मोबाइल की वजह से युवाओं की खोपड़ी में निकल रहे हैं सींग, नई रिसर्च में हुआ खुलासा आखिर ये कितना सच है ?



सींग झगड़े का सूचक है : अक्सर सींग का उपयोग मनुष्य की हिंसात्मक प्रवृत्तियों को दिखाने के लिए मनुष्य के सिर पर लगाकर मनुष्य के राक्षस लड़ाकू स्वभाव को दिखाया जाता है ।
आज और अब जो युवा मोबाइल पर व्यस्त है वह किसी से बात करना पसंद नहीं करता, किसी की बात का उत्तर नहीं देता है कोई भी सही उद्दीपन की सही प्रतिक्रिया नहीं व्यक्त करता है यदि उससे कोई बात पूछी जाय तो वह उसका उत्तर एक शब्द या एक वाक्य में जल्दी से देकर अपने मोबाइल पर फर से व्यस्त हो जाता है ।युवा मोबाइल हाथ में होने पर समाज परिवार से दूर रहने का प्रयास करते हैं मोबाइल पर व्यस्त युवा से यदि कोई अपनी बात का संतोष जनक उत्तर, थोड़ा सा अधिक समय वाला अधिक समय वाला चाहता है तो मोबाइल प्रयोग कर्ता उस प्रश्न कर्ता से लड़ाई झगड़े पर उतर आता है अपनी सींगिया प्रतिमा /राक्षस प्रतिमा मुद्रा में आकर ,पहले क्रोधित होकर फुंकार ने लगता है फिर दंकाड़ने लगता है सींगिया पशु साँड की तरह इतने पर भी यदि प्रश्न कर्ता नहीं रुका तो मोबाइल उपयोग कर्ता साँड की तरह प्रश्न कर्ता पर हमला कर दिया करता है /मारपीट करने लगता है ।
इस असभ्य मानवीय संवेदनाहीन व्यवहार का प्रश्न कर्ता ने मोबाइल प्रयोग कर्ता का मानवीय मानसिक साहित्यिक चित्रण प्रश्न किया है कि मोबाइल उपयोग करने वालों के सिर पर सींग उग आये हैं जबकि प्रत्यक्ष व्यवहार में उनके सिर पर कैराटिन इनमेल्ड वास्तविक साँड जैसे सींग नहीं उगे हैं उन मोबाइल प्रयोग कर्ताओं का व्यवहार मानवीय न होकर पशु साँड के समान दूसरों को अकारण मारपीट करने वाला हो गया है ।
यह रिसर्च नहीं ब्ल्कि आधुनिक सुसभ्य मानव का विकृत राक्षस व्यवहार करनेवाला साहित्यिक पशुवीय (साँड की तरह असभ्य व्यवहार करनेवाला ) शब्द लेखन कलात्मक अभिरुचि चित्रण किया गया है प्रश्न के द्वारा ।

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