सामान्य काम करते वक्त भी किसी के हाथ कांपते प्रतीत होते हैं इसकी क्या वजह होती है?

यदि सामान्यकाम करते वक्त भी हाथ काँपते हैं तो इसकी वजह है उस का मानसिक ऊर्जा स्तर, शारीरिक कार्य ऊर्जा स्तर ,यौन ऊर्जा स्तर सामान्य से अधिक /उसकी जरूरत से ज्यादा हो गया है जो ऊर्जा कार्य करने के दौरान निकलनी चाहिए थी वह ऊर्जा कार्य के दौरान नहीं निकल पा रही है ।अर्थात वह मानसिक शारीरिक यौनिक कार्य सामान्य तौर पर नहीं कर रहा है ।
मेरे अनुभव के अनुसार :-2011 में यह समस्या मुझे 50वें वर्ष के शुरुआत में हुई थी तब मेरी बुआ जी के बेटे ने बताया कि आप डिप्रैशन /उच्च मानसिक तनाव में आ गए हो अपने को कंट्रोल करो तुम्हारा BP ब्लड प्रैशर भी हाई चल रहा है इसे कंट्रोल करो नहीं तो यह डिप्रेशन का रोग दूसरी स्टेज में बढ़कर तुमको और ज्यादा हानि कर सकता है।उसकी बात जंची जो डॉक्टर परीक्षण के बाद सही साबित हुई ।उस समय मुझे कुछ ऐसी परिवारिक समस्याएँ उत्पन्न हो गई थीं जिन्हें में किसी के साथ शेयर नहीं कर सकता था बच्चे विद्रोही हो गए थे घर में विजातीय शादियों के चर्चा करने लगे थे मैं सब समझ रहा था किसी से भी इसबारे में मेरा चर्चा करना सलाह लेना मेरे लिए उपहास का कारण बन सकता था ।मैं स्वाभिमानी मर्यादित जीव घुटन की स्थिति में घुट घुट कर जी रहा था । लेकिन जब मुझे अपने हाथ काँपने का कारण उच्च मानसिक तनाव डिप्रेशन पता लग गया था । जो परकिंसन बुढ़ापे में कंपकपाहट के रोग की सूचना दे रहा था मन में मरने के , आत्महत्या करने के विचार ज्यादा आते थे ,रात में स्वप्नों में अशुभ स्वप्न मृत्यु सूचक आने लगे थे ।जीवन से अरूचि हो गई थी हर समय मौत का भय सताता था ।घर से बाहर निकल ने में भी डर लगता था कि अब हर्ट अटैक आया अब हर्ट फेल हुआ ।जीवन में से सुख शकून शान्ति गायब हो गई थी । लेकिन मै अपने मूर्खता पूर्ण मानसिकता के मानसिक डर को किसी को अपनी इज्ज़त हदकके डर से नहीं बताया करता था ।कि लोग हंसी उड़ायेंगे ।
खैर समस्याएँ सभी की अलग अलग होती हैं और समस्याओं के कारण भी सबके अलग अलग होते हैं लेकिन इतना जरूर तय कारण है कि हाथ काँपने का कारण उच्च मानसिक तनाव से उत्पन्न मानसिक अवसाद/डिप्रेशन होता है उच्च मानसिक ऊर्जा स्तर सामान्य आवश्यकता से अधिक हो गया है जिसका मतलब है कोई असाधारण समस्या दिमाग में घुसकर बैठ गई है,और दिमाग उस समस्या का सही ठीक हल नहीं खोज पा रहा है । जिससे हर समय मानसिक विचार उथल पुथल हलचल मची रहती है समस्या का सही हल मिलने के बाद दिमाग शान्त हो जाता है उस समस्या पर चिंतन मनन सोचना बंद कर देता है नयी समस्या के निदान में लग जाता है ।
असाधारण समस्या आने पर दिमाग बेतुकी बात सोचने में लगा रहता है और शरीर पर से नियंत्रण गड़बड़ा जाता है हाथ कंपायमान रहते हैं अकारण अक्सर काँपते रहते हैं । दिमाग के अवचेतन मन /चित्त /सायको सैटिंगस खराब हो जाती है हाईपोथैलामस अकारण ही अधिक सक्रिय रहने लगता है जिससे बायोलॉजिकल क्लाक जैबघड़ी खराब होने से समस्याएँ और उनका संभव निदान का समय बिगड़ने से मनुष्य अक्ल के होते बेअकल साबित होने लगता है।किसी भी समस्या का सही समय पर ठीक हल /समाधान नहीं कर पाता है ।
इस समस्या का आंशिक तौर पर हल जो मुझे मिला : वह अपने आप को काम में व्यस्त रखना है ठाली से बेगार भली नियम के तहत अब मैं खुद को वयस्त रखता हूँ ।अपना काम आप करता हूँ और समय बचे तो दूसरों का काम माँगकर करता हूँ ।अतः यदि किसी को यह हाथ कपकपाने की समस्या है तो उसको मेरा सुझाव है कि वह अपनी बढ़ी हुई ऊर्जा को काम में मानसिक कार्य, शारीरिक कार्य , से निकालता/कम करता रहे और जब काम ना हो तब अकारण घूमने कार्य भ्रमण करो ,चित्रकारी करो कुछ न कुछ काम पकड़े/करते रहो निरंतर कार्य करते रहने से शरीर के बढ़े हुए ऊर्जा स्तर को कम रखो जब शरीर में कार्य करते रहने से शरीर की ऊर्जा का स्तर सामान्य या सामान्य से कम रहेगा तो शरीर में ऊर्जा की कमी बने रहने से न शुगर समस्या/मधुमेह/डायबिटीज रहेगी न अकारण अनावश्यक रूप से हाथ कपकपायेंगे न हाथ पैर हिलते हिलाते रहेंगें । यह समस्या माईट्रोकोन्डियल DNA डिस्टर्बैंस जनित मातृपक्षीय अनुवांशिक ज्यादा 51% होती है और असाधारण समस्या जनित कम 49% होती है रोग रोग है रोग है तो उसका इलाज भी है ।
लेकिन इस रोग के निदान के लिए निद्रादायी औषधियां और नशे की दवाओं की और न सोचें ।सही /ठीक से सोचना शुरू करें और दूसरों के अतिरिक्त विचारों/कार्यकलापों से उत्तेजित न हो । दूसरों के अति रिक्त अनावश्यक विचारों को अपने मन में जगह न दें जैसे कि मैं आदर्श वाद मर्यादा शीलता के कारण विजातीय शादी की चर्चा से डिप्रैशन/,मानसिक तनाव अवसाद में आ गया था ।

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