IQ inteligente quoi sent बुद्धि उपलब्धि बचपन से लेकर मरने तक एक समान रहता है ।शारीरिक आयु /मानसिक आयु /लेकिन अब इसमें एक शब्द सैक्स आयु और जुड़ गया है ।इस तरह से प्रत्येक प्राणी का जीवन I Q तीन मुख्य ऊर्जा केन्द्रों 1 मानसिक ऊर्जा ,2 शरीर/पेशियों की ऊर्जा ,3 यौन ऊर्जा पर निर्भर करता है ।तापीय दिशानिर्देशन नियम के अनुसार विश्व की कुल ऊर्जा नियत व स्थिर है । अतः प्रत्येक पिंड को सजीव ह या निर्जीव सभी को उसके जन्म/निर्माण से लेकर मरण /विनाश तक एक निश्चितसीमित ऊर्जा निर्धारित होती है कोटा नियम के अनुसार ।
ऐसे में लोग जो दूसरों के जीवन को बदलने की वकालत करते हैं वे समझदार धूर्त धोकेबाज मक्कार है जो दिन में दूसरों को सपने दिखाने की कला ब्रैनवाश से आँखों के होते अंधा कानोंके होते बहरा जीभ के होते गूंगा करना जानते हैं , बाजीगर/जादूकर की तरह । मूर्ख वे हैं जो अपने ब्रैनवाश के बाद दूसरों के कहे में आकर दिन में सपने देखने लग जाते हैं बिना अपनी क्षमता ,दक्षता, ऊर्जा स्तर को खुद जाने समझे बिना । कि प्रत्येक जीव की एक निश्चित निर्धारित क्षमता दक्षता ऊर्जा स्तर होता है जैसे सभी चीते 160 किलोमीटर/प्रति घन्टा नहीं दौड़ते कुछ 180 से आगे दौड़ते हुए बाघ और सिंह के हाथ नहीं आ पाते आजीवन जीवित रहते हैं तो कुछ की क्षमता160 से कम रह जाने पर सिंह और बाध के हाथों अकाल मौत मारे जाते हैं ।
अब आप सैकड़ों क्या लाख करोड़ों वीडियो आडियो दिखाये /सुनाये यदि आपको ब्रैन मैमोरी डिलीट सिस्टम का ज्ञान है कि सभी जीवों का दिमाग 3 मुख्य 5 लगभग ऊर्जा स्तर पर कार्य करता है चेतन ,अचेतन, अवचेतन, तुर्या ,तुर्यातीत मानसिक अवस्था । चेतन स्तर पर दैनिक सक्रिय मैमौरी से जीव जीते हैं अचेतन स्तर पर बिना मैमौरी के निद्रा में और अवचेतन स्तर पर भ्रमित मैमौरी से स्वप्न, दिवा स्वप्न ,बिना स्वप्न निद्रा पूर्व में रहते हैं ।तुर्या और तुर्यातीत अवस्था असाधारण असामान्य अतिइन्द्रिय लोगों की सुपरचेतन मानसिक अवस्था होती है जो कुछ लोगों को जन्म जात अनुवांशिक होती है तो कुछ को कुंडलीनी विद्या द्वारा विशेष योगक्रिया साधना उपासना के द्वारा प्राप्त होती है।तो कुछ को कठिन मानसिक परिश्रम द्वारा अनुसंधान अनवेषण विधा द्वारा स्वयं सिद्ध होजाती है जैसे विशेष साधुसंन्यासी (तटस्थ मानसिक अवस्था में) वैज्ञानिक ज्योतिषीओं को । वैसे अभी तक अवचेतन, सुपरचेतन के बारे में लोगों को में सही सही स्पष्ट रूप से विधिवत पूरी जानकारी नहीं है । इस बारे में जो भी ज्ञान/जानकारी है वह भ्रामक है विधिवत वैधानिक वैज्ञानिक आधार पर परिक्षित नहीं है । अवचेतन मन पैदा होने से लेकर मरने तक 24 घंटे सक्रिय रहता है यह सोई हुई अवस्था में भी शरीर रक्षा करता है । जिससे सोया हुआ जीव भी स्पर्श ताप संवेदना, आघात/चोट संवेदना सोईहुई अवस्था में भी अनुभव करते हुए तुरंत जागकर अपनी रक्ष कर लेता है . इस तरह से अवचेतन मन की सक्रियता के अनुसार मनुष्य का जीवन और उसकी प्रगति/उन्नति तय होती है ।