए भी सामान्य जीवन साथी के साथ खटर पटर वाला जीवान्त जीवन जी रहे हैं उन्होंने मंगली दंगली जंगली के साथ जीवन जीना सीख लिया है ।इसमें ज्योतिष शास्त्र के अनुसार गौर करनेवाली बात यह है कि मंगली जातक अष्टम भाव का क्रूर दुष्ट भाव का जंगली खाड़कू/ जंगजू मंगली दोष वाला ना हो जो मंगल के अष्टम भाव में राहु केतु शनि की युति होने पर बनता है यदि स्त्री पुरूष दोनों जातक अष्टम भाव के जंगली मंगली हैं तो उनका शादी युग्ल बनाया जाय । अब मंगली दोष के साधारण लोगों से शादी पर विचार पर ःःःःःः यदि सादा कुन्डलीक स्त्री /पुरुष सर्प योनिज है , राक्षस गण का है ,क्षत्रप वर्ण है । प्रबल ग्रह पहले सूर्य, चौथे में अकेला राहु पाँचवें में गुरु उत्तम है । एक भी गुँण है तो पहले चौथे बारहवें भाव के मंगली जातक की शादी विचारणीय है । बाकी विधाता बलवान है ।जो लिखी को बदलने में ,लिखी को मिटाने में समर्थ है
।इस पर मेरा निजी अनुभव मेरा दामाद 12वें चंद्र दोष युक्त है जो अपनी बहन के साथ जुड़वा पैदा हुआ था ।शादी के समय चंद्र दोष देखकर बिदक गया ,तब साढ़ूभाई ने समझाया कहा ज्यादा भगवान मत बनो अपने ज्ञान पर घमंड मत करो किसी की किशमत का कोई पता नहीं कब लिखा हुआ बदल जाय ।अक्ल मत दिखाओ रिश्ते को होने दो शादी के बाद लड़के के साथ लड़की का भाग्य जुड़ जाता है खुद को देखो क्या थे तुम ? शादी के समय और आज क्या बन गये हो ?अपनी पत्नी के भाग्य के जुड़ने से ।। उनकी बात सच थी जम गई शादी के समय मैं पढ़ालिखा बेरोजगार था पहले एक बेटी हुई फिर दूसरी बेटी के पैदा होने से पहले सरकारी नौंकरी लग गई उसी दौरान विदेश में धर्म शिक्षक की नौकरी का अवसर मिला ।सभी ने सरकारी नौकरी को प्राथमिकता दी मैंने शासकीय विद्यालय में टी.जी.टी.ज्वाईन कर लिया ।
अब चर्चा दामाद की ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 12वां चंद्र संतान हीनता सूचक है इसकी पुष्टि उसके बहन के साथ जुड़वां पैदा होने से होती है । फ्रीमार्टिन इफैक्ट नियम से अनुवांशिक विज्ञान के जैनैटिक्स प्रकरण में गर्भ मे जब लड़का लड़की यदि जुड़वां ट्विंस आते हैं तो माता के नारी हार्मोन गर्भस्थ लड़की के नारी हार्मोन के मिलने से गर्भ में नारी हार्मोन की अधिकता होने पर गर्भ में मौजूद नर शिशु लड़का नपुंसकता लिए पैदा होता है या लड़की गर्भ में विकसित होती है लड़के का विकास नहीं होता है ।बात सच थी लड़की बहन लड़के दामाद की तुलना में पैदा होते समय लड़के से दो गुना बड़ी और भारी थी । लड़के के बचने की संभावना नहीं थी ,बाद में सब पलट गया लड़का( मेरा दामाद ) अपने परिवार में सबसे ज्यादा बड़ा भारी शरीर का है अर्थात जीन जैनैटिक्स फ्रीमार्टिन इफैक्ट सब फेल हो गये । अब 12वें चंद्र की पलट शादी के एक साल बाद मेरी बेटी को एक लड़की पैदा हुई और ढाई साल बाद बेटी को एक लड़का हुआ । तो भाईजी मैं आपसे यही कहूँगा कि इतना विश्वास मत करो इन ग्रह नक्षत्र ज्योतिष पर कि आँखों देखी झूँठी और कानों सुनी सच्ची , प्रत्यक्ष रूप में आये बढ़िया रिश्ते को मंगल के डर से छोड़ दो । बढ़िया रिश्ता, बढ़िया परिवार बढ़िया कुल हर दम द्वार पर नहीं रहते कभी कभार नसीब से मिलते हैं बाकी विधाता बली है विधाता पर विश्वास करो अपने मन को पार्टनर की भावनाओं के अनुसार सोचना सिखाओ .पार्टनर की भावनाओं को समझो दोनों के हित में अपने दिमाग को सोचना सिखाओ समझदारी इसी में है ।मैंने अपना अनुभव आपको इस लिए शेयर किया गया है कि बदलाव लाना सीखो मन में विचारों में परिवर्तन देखो जीवन में ।
इन ज्योतिष शास्त्र के ग्रहों से इतना मत डरो कि अच्छे रिश्ते ज्योतिषी पंडित जी के कहने मात्र से बिगाड़ लो ,छोड़ दो । मेरे विचार से योनि गुँण मिलान , गण स्वभाव मित्र मंडली , वर्ण और नाड़ी ( रक्त समूह आर एच ) तथा अन्य प्रभावी मानवीय गुँणों पर ध्यान देना विचारणीय है ।मंगली दोष से बुरा चंद्र दोष है जो संतान का नियंता है ।परन्तु वह भी बदल जाता है दूसरे पार्टनर के सानिध्य में ।जैसे मेरे दामाद का बदल गया मेरी बेटी के प्रभाव से ।मंगली की सामान्य से शादी हो सकती है सामान्य निम्न मंगली दंगली दोष की सामान्य विशिष्ट से शादी हो सकती है ।क्रूर जंगली मंगली जंगजू ,खाड़कू की शादी सभी के साथ बैठकर विवेक से करें । इनके बीच में मध्यस्थता करने ,गारंटर बनने से सहमति से फैसला लिया करें । बाकी विवेक आप का और सलाह ज्योतिषी जी की ।
बाकी आप जानें आपका राम जाने आपका काम आप जाने । दोष मत देना मुझे ,मैं भाग्य बाँचा नहीं , भाग्य निर्माता नहीं ,भाग्य विधाता नहीं ।प्रश्न आया जबाव देना मेरी नैतिक मजबूरी थी । मैं किसी के भाग्य दोष में शामिल नहीं ।कोई मुझे भाग्य बाँचने का दोष न दे ।

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