ब्लात्कार का मतलब /अर्थ है बल पूर्वक अति कार/कर्म करना या किसी दूसरे मनुष्य के द्वारा उसके प्रिय शरीर के साथ घातकी कर्म को मजबूरी वश सहन करना जिससे पीड़ित को तन मन को दुख प्राण संकट महसूस होता है ।अतः बलात्कार एक मानवीय अपराध है जिसे केवल मनुष्य ही कर सकता है ।पशु नहीं । पशु कभी भी बलात्कार नहीं करते हैं ।ना स्व जातिय मादा पशु से न स्वजातीय नर से ,ना विजातीय मादाओं से ।
केवल मनुष्य ही ब्लात्कार करता है स्वजातिय मादा स्त्री हो या स्वजातीय नर पुरुष हो ,कुछ मनुष्य तो इतने ज्यादा मनबढ़ अमर्यादित होते हैं कि वे विजातीय पशुओं की मादाओं और विजातीय नरों से ब्लात्कार करते हैं । उनके कुकृत्य दुष्कर्म आप नैट पर देख सकते हैं । बलात्कार केवल असामान्य प्रवृत्ति के लोग जिनका टैस्टोस्टीरोन नर हार्मोन अपने मानक स्तर से ज्यादा ऊँचा होता है जो उग्र चंडूल लड़ाकिया स्वभाव के सैडिस्ट मनोवृत्ति के लोग होते हैं जिन्हें दूसरों को चीखने चिल्लाने में मजा आता है वे लोग गुदा मैथुन के शौकीन अक्सर लड़को के साथ अक्सर बलात्कार करते है ।जिन लोगों के टैस्टोस्टीरोन का स्तर मानक से कम होता है स्वभाव से डर्रू डरपोक होते हैं वे महिलाओं से यौनसंबंधों में फेल होने के बाद कमजोर होने से बालक बालिका बच्चों और अबोध शिशुओं के साथ ब्लात्कार अपराध करते हैं ।
अभी तक मनुष्य ने इसे सिर्फ एक मनुष्य के द्वारा दूसरे मनुष्य महिला /स्त्री पर बल पूर्वक यौनसंबंध क्रिया को प्राकृतिक बलात्कार कर्म या यौनिक आक्रमण के/करने रूप में परिभाषित किया गया है जिसमें नर पुरुष अपने चर्मदंड जननांग को महिलाओं के जननांग में बलपूर्वक प्राकृतिक रूप से प्रविष्ट करा देता है महिला की बिना मर्जी /सहमति के बिना ही ।यह प्राकृतिक रुप से पुरुष का स्त्री के प्रति ब्लात्कार करना कहा जाता है उस अवस्था में जब स्त्री और पुरुष दोनों बालिग हैं और दोनों की आयु यौनपरिपक्वता स्तर पर हो पुरुष की आयु 15 - 65 वर्ष तथा स्त्री की आयु 14 - 50 वर्ष तक हो ब्लात्कार की प्रक्रिया में 12 - 21 वर्ष की आयु में ब्लात्कार होने की स्थिति में जननांगों के प्राकृतिक अवस्था से अधिक विस्तार होने पर उसे शारीरिक पीड़ा प्राकृतिक रूप से होती है और बालिग /व्यस्क होने पर समाज में मान प्रतिष्ठा का विवेक होने से अपने उपहास भय से मानसिक पीड़ा महसूस /अनुभव होती है ।
अब ब्लात्कार का दूसरे प्रकार का प्रारुप जिसे समाज में अ्प्राकृतिक ब्लात्कार कहते हैं जिसमें नर चर्मदंड जननांग को स्त्री हो या पुरुष या लड़के के पीछे मलद्वार/गुदा में जब बलपूर्वक प्रविष्टि /घुसाता कराता है और गुदा मैथुन में गुदा में वीर्यपात /वीर्यस्खलित करके स्वयं आनंदित होता है लेकिन जिसकी गुदा में नर चर्मदंड जननांग लिंग का प्रवेश हुआ होता है उसकी गुदा का आकार विस्तार सामान्य तौर पर से बलपूर्वक ज्यादा होने से उसके गुदा क्षेत्र में भयंकर पीड़ा /दर्द होता है यदि गुदा मैथुन पीड़ित बालक बालिका लड़का की आयु सामान्य तौर पर से कम है 10 -15 वर्ष तक की है तो उसकी गुदा अनावश्यक रूप से विस्तारित होने पर फट जाती है गुदा से खून निकलने/बहने लगता है ।