ना ये बिमारी हैं ना वो बिमारी है कारण इन रोगों के कारक सूक्ष्म जीव वायरस, बैक्टीरिया, प्रोटोजोआ, हैल्मिन्थ आदि परजीवी नहीं है ।
ये वे शरीर की क्षमता को कम करनेवाले मानसिक भावनात्मक मैटाबॉलिक डिस्आर्डर हैं जिनको प्राकृतिक रूप से नियंत्रित करने की क्षमता शरीर में नहीं रही ,शरीर जीते जी बेकाबू हो गया है।शरीर का ऊर्जा दायी पदार्थ शुगर पर से नियंत्रण हट गया है ।
अब चर्चा थायराइड के बारे में ःः
थायराइड एक अन्तःस्रावी ग्रंथि होती है जो गले पर सामने की ओर कालरबोन /हँसली जोड़ के ऊपर होतीहै ।इसका मुख्य कार्य शरीर का ताप नियमित रखना है जो एक मैटाबॉलिज्म एक्टिविटी है जिसे यह अपने हार्मोन थायरोक्सिन के द्वारा करती है पीयूष ग्रंथि के नियंत्रण में रहकर करती है ।थायरोक्सिन हार्मोन का उत्पादन नियंत्रण भोजन में ली गई उचित मात्रा में आयोडीन पर निर्भर करता है ।
सामान्य तः मानव शरीर में5 -6 मिग्रा०आयोडीन होती है परंतु आयोडीन की अधिक मात्रा थायरॉइड ग्रंथि में एकत्रित रहती है।हमारे भोजन में आयोडीन की दैनिक मात्रा 150 म्यू जी है ।अधिक मात्रा में ग्रहण की गई अतिरिक्त आयोडीन की मात्रा मूत्र द्वारा उत्सर्जित /निष्कासित होती रहती है ।जब आयोडीन भोजन में नहीं ली जाती है लम्बे समय तक तो आयोडीन की कमी होने से आयोडीन से बनने वाला थायरोक्सिन का उत्पादन कम होने लगता है जिससे जीव की सभी जैविक क्रियाएं मंदी पड़ने लगती हैं।BMRबेसल मैटाबोलिक रेट मंदा पड़ने लगता है ःः
जिससे जड़वामनता ( ऊर्जा की कमी से दिल दिमाग का उचित क्षमता से काम न करना ,नब्ज मंद, शरीर का ठंडा रहना, वृद्धि मंदता,मुँह पर नियंत्रण नहीं होने से निचले जबड़े का लटकने से मुँह का अपने आप खुला रहने से लार गिरना ,बौनापन, बिना वजह डरना भूतभय, अप्रज्या यौन इच्छाओं का कम होना या समय सेपहले समाप्त होना ) ःः । मिक्सिडेमा ( वयस्क अवस्था में थायरॉइड के अल्प स्राव से बी.एम.आर. कम ,जवानी में बुढ़ापे के लक्षण ऊर्जा की कमी से यौनिक इच्छाओं का कम होना पुरुषों में प्रातःकाल में हर्ष गुँण लिंग उत्थान न होना महिलाओं में समय से पहले मोनोपोज के लक्षण नियमित माहवारी में समस्या ,बाल झड़ना ,बाल फटना, रूखे बाल ,बालों की चमक घटजाना ,अकारण पेशियों का अकड़ना, कालेस्ट्राल की समस्या ,अचानक नाँक बंद होने से प्राकृतिक रूप से साँस लेने में परेशानी महसूस होना ) ःः ।। घेघा ( गले /गरदन के निचले भाग में शुरुआती दौर में खुजली मचना खुजाने पर गले में सूजन बनना बाद में सूजन के स्थिर स्थाई होते रहने पर गले का निचला भाग फूलकर मोटा होना ) आयोडीन की कमी से जीवों /मनुष्यओं में अन्य असामान्य जैविक व्याधियां जैसे चेहरे पर असामान्य रूप से उभरी हुई आँखें गोल नेत्र क्रोध मुद्रा मय चेहरा , आँखों में असामान्य लाली लाल डोरे, चुबन जैसा चोब , आँख को दबा कर मींड़ने से छोत आदि अनेक असामान्य नेत्रजलन व्याधियां शरीर में बड़ी गर्मी से पैदा होती हैं पहले ये अभिशप्त वयाधियाँ थीं ,मैटाबॉलिज्म डिस्आर्डर का ज्ञान नहीं था अब ये आयोडीन के सेवन से नियंत्रण में आ गई हैं ।आय़ोडीन की कमी का सबसे ज्यादा बुरा प्रभाव जीवों के लैंगिक व्यवहार द्वितीय लैंगिक लक्षणों के विकास यौन क्षमता पर पड़ता है ।आयोडीन की कमी से समुचित मानसिक विकास होने से पहले बच्चों का यौन विकास पहले होने लगता है जिससे बच्चे बाल्यावस्था में यौन क्रियाओं में रूचि लेने से लेकर यौन क्रियाओं में सक्रिय हो सकते हैं उनके कायान्तरण की प्रक्रिया पूरी होने से पहले वे समय पूर्व ज्ञान के अभाव में पूर्ण स्त्री या पूर्ण पुरुष बनने से पहले यौन दुर्घटनाओं का शिकार आसानी से हो सकते हैं ।