यह अवचेतन मन मरने के बाद भी नहीं मरता है ब्ल्कि जन्म की विशेष पूर्व आवश्यक स्मृतियों का विशलेषण करके आवश्यक मैमौरी/स्मृति को पूरा करने के लिए बिना शरीर के सुरक्षित स्थान पर विश्राम/दीर्घ निद्रा मोक्ष अवस्था में समय व्यतीत किया करता है फिर उचित अवसर पर समय मिलते ही आवश्यक दम्पति पर नजर रखता है और उचित समय पर उनके घर जन्म ले लिया करता है ।जिसके अनुसार अधिक स्मृतिओंयुक्त क्षमता वाला बुद्धिमान बालक फुर्तीला जन्मते समय ज्यादा शोर मचाया करता है, ऊर्जा स्तर अधिक होने पर ।कम स्मृतियों वाला जन्मते समय कम बुद्धिमान कम फुर्तीला कम शोर मचाया करता है कम ऊर्जा स्तर होने पर ।
अतः स्मृतियों की कथासंग्रह संख्या के परिमाण के अनुसार बालक की मानसिक शारीरिक सक्रियता होती है ।और अधिक स्मृति कथासंग्रह के अनुसार व्यवहार को अनुभव /ज्ञान कहते हैं ।स्मृति संचित ज्ञान के आधार पर कोई थोड़े समय में बिना फेल हुए अधिकतम ज्ञान हासिल करके बुद्धिमान कहा जाता है, तो कोई फैल होने पर मूर्ख अज्ञान कहाया जाता है जबकि शिक्षक /गुरु तो सभी को एक समान पढ़ाते हैं । कोई थोड़ा सा पढ़कर मार्क जुकरबर्ग, कोई बिलगेट्स, कोई कारनेगी बनकर थोड़ी आयु में अकूत /विशाल धनी बन कर प्रसिद्ध हो जाता है । तो किसी को तन तोड़ मेहनत करते रहने पर अपने परिवार का पालन पोषण भी ठीक से नाम हो पाता है ।यह सब क्या क्यों ??? है कि जब सभी मनुष्य हैं बराबर है सब सभी कार्य करने में समर्थ हैं तो फिर सबकी क्षमता योज्ञ्यता ऊर्जा स्तर अलग अलग क्यों हैं? सब में बुद्धि समान बराबर है तो सभीIAS,IPS,IFS डा०,इन्जीनियर, प्रोफेसर, क्यों नहीं बन जाते हैं ?क्यों फेल हो जाते हैं साधारण सी पाठ्यक्रम परीक्षा में ।कुछ तो अन्तर भेद का कारण होगा ःःऔर वह है मानव मस्तिष्क में मैमौरी कार्ड और उसका सही तरह से उपयोग और उपयोग कर्ता की शारीरिक मानसिक क्षमता दक्षता ऊर्जास्तर स्थिति ।
यदि ज्ञानी मनुष्यों के आडियो, वीडियो, कथा प्रवचन के समान रूप से सुनने देखने दुनिया में लोग ज्ञानी हो जाते : तो दुनिया में कोई अज्ञानी मूर्ख नहीं होता । यदि ज्ञान दुकानों पर बिकता आडियो, विडिओ, कथा सरित सागर साहित्य के रुप में तो कोई भी धरती पर मूर्ख नहीं होता ।