गुदाअंग की यह क्षति पुरुष के चर्मदंडाँग लिंग के दीर्घकाय और स्थूलता मौटे होने से और भी बढ़ जाती है जिससे गुदाअंग के अंदर का मलाशय /रैक्टम क्षति ग्रस्त होने से लेकर गुदाद्वार पर फुंसियां , गुदामार्ग में मस्से बवासीर , गुदाभ्रंश / काँच निकलना , मल त्याग ते समय या मलत्याग के बाद भी गुदा मार्ग ढीला हो जाने से मलाशय/रैक्टम का अकसर बाहर निकलना आदि अप्राकृतिक खतरनाक वयाधियाँ गुदा मैथुन ग्रस्त व्यक्ति को गुदा ब्लात्कारी व्यक्ति से उत्पन्न हो जाती हैं कारण कि गुदा मैथुन के दौरान गुदा मुख के विस्तार /फैलाव /चौड़ाव की सम्भावना अति सीमित होती है ,गुदा मल त्याग ने के लिए बनी है गुदा मैथुन करने कराने के लिए नहीं बनी है । जिससे कभी कभी किसी दीर्घकाय लम्बे स्थूलकाय मोटे लिंग के गुदा में जबरन धींगामुश्ती से बलपूर्वक लम्बे मोटे लिंग के गुदा में पीड़ा पूर्वक जबर्दस्ती घुसाने घुसवाने से गुदा मुख विस्तार से गुदा मार्ग का मुखमार्ग इतना बड़ा ज्यादा खुल जाता है कि वह मलत्याग के पशचात भी पूरी तरह से बंद नहीं होता है और गुदा मार्ग से मल अप्रत्याशित रूप से रिसने लगता है । जबकि स्त्री जननांग योनि मुख के असिमित विस्तार की संभावना बनी रहती है । किसी पुरुष का लिंग इतना मोटा नहीं हो सकता कि जितना शिशु का सिर बड़ा होता है । ये सभी संभावनाएं परिपक्व आयु के बलात्कार की हैं ।
अपरिपक्व आयु के बालक बालिका और बच्चे शिशु ओं के साथ ब्लात्कार के मामले जघन्य अपराध हैं ।जिसमें बलात्कार पीड़ित बालक बालिका बच्चे शिशु आदि के बलात्कार के दौरान अत्यधिक पीड़ा से या पीड़ा न सहन कर पाने पर मरने संभावना अधिकतम रहती है । इनके साथ किया गया बलात्कार बलात्कार नहीं माना जाता है ब्लिक उसे ब्लात्कार से मारने का प्रयास पास्को अपराध कहा जाता है जिसकी कमसकम सजा फाँसी /मृत्यु दंड है ।
ऐसा अप्राकृतिक गुदा मैथुन का सामना अक्सर उन लड़को को ,लालची लोगों को करना पड़ सकता है जिन्हें प्रापर सैक्स एजूकेशन नहीं मिली है जो अपनी मारपिटाई के भय से ,लालच वश अपनी आयु से बड़े लड़कों के साथ दोस्ती में रहने लगते हैं । अक्सर घर से बाहर जंगल क्षेत्र खेतों में या वीरान जगहों पर जहाँ मनुष्य कम से कम दिखाई देते हैं या शून्य संख्या में । या नगरों शहरों के अस्पताल स्कूल के वाशरूम /टौईलट रुम / बाथरूम /यूरीनल रुम में अक्सर बड़े लड़के और आदमी के द्वारा 10 -15 वर्ष की आयु के लड़के और लालची लोग आसानी से गुदा मैथुन बलात्कार का शिकार बन जाते हैं । उनके साथ उनके परिचित रिश्तेदार लड़के मित्र सहपाठी ही गुदा रेप /ब्लात्कार कर देते हैं /करते रहते हैं ।लेकिन इस आयु के छोटे लड़के और लालच में गुदा मैथुन कराने वाले लोग बलात्कार हो जाने वाले गुदाअंग पीड़ित लोग जग हंसाई /उपहास के डर से किसी को बताते नहीं हैं ।कि उनके साथ उनकी बिना मर्जी /सहमति के बिना उनसे अप्राकृतिक गुदा मैथुन कर्म अडल्ट्री अपराध हुआ /किया गया है ।या उन्होंने धनके लालच में अप्राकृतिक सेक्स कर्म गुदा मैथुन अपराध ,दुष्कर्म ,कुकृत्य करवाया है ।
दुनिया के देशों में बी सी के समाचार सूचना के अनुसार सबसे ज्यादा पुरुष ब्लात्कार लड़कों के साथ अफगानिस्तान ईरान इराक ट्यूनीशिया के बाद भारत में भी होता है लेकिन सामाजिक जग हंसाई के डर से पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं कराई जाती है । उल्लेखनीय तथ्य यह है कि पुरुषों /लड़कों के ब्लात्कार का % महिलाओं /लड़कियों के ब्लात्कार के %.की तुलना में ज्यादा है ।
यह ब्लात्कार की परिभाषा यौन बलात्कारी तक ठीक नहीं है ।अब यौन ब्लात्कार से बढ़ाकर शरीर बलात्कार तक बढ़ा दी गई है यदि कोई स्त्री अपने यौनांग को किसी पुरुष से चूमने चूसने चाटने को अपने दबंग प्रभाव से मजबूर करती है ।। या पुरुष किसी लड़के को /पुरुष को अपने नर चर्मदंडीय जननांग लिंग को किसी दूसरे पुरुष /लड़के के मुख में अपने दबंगई प्रभाव से बलपूर्वक दूसरे का मुंह खुलवाकर अपने लिंग को उसके मुंह में घुसाता है या उसे अपने लिंग को चूमने चाटने को मजबूर करता है या दूसरे पुरुषों/ लड़कों ,महिलाओं लड़कियों के मुख में उनकी बिना मर्जी सहमति के उनके मुख में वीर्यस्खलित / वीर्यपात /सैक्स डिस्चार्ज करता है मुख मैथुन करता है तो इस मुख मैथुन को भी मुख बलात्कार माना जाता है ।