बलात्कारी स्त्रियों द्वारा बालक और नवयुवक तथा बलात्कारी पुरुषों द्वारा कम उम्र की बालिकाएं और नव युवतियां जो अभी मानसिक और शारीरिक रूप से परिपक्व नहीं हुए हैं वे द्वितीय लैंगिक विकास लक्षणों के समय आयु पूर्व यौनदुर्घटना ग्रस्त हो सकते हैं । अतः बच्चों के युवावस्था में आने पर उनके थायराइड से उत्पन्नऊर्जा स्तर पर ध्यान दें ।आयोडीन की कमी से उनका मानसिक ,शारीरिक विकास रुक जाता है, गड़बड़ हो जाता है, शारीरिक विकास पहले होता है मानसिक विकास बाद में होता रहता है जिसे कहा जाता है समय बाद अकल आना और उससे पहले समय निकल जाना ,सही समय पर सही उपयुक्त उपलब्ध क्षमता से कार्य नहीं करपाना आयोडीन की कमी थायरॉइड समस्या है।
सर्दी में मौसम में सभी भरपेट भरपूर मात्रा में भोजन करते हैं जिससे थायराइड ग्रंथि को उचित आयोडीन मिलती है ।थायराइड ग्रंथि का कार्य सुचारू रूप से चलता है ।सर्दी के मौसम में थायरॉइड सम्बंधित समस्याएं बहुत ही कम मात्रा में पैदा होती है ।गर्मी के मौसम में सभी लोग जाड़ों की तुलना में कम खाना खाते हैं जिससे शरीर को कम आयोडीन मिलती है, थायराइड ग्रंथि में कम थायरोक्सिन हार्मोन बनता है।शरीर का तापमान कम रहती है शरीर में उपलब्ध भोजन की आक्सीकरण /मंद दहन दरकम होने पर शरीर को जरूरी उपलब्ध ऊर्जा में कमी हो जाती है।जिससे थकान ,ऊर्जा हीनता ,कमजोरी जैसी समस्या ज्यादातर उन लोगों को होती है जो भोजन ग्रहण करने के बारे में जागरूक नहीं होते हैं ।अक्सर भूखे रहते हैं सही समय पर भूख के समय भोजन नहीं लेते ,दो समय सुबह शाम को भोजन करते हैं भूल जाते हैं कि दिन में श्रम समय कार्य घंटे बड़ गया है । अतः थायराइड की समस्या उत्पन्न होती है जिसका निदान सही समय पर सही भोजन करने का है।
अब जिसे थायरॉइड समस्या व्याधि /रोग रूप में बन गयी है उनके लिए सलाह है कि वो आयोडिन प्रचुरता युक्त भोजन करें काम न चले तो आयोडीन की गोली डाक्टर की सलाह से खायें । वैसे आयोडीन सम्बंधित समस्याओं के लिये होमयोपैथिक औषधि आयोडम बाजार में उपलब्ध है जिसे होमयोचिकित्सक के निर्देशन में सेवन करें ।यह समस्या मुझे भी है जो आयोडम मदर टिंक्चर के सेवन से नियंत्रित है पहले इसका सेवन में डा०की सलाह पर रोजाना नियमानुसार करता था अब सर्दियों में कमतर और गर्मियों में अक्सर करता हूँ ।परन्तु अब रोजाना नियम बद्ध सेवन नहीं करता हूँ ।
थायरॉइड समस्या अनुवांशिक भी होती है यह स्त्री से उसके पुत्रों में ज्यादा आती है पुत्रियों में कम आती है ।कारण कि ऊर्जा स्रोत की कोशिका इकाई माईट्रोकोन्डिया माता से उसकी संतान में आते हैं ।पिता के माईट्रोकोन्डिया उसके नर युग्मक शुक्राणु की पूँछ में होते हैं जो निषेचन के समय अन्डाणु के अन्दर नहीं घुस पाते । यदि कोई भी नरयुग्मक माईट्रोकोन्डिया अन्डाणु में चला जाता है तो उसे मादा की अन्डाणु कोशिका विजातीय अनावश्यक विदेशी समझ कर उसे फैगोसाईटोसिस प्रक्रम से नष्ट/खत्म कर दिया जाता है। जिससे संतान का ऊर्जा स्तर उसकी माता के ऊर्जा स्तर के अनुसार होता है पिता के ऊर्जा स्तर के अनुसार नहीं होता है। कर्म के प्रभाव से अनुवांशिकता के असर को घटाया /कम किया जा सकता है ।अतः कर्म आयोडीन सेवन पर ध्यान दें और अनुवांशिकता के प्रभाव को देखते हुए उग्र व्यग्र परेशान न हों अपना मानसिक संतुलन बनाये हुए अपने जीवन को शांति से जीयें । रोग प्रभाव के अनुसार आयोडीन गोली /या आयोडम का सेवन करते रहेंं ।डा०/चिकित्सक के निर्देशन अनुसार सार । यह घातक मारक रोग नहीं अभिशप्त रोग है जो आयोडीन सेवन से नियंत्रित है।
No comments:
Post a Comment