हस्त सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार रिंगफिंगर /अनामिका अंगुली के मूल में शनि (विवेक /निर्णय क्षमता ) का निवास होता है और जीवविज्ञान के अनुसार रिंगफिंगर में अन्य चार अंगुलियों की तुलना में रक्त संचार ज्यादा होता है।जिस कारण रिंगफिंगर का नाखून अन्य चार अंगुलियों की तुलना में ज्यादा तेज बढ़ता है ।बायो बाडीथर्मोडाईनैमिक्स ,मैग्नैटिज्म ,इलैक्ट्रिक इम्पल्स , रिंगफिंगर में ज्यादा है ।अर्थात इस अंगुली को बाडीकंट्रोलर सोल /लाईफ कंट्रोलर प्राण और अंगुलियों की तुलना में ज्यादा महत्वपूर्ण समझता है।
ऐसे में तिलक लगाने, पूजा अर्चना में विवाह प्रस्ताव के समय अंगूठी पहनाने में इस अनामिका अंगुली/रिंगफिंगर को ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है ।जो भी कार्य इस अनामिका अंगुली के द्वारा किया जाता है, उस समय मनुष्य सामान्य अवस्था की तुलना में ज्यादा संवेदनशील /हाई काँनशियस मानसिक अवस्था में सक्रिय होशोहवाश में होता है । ऐसे में सभी सामाजिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों में इस अंगुली के कार्य को महत्ता दी जाती है ।
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