सुबह सुबह सेक्स करने के क्या फायदे हैं और क्या नुकसान होते हैं?

सैक्स करना एक महाऊर्जा वययी क्रिया है जिसमें ऊर्जा का व्यय अधिकतम होने से नींद न चाहते हुए भी आती है ।अतः पहले नींद पूरी करो फिर सैक्स करो फिर से दोबारा पुनः सो जाओ ,सैक्स करने के बाद ::
सुबह के समय सैक्स करने से लाभ कोई नहीं है नुक्सान ही नुकसान हैं। ऋषि मार्कंडेय के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त प्रातःकाल में 3–6 और सांयकाल में संध्या समय में 6 -9 तक समय सैक्स करने के लिए निषेध है ।भाव प्रकाश प्रसिद्ध वैद्यक ग्रंथ में ,चरकसंहिता के पूर्वार्ध भाग में विमान प्रकरण मृत्यु से पहले लिखा है जिसमें संभोग को भूमा दायी अवस्था कहा है जिसमें मृत्यु पूर्व जीव का संतुलन बिगड़ जाने से दिमाग पर नियंत्रण न रख पाने से जमीन पर गिर जाना बताया है ।इसे मैंने कुतिया का मैथुन के दौरान पहले और कुत्ते का बाद में गिर जाना देखा है भैंसे को भैंस पर से उतरते समय कभी कभी गिरते देखा है ।अर्थात मैथुन /सैक्स एक मृत्यु सम क्रिया है जिसमें अक्सर जीव मैथुन के पहले और मैथुन के बाद आसानी से मारे जाते हैं शत्रुओं के द्वारा ऊर्जा स्तर गिर जाने से वे भाग नहीं पाते और ,दिमाग की चिंतन मनन अमूर्त चिंतन क्षमता नष्ट हो जाने से शत्रु के हाथ /,दाव में आसानी से आकर मारे जाते हैं ।
इसका वैज्ञानिक कारण है शरीर के आमाशय में अन्न न होने से शरीर का मानक ताप और भूखे पेट होने से बी पी रक्त प्रवाह दबाव कम होना । भूखे पेट होने पर सैक्स करने से शरीर की वायु उग्र रूप से कुपित होकर शरीर की जमीं हुई धातुओं को उखाड़ देती है जिससे शरीर में धातुओं की कमी के रोग पैदा हो जाते हैं कैल्शियम, पोटेशियम, सोडियम, फास्फोरस, आयोडीन, लोहा ,मैग्नीशियम ,मैगनीज ,अभ्रक सैलीनियम, आदि जिससे शरीर की गर्मी का स्तर कम होने से दर्द, तंत्रिका तंत्र में गड़बड़ी, आँतों में भोजन शोषण पंप खराब होने से बबासीर ,हड्डियों में भंगुरता ,लैंगिक ऊर्जा में कमी ,रक्त का हीमोग्लोबिन स्तर गड़बड़ा जाना , सांस फूलना जो भविष्य में टी वी अस्थमा में बदल सकता है ,शरीर का ऊर्जा स्तर गिर जाना लम्बे समय तक कठोर परिश्रम नहीं कर पाना , शुगर स्तर गड़बड़ा जाना मधुमेह की संभावना। ये लक्षण मेंनें धातु तत्वों के कमी के अनुसार लिखे हैं ।जो अनुभूति अनुभव के हैं जिनके निराकरण के लिए मैं यथासंभव दैनिक जीवन में आयुर्वेदिक भस्म का उपयोग करता रहता हूँ समय समय पर ।
अब दूसरों का अनुभव जो लोग संभोग करने के बाद आराम नहीं करते ,नहीं सोते ,नहीं नींद लेते उनके शरीर में वायु का स्तर सामान्य रूप से अधिक हो जाता है उन्हें आयुर्वेदिक वात ,वातज रोग हो जाते हैं जिसमें उनके शरीर की शिराओं के अर्ध चंद्राकार वाल्व सामान्य से अधिक मोटे हो जाते हैं जिससे घुटनों से नींचे पैरों में कुहनियों से नींचे हाथों की शिराएं सामान्य से ज्यादा मोटी भद्दी सर्पिली शिराजाल रुप में दिखाई देने लगती है जिससे उन्हें रुककर खडे़ होने में परेशानी होती है चलने से कम महसूस होती है ,भविष्य में आगे चलकर ये शिराओं की वात व्याधि वैरीकोस वैंन्स में बदल जाती है जिससे उन्हें लम्बे समय तक रूककर खड़ा होना मुश्किल हो जाता है जिसका इलाज सिर्फ आपरेशन है ।
इसीलिए प्रातःकाल और साँयकाल संध्या समय में सैक्स करना निषेध है क्योंकि आप को सैक्स करने के बाद सोने का समय नहीं मिलता/बचता ,जिससे तरह तरह के वातज रोग ,वैरीकोज वेंन्स रोग होने की संभावना बढ़जाती है बिना कठोर परिश्रम करने से भूखे पेट मेहनत करने से । याद रहे सैक्स करना अपने आप मैं बहुत बड़ा परिश्रम/कठिन मेहनत का काम है जिसमें शारीरक ऊर्जा पेशिय ,मानसिक ऊर्जा ज्ञानेन्द्रियों द्वारा ,यौन ऊर्जा यौनांग स्राव वीर्यपात रजपात में व्यय /नष्ट होती है ।जो इतनी ज्यादा होती है कि उसकी पूर्ति के लिए सोना नींद लेना जरूर हो जाता है ।और नींद न लेने का दुस्प्रभाव उपर पहले लिखा जा चुका है ।
हमारे यहां कहावत लोकोक्ति है भूखा चढ़ा भूखे पर दोनों हुए बेहोश
अतः सैक्स/संभोग करने का नियम है कि भूखे पेट संभोग /सैक्स न करें और
खाना खाने के तुरंत बाद संभोग /सैक्स न करें नहीं तो पेट लटक जायेगा ।
अर्थात सैक्स करते समय सैक्स करनेवालों का पेट खाली न हो ।और खाना खाने के दो या तीन घंटे बाद सैक्स किया जाय ।

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