शादी के बाद भी लोग एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर क्यों रखते हैं ? क्या ये जायज़ है?

यदि पत्नी ढंग की पति के इच्छाओं के अनुसार आचरण व्यवहार करने वाली दर्शनीय नहीं होगी , तो ऐसे में उसके पति की दूसरी महिलाओं में रुचि होना स्वाभाविक प्रक्रिया है जो आजीवन चलती रहती है ।ऐसा विचित्र आचरण व्यवहार महिलाएं भी करती रहती हैं ।दोनों ही स्त्री/पुरुष ऐसा विचित्र आचरण व्यवहार छिपकर एक दूसरे की नजरों से बचते हुए करते रहते हैं इसे यौन अभिरुचि, यौन द्रष्टिकोण कहते हैं जिसके अन्तर्गत महिला अपने पति के अलावा अन्य पुरुष से प्रसन्नता पूर्व मिलती है ।और पति के सामने आते ही जूड़ी बुखार जैसे भय से चेहरे पर पीलापन आ जाता है चेहरे की रंगत लाली उतर जाती है ।पुरुष इसके विपरीत प्रतिक्रिया देते हैं वे अपनी मन पसंदीदा महिला के सामने आने पर उससे प्रसन्नता पूर्वक मिलते हैं लेकिन अप्रिय पत्नी के सामने आते ही गुसिया जाते हैं और चिढ़कर अपनी पत्नी से हिंसात्मक व्यवहार करने लगते हैं ।यह जीवन भर चलने की शास्वत प्रक्रिया है ।
इसका कारण है मनुष्य का स्यूडो कैनाबोलिक /स्वजातीय मित्थ्या भक्ष्ण प्रवृत्ति ।जिसके अन्तर्गत महिला अपने पुरुष पार्टनर को ऊपरि मुख से चुम्बन काटन से और दूसरे अधो /निम्न मुख लिंगिय योनि से उसके शरीर अंश वीर्य को मित्थ्या रुप से भक्ष्ण का प्रयास करती है,लिंगिय भक्ष्ण द्वारा ।ऐसा ही कृत्य कर्म पुरुष भी करता है । यदि स्त्री का उसका पुरुष पार्टनर उसकी इच्छाओं के अनुसार नहीं है उसे अपनी पत्नी के मानवीय स्वभाव , व्यवहार की समझ नहीं है । पुरुष को स्त्री भाव स्वभाव भंगिमाओं की समझ नहीं है ।स्त्री को पुरुष का /पुरुष को स्त्री का शरीर का रंग , रुप , शरीर गंध ,यौन क्रिया कर्म निर्थक अप्रिय बेस्वाद है. जिससे वह पुरुष अपनी पत्नी से और वह स्त्री अपने पुरुष पार्टनर से अतृप्त रहती/ता है,चिढ़़चिढ़ी रहती / ता है । तो वह अपने जीवन का परमानन्द/यौनानंद का स्वाद दूसरे पुरुष पार्टनर में प्रियतम पुरुष में ढूंढने का प्रयास जीवन भर करती रहती है ।ऐसा ही विचित्र आचरण व्यवहार वे पुरुष भी करते हैं जिनकी पत्नी/स्त्री को पुरुषों के स्वभाव व्यवहार मानसिकता यौनावश्यकता की समझ नहीं होती है वे शीघ्र ही दुर्भगा होकर अपने पति की नजर से उतर जातीहैं। या वे जिन पुरुषों की पत्नी मनोरमा नहीं होती है ।वे अतृप्त पुरुष अपनी अप्रिय पत्नी को छोड़ दूसरी मनोरमा स्त्रियों की तलाश में रहते हैं जैसे ही उन्हें मनोरमा देवी /मेनका वर्णा / मनप्रीत मुख मंडल वालियों के दर्शन हो जाते हैं ।वे मनोरमा /मेनका की पूजा ( सौंदर्य वर्णन ) उपासना (पाने की इच्छा ) में खोते हुए अपनी पत्नी को बच्चों को परिवार को भूल जाते हैं ।
यदि वे पढ़े लिखे शिक्षित ज्ञानी हैं तो चोरी चोरी चुपके चुपके परिवार समाज की नजरों से छिपकर अवैध/गुप्त रूप से मनोरमाओं से यौनानंद प्राप्ति करते हुए अपना जीवन व्यतीत करते रहते हैं अभिसार कर्म से । अधिकतर HIV & STD रोग इन्हीं मनोरमाओं से अभिसारकों लगते हैं :—अभिसारिकाऔर अभिसारक स्त्री /पुरुषों को कहते हैं अनियंत्रित यौनसंबंधों के दौरान कारण कि इसमें स्त्री को पुरुषों की उपलब्धि उचित समय पर उपलब्ध नहीं होती है ।
