मेरा मानव मानवीयता मानवव्यवहार का प्रशिक्षण परिवारिक सदस्यों ने बाल्यकाल में शुरू कर दिया गया था ।मेरी मां उच्च कुलीन ब्राह्मण परिवार से थीं । जिससे मुझे बचपन से ही रीति रिवाज, नीति कानून , अनिति अन्याय , कुरीति परिवार समाज समस्या की समझदारी विभिन्न स्मृति ,दर्शन ग्रंथओं की पढ़ाई कराई गई ।जब भी कभी शिक्षकजनित समस्या होती तो पिताजी ने फैमिली एडवोकेट पेड पैटर्न पर रखा हुआ था । मेरे पिता जी मुझे प्रोफेसर बनाना चाहते थे लेकिन मैं शिक्षक /प्रवक्ता जीव विज्ञान बन गया ।
शिक्षक पद की गरिमा/महत्ता को समझो , शिक्षक से उलझोगे तो नर्क में ही रहोगे जीवन भर जीते जी । मरने की जरूरत नहीं है नर्क देखने के लिए । आपकी ब्रैन सैटिंग डिस्टर्ब है । अधिक मात्रा में असीमित शहद चाहिए तो मधुमक्खी पालन करने के लिए मधुमक्खी के छत्ते की इज्जत करना सीखो , मधुमक्खी के डंक को सहन करना सीखो ।
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