मानसिक रोगों के लक्षण क्या है?

मानसिक रोगी के लक्षण :- मनुष्य जो जिस समाज परिवार में रहता है उस समाज परिवार के सदस्यों के सामूहिकता पूर्ण पद्धति से जीवन जीने के परिवार में समाज में कुछ विशेष कुछ सामान्य नियम होते हैं जिनके अनुसार सभी को अपना जीवन जीना पड़ता है ,अर्थात सामाजिक परिवार में सभी को एक समान जैसा सामूहिक व्यवहार करते हुए अपने निजी जीवन को भी सामूहिक सामूदायिक व्यवहार रुप से जीना पड़ता है जिसे परिवार के अनुसार परिवार में ,संस्था के अनुसार संस्था सदस्यों में ,आफिस कार्यालय के अनुसार आफिस में ,जाति धर्म के अनुसार जाति धर्म सदस्यों के बीच में जीना पड़ता है जिसे सामान्य व्यवहार कहा जाता है। जो न्यूनतम ऊर्जा उपयोग से अधिकतम कार्य करने के नियम पर आधारित/निर्भर है ।
लेकिन जब यह नियम/सिद्धांत गड़बड़ा जाता है ।कोई व्यक्ति अपनी अधिकतम मानसिक ऊर्जा का उपयोग करता है और नयूनतम स्तर तक का कार्य नहीं करपाता है । अनियंत्रित अनियमित होकर बोलने बकने बड़बड़ाने लगता है ,एक शब्द एक वाक्य को बार बार दोहराया करता है बड़बड़ करता है ,उसके मन में एक शब्द एक वाक्य बार अपने आप आने लगता है उस शब्द वाक्य की बिना जरूरत के ही वह उस अनावश्यक शब्द वाक्य को बार बार सोचता बोलता लिखता है तो हम कहने लगते हैं कि वह पागल हो गया है उसका अपने दिमाग पर अपना नियंत्रण नहीं रहा है वह अपनी मानसिक ऊर्जा का अपव्यय/फालतू खर्च करते हुए न्यूनतम आवश्यक कार्य को नहीं कर पा रहा है यह मानसिक रोग का लक्षण है जो किसी अनावश्यक कथन /बात के तनाव से उत्पन्न हुआ है । अपने परिवार समाज समुदाय के लोगों से अलग अलग नजर आता है ।अपने परिवार समाज समूह समुदाय के सदस्यों /लोगों को चिढ़ाने छेड़ने लगता है । परिवार समाज समुदाय के नियमों और लोगों के विरोध पर उतर जाता है ,जैसे स्कूल में शिक्षकों के कहे अनुसार न कक्षा में रुकता पढ़ता है ,पढ़ाई से उसकी रुचि हट जाती है और न घर पर अध्ययन ग्रह कार्य करता है विद्यालय के प्रधानाचार्य शिक्षकों का विरोध/पंगेबाज उसकी नियति आदत बन जाती है वह नया वह नहीं सीखना चाहता जो उसे समाज परिवार समुदाय जाति धर्म के लोग समझाना सिखाना चाहते हैं तो तब उसके बारे में कहा जाता है कि उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है उसका इन सबके प्रति प्रतिक्रिया व्यवहार ठीक नहीं है । वह मानसिक रोग की गिरफ्त में आ चुका है । मानसिक रोगों का दायरा सीमा क्षेत्र बहुत बड़ा है ।शिक्षक होने के कारण मैंने इसका शिक्षा क्षेत्र में असफल होने से इसे मानसिक रोगी कहा है ।यदि मैं किषान होता और यह मनुष्य /बालक / छात्र होता और अपने असामान्य असामाजिक तरीकों से मुझे खेती में हानि पहुंचाने का कार्य करता खेती कर्म को सीखने करने बजाए खेती को उजाड़कर नष्ट करने का प्रयास करता तो मैं इसे मनोरोगी में गिनती करता कि इसे अपने भविष्य में भोजनं की चिंता नहीं है ।बरहाल मानसिक रोगी का मतलब है अपनी मानसिक ऊर्जा का अपव्यय करना और अपने दिमाग से अपने लायक अपने हित का अपना ,सामाजिक, परिवारिक कार्य में असफल /असमर्थ होना ।प्रत्येक असफल व्यक्ति अपने क्षमता दक्षता ऊर्जा स्तर के अनुसार कार्य न कर पाने से मनोरोगी कहा जा सकता है।