यदि समस्त स्मृतियाँ सुरक्षित लहतीं तो मनुष्य मस्तिष्क फटकर छटे वर्ष से ग्यारह वर्ष तक में मर गया होता सोचा है कभी कि 1 - 11 वर्ष तक दिमाग में कितनी स्मृति फिल्म चढ़ जाती हैं यदि उनमें से एक भी डिलीट न हो तो दिमाग /थक/हैक /किंकर्तव्यविमूढ़ /गरम हो जाता ह ;- कि अब क्या कैसे कब करुं ? और उसे जरूरत पड़ती है थकान उतारने के लिए /गरम दिमाग को ठंडा करने के लिए आराम /विश्राम की ।विश्राम करने/सोने के बाद दिमाग अतिरिक्त./एक्सट्रा स्मृति/मैमौरी को ओटोडिलीट सिस्टम से जंक फाईलों को डिलीट करके साफ करके पुनः उपयोग करने योग्य बनाता रहता है ।जिन लोगों के दिमाग का डिलीटिंग सिस्टम खराब हो जाता है वे स्मृतियों के भार से बोझिल होकर पागल या मनोरोगी हो जाते हैं । जिससे उनकी मानसिक शारीरिक क्षमता दक्षता खराब हो जाती है और वे सब कुछ जानते हुए समर्थ होने पर भी अच्छा उचित प्रदर्शन नहीं कर पाते हैं , फेल हो जाते हैं । क्योंकि वे पदेन कार्य श्रेणी की आवश्यकता के अनुसार अपना क्षमता, दक्षता, ऊर्जा स्तर का प्रदर्शन/उपयोग नहीं कर सकते हैं ःः इसे मोबाइल फोन और कम्प्यूटर की कार्य पद्धति से समझ सकते हैं आप ।
आपने कभी अपने पिताजी के बारे में सोचा है कि आपके पिताजी आपसे क्या महत्वाकांक्षा रखते थे ?क्या आप अपने पिताजी की मानक महत्वाकांक्षाओं पर 100% सही उतरे ।मुझे पता है आपके पिताजी आपको राष्ट्रपति बनाना चाहते थे ( मेरा बेटा /बेटी राजा बनेगा )यह उनकी पहली और आखिरी इच्छा /प्रण थी । तो आप राष्ट्रपति क्यों नहीं बने ?क्योंकि आपकी भी कुछ सीमाएं/कुछ विवशताएं थींं कि आप आज की तारीख में राष्ट्रपति नहीं बन पाये
आप कुछ अक्षर ज्ञान मात्र प्राप्त करते ही ,आप तो मानव जाति के बच्चों का बचपन छीनने/समाप्त करने की सोच रखने लगे । स्मरण रहे मेरा फुफेरा भाई लैक्चरार नियुक्त होते ही आपके जैसे दंभी सवाल जबाब करता था उसकी सारी मेधावी प्रज्ञा की हैकड़ी निकल गई जब उसका बड़ा बेटा उसकी महत्वाकांक्षा की बलि चढ़ गया ।उसके बाद उसने अपने ज्ञान मेधा प्रज्ञा को अपने छोटे बच्चों पर नहीं दिखाया , छोटे बड़े सभी बच्चों पर , घर में स्कूल में पढ़ाई के लिए मारना पीटना चीखना चिल्लाना बंद कर दिया।
अतः आपको मेरा यह सुझाव है कि ऐसे दंभी ,अष्टावक्रीय प्रशनों से बच्चों बड़ों का बचपन मत छीनने की कोशिश करो ।सोचो आप भी कभी बच्चे थे तब आपको भी अपनी महत्वाकांक्षा की पूर्ति के लिए पिताजी और गुरूजी के हाथों पिटना कैसा महसूस होता था ।जब आप बच्चे थे ;
कृपया नैट पर मनोविज्ञान के अन्दर से स्मृतियों के बारे में ,और मानव मस्तिष्क की संरचना और कार्य विधि के बारे में स्वयं अध्ययन करें । आपको संतोष जनक जबाब जब मिल जाये तो उसकी पी.डी.एफ. बनाकर मुझे भेजना ।
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