स्त्रियों के कौन से अंग में पति का भविष्य छिपा होता है?

पति /पुरुष का भविष्य स्त्री के सर्वांग मेंं भविष्य छिपा है ।
विशेष कर पुरुष का भाग्य उसके अपने हाथ में और जिस स्त्री से उसका जुड़ाव है ( माँ पत्नी पुत्री ) उस /उन स्त्रियों के पैरों में छिपा होता है ।पुरुष के शरीर का निर्माण स्त्री के शरीर के अनुसार होता है ,जीवविज्ञान के साईटोप्लाजमिक इनहैरिटैंस के अनुसार पुरुष में ऊर्जा पैकेट इकाई माईट्रोकोन्डिया माँ से आते हैं ,पिता से माईट्रोकोन्डिया नहीं आते हैं ।निषेचन क्रियान्वयन के समय पिता के माईट्रोकोन्डिया नष्ट हो जाते हैं ।जिससे पुरुष का ऊर्जा स्तर उसकी कार्य क्षमता दक्षता उसकी माँ के अनुसार होती है ,पिता के अनुसार कार्य क्षमता दक्षता ऊर्जा स्तर नहीं होता है
अब पत्नी जो पुरुष की अर्धांगिनी कही गई है उसके अनुसार पत्नी और पत्नी से उत्पन्न संतान पर पुरुष का भोग भाग्य मान अपमान यश अपयश निरभर करता है ।पत्नी जो सभी ग्रहस्थ कार्यों की संचालिका होती है ,वह शादी के बाद अपनी सभी पहचान अपने आप अपने हाथ से समाप्त करके सभी शुभ अशुभ यश अपयश कार्य का भार पति के सिर पर डाल कर निशचिंत /बेफिक्र रहती है ।जिस कारण से वह निकम्मी आलसी उज्जड संतान के दुख दायी कार्य में 50 % की हिस्सेदारी होते हुए भी अपनी संतान के अप्रिय घटना कार्यों से हिंसित नहीं होती है ।बेटा बेटी अप्रिय कार्य करेंगे तो बाप की हिंसा /पिटाई होती है माँ की नहीं ,जबकि संतान के जन्म की 100 % प्रत्यक्ष जिम्मेदार होते हुए भी 50 % जिम्मेदार कही जाती है और 50 % जिम्मेदार होते हुए भी संतान के अप्रिय कार्यों से हिंसित नहीं होती , सारा दोष पिता /बाप के सिर लगाया जाता है । कितनी समझदार है पत्नी प्रत्यक्ष कर्ता होने पर भी अकर्ता बन कर दोषी होने पर भी निर्दोष बनी रहती है । अपनी पहचान और जिम्मेदारी छिपाना और छिपकर मौज लेना यह पत्नी की विशेष खूबी है । अब सबाल कितना सोच समझकर डाला है ? पुरुष का भाग्य स्त्री के किन अंगों पर निर्भर करता है ? दाद देनी पड़ेगी पत्नी की विद्वता की और पुरुष की ना समझी की ;-
ऊँचा मस्तक/माथा , लम्बी मछलिया आँख ,या हिरणी जैसी , लेकिन गोल न हों , गोल चेहरा ,तिकोनी ठुड्डी , कछुआ जैसे बीच में से उठे हुए दाँत छोटे दाँत , धनुषाकार होठ , चिकनी पतली चमकदार त्वचा ,उन्नत उठे हुए स्तन , कमर से बड़ी चौड़ी तागड़ी ,पेट में दबी हुई गहरी नाभि , सूंड समान हाथ पैर जघन क्षेत्र बाहुक्षेत्र भारी भुजा क्षेत्र टाँग क्षेत्र हल्का लेकिन कमजोर नहीं , नाखून चिकने गुलाबी उठे हुए ,खड़ी हुई मुद्रा में सर्वांसम दिखे गरदन झुकी हुई न हो पेट लटका हुआ न हो बाहर न निकला हुआ हो टाँगे शरीर से बाहर न निकली हुई हो , ये सभी राजसी स्त्रियों के शुभ लक्षण कहे गए हैं जो इन्द्राणी स्त्रियों में पाये जाते हैं ।
उपरोक्त सभी लक्षण शरीर के हैं यदि शरीर राजसी लक्षण युक्त है परन्तु शरीर का नियंत्रक मस्तिष्क में राजसी विचार ना हों तो ऐसा शुभ श्रेष्ठ लक्षणों वाला शरीर किस काम का , जिसके नियंत्रक मस्तिष्क में शरीर के अनुसार विचार न होकर शरीर के विपरीत विरुद्ध विकृत मानसिकता पूर्ण क्रूरता दुष्टता बझ्रबुद्धि के तामसिक विचार भरे पड़े हो ;॥ अतः शरीर लक्षण पर ध्यान देने से बेहतर है मन बुद्धि व्यवहार की पहचान उत्तम है।जिनसे शरीर नियंत्रित रहता है ।
गोरे रंग से काला रंग श्रेष्ठ है काले रंग वालों में वाईल्ड जीन्स होने से इनकी हड्डियाँ मजबूत होती हैं रोगविरोधक शक्ति अधिक होती हैं , प्रोटीन निर्माण क्षमता ज्यादा होने से बाल अधिक आयु तक काले बने रहते हैं ।शरीर का ऊर्जा उत्पादन स्तर गोरों की तुलना में तेज होने से ये ऊर्जा वान ,फुर्तिली ,इनर्जैटिक होती हैं । लम्बे समयावधि तक टिकाऊ होती हैं ,गोरी की तुलना में देर से बुढ़िया होती हैं ।

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