जब जीवन में समस्याओं की संख्या/मात्रा कम होगी और आपने सत्य दर्शन के सिद्धांत ज्ञात कर करके सत्य सत्ता के साथ ईमानदारी से जीवन जीना शुरू कर दिया तो आपके सामने समस्याएंं कम से कम आयेंगी और जीवन में संतुष्टि आप आयेगी ।जीवन में संतुष्टि के लिए किसी गुरु मंत्र की जरूरत नहीं है न विशेष योग्यता ज्ञान की जरूरत है । संतुष्ट जीवन जीना यह एक सत्य ज्ञा न से पूरित होकर स्वतंत्र रूप से जीवन जीने की मानव की मौलिक/स्वभाविक पद्धति है । संतुष्ट और प्रसन्न रहना मनुष्य का प्राकृतिक/मौलिक स्वभाव है वह दुखी तब होता है जब अपने जीवन को दूसरों की इच्छाओं के अनुसार जीने का प्रयत्न करता है ।यदि आप संतुष्ट प्रसन्न होकर अपना जीवन जीना चाहते हैं तो सबसे पहले आत्मविशलेषण करना सीखें फिर उन इच्छाओं/विचारों की खुद पहचान करें जौ आपने दूसरों से माता, पिता, गुरु ,पड़ौसियों ,मित्रों से लिए /सीखे /ग्रहण किए ,।
उसके बाद उन दूसरों विचारों पर आधारित लक्ष्य को पहचानें फिर अपनी मानसिक शारीरिक क्षमता दक्षता और अपने ऊर्जा स्तर का स्वयं मूल्यांकन करें , कि क्या आप अपने जीवन के लिए अपने निर्धारित लक्ष्य के अनुसार तैयारी करते हुए दूसरों के अनुसार अपना जीवन जी रहे हैं । या ःःअपनी शारीरिक मानसिक क्षमता दक्षता और ऊर्जा स्तर को जाने बिना दूसरों से माता पिता गुरु आदि के विचारों से प्रभावित होकर उनके अनुसार , अपना जीवन लक्ष्य निर्धारित करते हुए अपना जीवन जीने का प्रयास कर रहे हैं । जिसमें आपको अपने मौलिक स्तर से ज्यादा क्षमता दक्षता ऊर्जा स्तर की आवश्यकता होगी । आप अपनी क्षमता दक्षता ऊर्जा स्तर को सीमा से आगे नहीं बढ़ा सकते ।ऐसे में आप दूसरों के द्वारा निर्धारित लक्ष्य को पूरा नहीं कर सकते, ऐसे में आपको दूसरों के विचारों पर आधारित लक्ष्य पूरा नहीं होने पर असंतुष्टता अनुभव होगा । मानसिक कलेश / अकारण दुख उत्पन्न होगा ।। जीवन भर असंतुष्ट दुखी अनुभव करोंगे ।।
यदि आप अपने जीवन को अपने विचारोँ के अनुसार अपनी शारीरिक मानसिक क्षमता दक्षता ऊर्जा स्तर के अनुसार जिओगे आपको अपनी सीमाओं का ज्ञान / बोध अहसास रहेगा और आप अपने में अपना जीवन संतुष्ट होकर जिओगे । ।
जीवन जीने में बाधा उत्पन्न करने वाली समस्याओं में से समस्याओं को गणित को समझो ०,+ , - , × , ÷, फिर समस्याओं का वर्गीकरण करो ० शून्य समस्याएं ( जीवन भर ज्यों की त्यों परिणाम हीन आदि से अन्त तक रुकी हुई रहती हैं जैसे प्राकृतिक सामाजिक समस्याए ) ,+ I've समस्या (इन समस्या औओं का हल अपने हाथ में है ) , — समस्या ( इन समस्याओं के उत्पादन कर्ता बलवान बुद्धिमान धनवान दुष्कर्मा महाजन लोग होते हैं उनकी कृपा दृष्टि होने पर ही इन समस्याओं का हल संभव है ) , × गुणात्मक समस्या ( एक समस्या हल होने पर दूसरी अनेक समस्याएं पैदा हो जाती हैं समस्या सुलझाने की कला में फेल सिद्ध ,एक समस्या से अनेक समस्याएं उत्पन्न होजाती हैं ) ÷ भागांश समस्याएं ( परिवारिक समस्याओं में से अपने हिस्से में आंशिक तौर पर समस्याएं आना ) प्रभावी समस्या (चिंता उत्पन्न करने वाली ) , अप्रभावी समस्या ( फालतू की समस्याएं जिनमें हम अपनी गोरखधंधे में उलझने की आदत से पकड़ कर बिना वजह दूसरों से सुनकर चिंतित/दुखी होते हैं ) ,अंकीय लाभदायक समस्या हानिकारक समस्या ।