बलात्कार की नयी परिभाषा यहीं पर तक सीमित नहीं रुकतीहै यदि कोई स्त्री हो या पुरुष किसी दुसरे स्त्री पुरुष के नाक कान आँख गुदा जैसे रिक्तिय प्रविष्टि अंगों में अपने अगुली प्रविष्ट कराने /घुसाने का प्रयास/प्रयत्न करता है तो उसे भी बलात्कारी माना /समझा जायेगा ।और यही कार्य वह दूसरे आब्जेक्ट छड़ पैन लकड़ी आदि को किसी दूसरे स्त्री या पुरुष के शरीर के रिक्तिय अंग नाक कान आँख गुदा आदि में करने /प्रविष्ट करानेका कार्य करता है जिससे उसके शरीर को हिंसा खतरा नष्ट होने का कारण बन सकता है उसे भी बलात्कार में गिना जाता है , इतना ही नहीं यदि कोई स्त्री /पुरुष अपने सैक्स डिसचार्ज को किसी दूसरे स्त्री हो या पुरुष उसके शरीर पर सैक्स डिस्चार्ज को बलपूर्वक गिराता /लगाता /पौंछने का कार्य करता है तो उसे भी ब्लात्कार में गिना जाता है । अमेरिका का ( बिल किलिंटन केस ) ।
शेष है मानसिक ब्लात्कार :-किसी मनुष्य के मन मस्तिष्क में किसी दूसरे मनुष्य के विचारों को बल पूर्वक ठूंसना ,अपनी बात दूसरे को जबरनि सुनाना जिसे वह सुनना नहीं चाहता दूसरा मनुष्य उसे रोककर विवश करके अपनी बात सुनाकर ही मानता है जिससे उस मनुष्य को मानसिक क्लेश /अवसाद /दुख महसूस होता है वह मानसिक बलात्कार है । उदाहरण है गाली देना , गालीगलौज करना ,डाँट डपट करना ,धमकाना ,ये सभी कार्य मानसिक बलात्कार के अन्तर्गत आते हैं जिससे मन मस्तिष्क पर बुरा /घातक /खराब प्रभाव असर पड़ता है ।
सम्पत्ति बलात्कार :- जब कोई पुरुष हो या स्त्री किसी की संम्पत्ति को डरा कर , धमकाकर , धोखा देकर 420 सी से हड़प लेता है जिससे उसके जीवन को प्राकृतिक रूप से जीने में परेशानी/समस्या उत्पन्न होती है उसे मानसिक क्लैश /दुख होता है तो ऐसा सामाजिक अपराध सम्पत्ति ब्लात्कार की श्रेणी में आता है ।जिसमें पीड़ित व्यक्ति की सम्पत्ति उससे बलपूर्वक छीनी /हथिया ली जाती है और सम्पत्ति हीन व्यक्ति अभिशापित निर्धनता दरिद्रता गरीबी में सामाजिक अधिकार हीन जीवन जीने को मजबूर होता है ।
जैविक बलात्कार :- जब किसी जीवित व्यक्ति स्त्री हो या हो पुरुष उसकी जैविक सम्पत्ति स्त्री ,पुरुष बच्चे , फसलों सहित खेती ,फल फूल सहित बाग उद्यानिकी संपदा पशु गाय भैंस बकरी बैल घोड़ा ऊँट हाथी आदि जिन पर उसकी जीविका आधारित /निर्भरता है वह उससे बलपूर्वक अपहरण करके छीन ली जाती है जिससे उसके सामने निजी जीवन जीने का विकल्प समस्या ग्रस्त होने से मानसिक शारीरिक कलेश /दुख उत्पन्न होता है वह जैविक क्षमता संसाधनों का बलात्कार कहा जाता है ।जिसमें मनुष्य मान सम्मान हीन सामाजिक अधिकार हीन जीवन जीने को मजबूर होता है ।
भौमिक बलात्कार :- जब किसी मनुष्य से उसकी भौमिक सम्पत्ति खेत घर प्लाट फ्लैट आदि बलपूर्वक डरा धमकाकर उससे छीन कर उसके सामने मरण संकट तुल्यकारक परिस्थितियाँ पैदा कर दी जाती हैं तो यह उसके साथ भौमिक ब्लात्कार की श्रेणी में आता है ।जबकि भूमि /जमीन की उपलब्धता मनुष्य तो क्या पशु तक का भी जन्मजात जन्मसिद्ध जन्मभूमि अधिकार है ।
मुद्राबलात्कार :- चोरी , डकैती ,आदि धातु मुद्रा , का बलपूर्वक अपहरण मुद्रा बलात्कार अपराध के परिप्रेक्ष्य में उपयुक्त हो सकता है ।
No comments:
Post a Comment