या कोई अपनी शारीरिक ऊर्जा के मानक स्तर से अति कम या अत्यधिक कार्य करने लगता है ।वह कार्य करने के दौरान नहीं थमता , रुकता , आराम , विश्राम ,करता है।एक ही कार्य को बार बार लगातार करता रहता है । उसे लगातार कार्य करने से प्राकृतिक रूप से थकावट महसूस नहीं होती है और न ही वह अति श्रम के कार्य भार से थकावट के रोग डायबिटीज /मधुमेह से पीड़ित प्रभावित होता है ।उस पर अत्यधिक ऊर्जा आवेश बना रहता है जिसे हम भूत प्रेत बाधा प्रकोप का दूसरा नाम हिस्टीरिया ,मल्टीपल कैरेक्टर डिस्आर्डर आदि अनेकों दूसरे मनोरोगों के नाम देते हैं ।
जैसे वह किसी कार्य को बार बार आदतन अवचेतन मन से करता /दुहराया करता है तो उसे स्जिओंफ्रैनिया आदि नाम देते हैं ।यदि उसे दूसरों को चिढ़ाने मारने पीटने में अच्छा लगता है तो उसे सैडिस्ट मनोरोगी कहते हैं । यदि वह अकारण अनावश्यक रूप से डर सामने न होने पर भी काल्पनिक डर स्वयं बना कर अपने आप अपने से डरता रहता है तो उसे मैसोचित का मनोरोगी कहा जाता है । यदि किसी को छोटे बच्चों को डराने धमकाने मारने पीटने में आनंद आता है तो उसे पीडोफिलिया का मनोरोगी कहा जाता है ।यदि किसी मनुष्य की सैक्स क्षमता सामान्य से अधिक बढ़ जाती है वह असामान्य रूप से अधिक योनिज कर्म व्यवहार करने लगता है कि स्त्रियां उसकी अति यौनक्षमता से परेशान दुखी होकर तलाक पर आजाती है उसकी स्त्रियों से तृप्ती नहीं होती है तो ऐसे में उस पुरुष को सैटैराईसिस मनोरोगी कहा जाता है। यदि किसी स्त्री की सैक्स क्षमता सामान्य रूप से अधिक बढ़ जाती है और उसका हर समय सैक्स करने को मन करता रहता है उसका न सैक्स से मन भरता है न अनेक पुरुषों से निरंतर सैक्स करते रहने पर तृप्त नहीं होती है किलीयोपैट्रा की तरह तो उस स्त्री को निम्फोमैनिक मनोरोग हो जाता है , एक औरत को एक अजीब मनोरोग इस बात को लेकर हो गया था कि उसने हनीमून मनाने की रात को ही अपने पति को सैक्स गेम खेलने में कंट्रोल /नियंत्रित करना शुरू कर दिया उसके पति को उसकी यह बात असहनीय / नाग्वार गुजरी उसने उसे बदचलनी का आरोप लगाकर उससे तलाक /संबंध विच्छेद की चर्चा शुरू कर दी जिससे वह पहले तो डिप्रेशन में आ गई फिर पागल हो गई अब वह बार बार अस्पताल में इस बात का शोर मचाती रहती है मुझे तलाक नहीं चाहिए मैं तुझे तलाक नहीं दूँगी ।संक्षेप में मैंने कुछ मनोरोगों का परिचय लिख दिया है ।अब यदि किसी को विस्तार में मनोरोगों को जानने की इच्छा है तो नैट पर विकीपीडिया में मनोरोगों के बारे में विस्तार से पढ़ें या गूगल पर सर्च करें /देखें ।
इस प्रकार से अनेकों मनोरोगों के नाम हैं जिन सबका यहाँ पर चर्चा करना मेरे लिए संभव नहीं है क्योंकि मै मनोरोग चिकित्सक नहीं हूँ ।यदि किसी को मनोरोगों के बारे में विस्तार से जानने की इच्छा है तो उसे मनोरोग अस्पताल में जाकर मनोरोगियों को देखना होगा और मनो चिकित्सकों से मिलकर इस विषय पर अधिकतम जानकारी मिलेगी । वैसे भारत मैं मनोरोगियों के प्रसिद्ध अस्पताल पूर्वी दिल्ली में GTVअस्पताल के पास मानव व्यवहार संस्थान है ।और अन्य दूसरे मनोरोगियों केप्रसिद्ध अस्पताल उ० प्र० आगरा में ,दूसरा राँची बिहार छत्तीसगढ़ में है ।

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