इसमें स्त्री अभिसारिका कही जाती है पुरुष अभिसारक कहा जाता है ।यदि वे दोनों अभिसारक और अभिसारिका पढ़े लिखे शिक्षित हैं लेकिन ज्ञानी नहीं हैं समाज परिवार को धोखा देकर देपा रहे हैं ऐसे में वे पकड़े जाने पर मार अपराध के डर से एक दूसरे को तलाक /संबंध विच्छेद करके अपने मन प्रिय जीवन साथी के साथ पुनर्विवाह /दूसरा विवाद करके रहने लगते हैं । लेकिन यदि वे दोनों अतृप्त आत्माएं ज्ञान के अभाव में अवैध अभिसार करती हुई पकड़ी जाती हैं तो मौके पर ही दोनों अतृप्त स्त्री पुरुषों की कुटाई पिटाई होती है या फिर उन दोनों को या उन में से एक को ब्लैकमेल किया जाता है/होना पड़ता है ।
ऐसे अतृप्त स्त्री/पुरुष शादी के बाद भी अपने प्रिय पार्टनर की तलाश करते हुए आजीवन अपने अप्रिय पार्टनर की अनदेखी, अनसुनी करते हुए निरंतर प्रिय पार्टनर की तलाश में रंगीन पर्दे पर नाटक, ड्रामा में अपने प्रिय पात्र को काल्पनिक रुप देखते सुनते हुए चित्र पट /फिल्मी पर्दा हो या वास्तविक जीवन भर , प्रिय दर्शन, प्रिय श्रृवण की आशा में अपना जीवन जीते हैं /अपनी मन को झूँठी तसल्ली देते हुए अपना जीवन जीते हैं काश मेरी बीवी /मेरा पति ऐसा होता तो कितना अच्छा लगता।
जैसे ही यदि किसी को कोई मनचाहा पार्टनर शादी के बाद मिल जाता है वे उससे चिपक जाते हैं या चिपकने का प्रयास करते हैं ।जिसे शादी के बाद अवैध संबंध के रूप में जाना./समझा जाता है ।ऐसे अवैध संबंध के प्रति प्रत्येक शादी शुदा को जागरूक होना चाहिए ।और ऐसे अवैध संबंध को हर हाल में रोकने/तोड़ने /तुड़वाने का प्रयास करना चाहिए क्योंकि इन अवैध संबंध का अन्त परिणाम घातक/खतरनाक होता है ।परिवार बरबाद हो जाता है सामाजिक मान प्रतिष्ठा संबंध सब खराब हो जाते हैं ।यहाँ तक कि दबंग पार्टनर अपने पार्टनर की अवसर पाते ही हत्या कर देता है । हत्याकांड रच जाते हैं ।निर्दोष निरीह बच्चे अकारण बेमौत मारे जाते हैं ।
अतः मुँह का स्वाद चोरी करवाता है , यौनांग का स्वाद चकोरी की लत /दूसरों को , सुन्दर सुन्दरियों को अकारण निहारना /अपना काम और जीवन खराब करना सिखाया करता है ।अतः अपनी भावनाओं को कामनाओं को नियंत्रण में रखते हुए जीवन जीना समझदारी है सुन्दर तो सिंह /सिंहनी : नाग /नागिन भी होते हैं किन्तु उनका दर्शन ,स्पर्श घातक नहीं मारक होता है ।अतः सुन्दर/सुन्दरियों के चक्कर में अपना जीवन न खराब/समस्या ग्रस्त न करें।संतोषी सदाँ सुखी ःःशादी के बाद एकट्रा मैरीटल एफेयर जायज नहीं नाजायज/अवैध है जिससे HIV,&STD आसानी से और तेजी से समाज में परिवार में फैल रहे हैं ।बच्चे HIV के बढ़ते संक्रमण से अकाल में अनाथ और बिना यौनानंद के यौनानंद की सजा भोगने को विवश हो रहे हैं ।
अतः ऐसा मजा किस काम का जो मजा कम सजा ज्यादा है ।सोच संभलकर अपने जीवन को जीएं | 

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