असली गरीबी कैसी होती है?



असली गरीबी मानसिक होती है ।आर्थिक गरीबी गरीबी नहीं होती है ।जो लोग मानसिक रूप से गरीब नहीं थे वे गरीबी में पैदा जरूर हुए लेकिन पैदा होने के बाद उन्होंने अमीरों के विचार संस्कार जैसे विद्वानों का सम्मान, ज्ञान स्रोत उत्तम राजनीतिक, धार्मिक पुस्तकों का संचय ज्ञान चर्चा आदि उत्तम गुण अपनाने शुरू कर दिए जिससे वे गरीबी में पैदा होने के बाद गरीब नहीं रहे । मरने से पहले वे गरीब नहीं थे उन्होंने गरीबी का निदान/समाधान कर दिया था ।वे असल में मानसिक गरीब नहीं थे ,असली गरीब नहीं थे ।आज अब भी इनकी संतान संतति गरीब नहीं है ।
लेकिन जो लोग अमीरी में पैदा हुए और मरते समय गरीब थे । वे पैदा होने के बाद में मानसिक रूप से गरीब हो गये । क्योंकि वे पैदा होने के बाद अपने पूर्व जन्म के संस्कार वश /या गरीब लोगों के सानिध्य में रहने से गरीबों की सोच और आदत अपनाते गए जैसे विद्वानों का अपमान, मित्रों संबंधियों सेवकों का तिस्कार , ज्ञान स्रोत उत्तम राजनीतिक धार्मिक पुस्तकों का अपमान, ज्ञान चर्चा और ज्ञान स्रोत उत्तम पुस्तकों से बचना विद्वानों से बचना ,उनकी निंदा करना, दिन में सोना रात में जगना प्रातःकाल सांयकाल सोना ,सदैब कठोर कंटकारी वचन बोलना .अतिनिद्रा आलस्य लक्ष्य भ्रमित और जागरूकता न अपनाने जैसे पशुसमान आचरण हिंसा अपनाने आदि अमानवीय व्यवहार करते हुए धन के होते हुए मानसिक रूप से गरीब हो गए ।
उनके मन में से दया, कृपालुता ,परिवार, समाज, जातिहित, प्राणी हित सेवक हित के विचार ,सहकार ,निर्माण, भ्रमण, दूसरों की सोच विचार को समझने का प्रयास जैसे बड़ेआदमियों /महामानवों के गुण मौलिक ईश्वरीय गुण निकलते गये और उनमे क्रूरता, कृत्ग्यनिघ्नता (दूसरों की अवहेलना आलोचना निंदा घृणा करना दूसरों के उपकार को स्वीकार नहीं करना ), परिवार समाज जाति अहित सिर्फ अपना हित स्वार्थीपन ,प्राणी सेवक हित के स्थान पर निष्ठुरता अपनी मौज मजा ,सहकार के स्थान पर अहंकार,निर्माण के स्थान पर विनाश, भ्रमण के स्थान पर जगसार घरद्वार, दूसरों की सोच विचार बंद ,सबको मजबूर करना कि वो उनके अपने स्वार्थ के लिए सोचें परंस्वार्थीपन कनिंग ,धूर्तता पूर्ण गरीबों के विचार अपनाते गये । नतीजा उनके अपने भी उनसे दूर होते चले गए वे अकेले पड़ते चले गए उनके हितकारी शुभ चिंतक उनसे दूर होते चले गए परिणाम यह हुआ कि वो अमीरीमें पैदा जरूर हुए लेकिन मानसिक रूप से गरीबों के विचार अपनालेने से मरने से पहले ही गरीब हो गए । वे ही असली गरीब थै /हैं ।आज और अब तक इनकी संतान संतति गरीबी में जीवन यापन कर रही है ।

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