क्या ब्राम्हण धर्म में अपणी साग्गी मामा की लड़की से शादी हो सक्ती है ? क्युंकी कुछ लोगों में मामा की लड़की के साथ हक से शादी करते है तो ब्राम्हण धर्म में क्यों नहीं करते ? कृपया अपनी राय बताये मुजे इस्स सवाल से ना परखे

पितर विद्या /अनुवंशिक विज्ञान के अनुसार और /शतपथ ब्राह्मण/गोपथ ब्राह्मण /यजुर्वेद अध्याय 29 -30 /वृहदअरण्यक उपनिषद पंचतंत्र और मनुस्मृति के अनुसार ब्राह्मण धर्म एक पुराने शिक्षित संस्कृतिक लोगों का शोधित धर्म है ।
चाचा , ताऊ , (पिता के छोटे, बड़े भाई ) बुआ ( पिता की बहन ) मामा (माता का भाई ) मौसी ( माँ की बहन ) इन सभी के बच्चे देखने में तरह तरह की अलग अलग शक्ल सूरत के होते हैं ( फीनोटाईप समान ) लेकिन पितर विद्या /अनुवांशिक विज्ञान शास्त्र के अनुसार इन सभी की बेसिक /मूलसंरचना 50% पितृसत्तात्मक पक्ष से समान होती है ,और 50% मातृसत्तात्मक पक्ष से समान होती है ( जीनोटाइप ) समान जीन गुण सूत्र संरचना chromosomal structure समान होती है ये भी रक्त संबंध के अनुसार भाई ,बहन होते हैं ।अतः इनकी शादी निषेध है /वर्जित है ,पितृदोष ,मातृका दोष लगता/उत्पन्न होता है ।
पितृदोष के अन्तर्गत क्रोमोसोमल डिस्आर्डर से उत्पन्न Y क्रोमोसोमल डिस्आर्डर डीजीज असाध्य जन्म जात संतान में उत्पन्न होती हैं जिनका कोई इलाज नहीं है इन बिमारियों समस्याओं.को आप नैट पर क्रोमोसोमल डिस्आर्डर ,क्रोमोसोमल डिजीज टापिक पर देख सकते हैं इन्हें सैक्स लिंकः इनहैरिटैंस डिजीज कहते हैं जैसे हीमोफीलिया कुल रोग अपराधी व्यवहार आदि अनेक रोग हैं ।
मातृका दोष के अन्तर्गत मातृपक्ष के कुल रोग ,H autosomalbody disorders विशेष कर माईट्रोकोन्डियल डिजीज ऊर्जा स्तर का निर्रधारण और ऊर्जा स्तरीय कोशिका विकार संतान में आते हैं समयुग्मक परिस्थिति मामाओं और मौसियों की संतान से शादी करने पर इन्हें आप नैट पर माईट्रोकोन्डियल डिजीज इन हयूमैनिटिज़ में देख सकते हैं ।इसके अलावा औटोसोमल रिसैस्सिव डिस्आर्डर में होमोजाइगस रिसैस्सिव डिस्आर्डर विडोकू पीक ( मंगल दोष )हैटरोजाइगस डोमिनैंन्ट डिस्आर्डर कलर ब्लाईंड वर्ण अंधता रंग का अंधापन ड्राइवर में अनफिट चित्र कारी मेंअनफिट , पैशी क्षय मस्कुर डिसट्राफी ,हंटिंगडनस कोरिया ,भैंगापन आदि अनेक असंख्य अनुवंशिक रोग हैं जिनका.कोई इलाज नहीं है ।जो मातृवंशीय मामा मौसी की संतान सै शादी करने पर अपने वंश में आते हैं ।

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