इनमें से जो शून्य०समस्याएं हैं राष्ट्रीय समस्या जिनका हल आपके वश में नहीं ,जिनको हल करनेवाले राष्ट्रीय स्तर पर के नेता विद्यमान हैं उनको मत सुनो ,मत चर्चा चरचरा करो उनको लेकर दुखी मत हो —आपका 50% समस्या जनित तनाव समाप्त । अब जो — ive समस्याएं हैं जिनका हल आपके हाथ में नहीं आपके बलवान शत्रुओं के हाथों में है/ प्रकृति के हाथ में है ,उन — समस्याओं पर ध्यान मत दो जिनको हल करने की सोचते ही आपके शत्रु अपनी हानि के भय से आप पर प्रहार /वार करके आपका हुलिया बिगाड़ दे आपको भयंकर घातक हानि देकर आपके सामने आपके जीवन विकल्प बंद कर दे ,आपकी लाईफलाईन ब्लॉक करके आपके सामने जीवन जीने में समस्या पैदा कर दे जैसे कि आप अदालत में हार जायं ,जेल जायं , बड़ी धनराशि का हर्जाना/जुर्माना देना पड़े कि आप दिवालिया हो जांय । ऐसी — समस्याएं जो बलवान दुश्मनों के द्वारा उत्पन्न की जाती हैं वह 25% होते हैं अतः इन —ive 25% समस्याओं पर नजर रखो इनके प्रति जागरूक रहो इनकी अनदेखी/बेगौरी मत करो ,ऐसे बलवान शत्रुओं से बचकर दूर रहो लेकिन बलवान शत्रुओं को मत छेड़ो और इन 25% समस्याओं से बचकर दूर रहो आपकी 50 %+ 25 % = 75% समस्याओं से राहत हुई ।
अब बचीं +ive समस्याएं जिनका हल आपके हाथ में है जैसे परीक्षा में पास/उत्तीर्ण होने के लिए मेहनत करना , जीवन जीने के लिए आवश्यक धन व्यवस्था करना ,जाँब करना ,व्यापार करना , रोगी को डाक्टर को दिखाकर रोग की औषधि चिकित्सा व्यवस्था करना , शादी विवाह का प्रबंधन, खाना जुटाने की व्यवस्था करना आदि ये सभी आपकी नैतिक जैविक जिम्मेदारी हैं यदि आप जीवन को जीना चाहते हैं तो ये सब तो करना ही पड़ेगा ।
किसी भी बड़ी समस्या को छोटा करने का आसान तरीका है ,समस्या दायी व्यक्ति के प्रभाव को छोटा करने के लिए अपने प्रभाव क्षेत्र को बढ़ावा देना । धनी महाजन राजनीतिक बड़ा व्यक्ति बड़ी समस्याएं पैदा करता है और निर्धन गरीब छोटी समस्याओं को पैदा करता है ।अतः समस्या निदान के लिए कभी भी धनी व्यक्ति महाजन, राजनीतिक, अपराधी प्रवृत्ति के व्यक्ति से न उलझें तो अच्छा उलझना पड़ जाय तो जागरूक रहें ।
लड़ाई झगड़े मारधाड़ खून खराबे के दृश्यों को न देखें न इन की चर्चा चरचरा करें अपराधी साहित्य डरावनी हार्रर फिल्मों से बचें , जीवन में शान्ति शकून ज्यादा है अशांति उपद्रव तो हम निजी समस्याओं से कम ,बाह्य संसाधनों जैसे लड़ाई झगड़े में रुचि लेने से, मारकाट खून खराबे के दृश्य देखने से ,फिल्मो से चर्चा से खुद लेते हैं ।
स्टीफन कवि और डेलकारनेगी , जोसेफ मर्फी , नारमन पील के साहित्य का मन से अध्ययन करें ।जब भी मन में अशांति महसूस हो 1000 रुपयों में सभी की पुस्तकें आजायेंगी ,या फिर नैट पर से इन पुस्तकों को डाउनलोड कर फुरसत के समय अध्ययन करके अपनी माइन्ड सैटिंग आप करें ।
No comments:
Post a Comment