एक आम भारतीय किसी सेक्सोलाजिस्ट के पास जाने में शर्म क्यों महसूस करता है?

सैक्स की खुमारी प्रक्रिया की लोग अहमियत नहीं समझते हैं।जिसे पढ़ समझ कर अपने सैक्स पार्टनर की सैक्स डिमांड की पूर्ति पर ध्यान नहीं दिया जाता है । सैक्स में उचित अच्छी समरति होने के बजाय सैक्स ज्ञान की कमी होने से सैक्स में संतुष्टि के भाव के बजाय असमरति विषमरति हो जाती है।
इसका दूसरा विशेष कारण है महिलाओं का सैक्स क्रीड़ा के बाद यौन संबंधों में संतुष्टि नहीं मिलने पर भविष्य पर अपने हाल को छोड़ देना कि चलो आज और अब न सही फिर कभी यौनानन्द मिल जाएगा , स्मरण रहे विकास शील उच्च देशों में और आदिवासी क्षेत्रों में महिलाएं पुरुषों को यौनानन्द लिए बिना नहीं छोड़तीं । महिलाएं जब यौनानन्द यौनाघर्षण क्रिया के सही तरीके के नहीं होने पर विषमरति हो जाने पर पुरुष को आतंकित बलात्कारित करने लगती हैं विदेशों विशेष कर अफ्रीका के कुछ देशों में अजब-गजब तरह-तरह से पुरुषों पर बलात्कार किया जाने लगा है ।भारत में भी अब महिलाएं योनानंद के बारे में जागरूक हो गई है वे भी योनानंद में अक्षम पुरुषों को लम्बे समय तक सहन /बरदाश्त नहीं करती हैं , जिससे तलाक/संबंध विच्छेद की संख्या बढ़ रही है ।
भारत में उष्णकटिबंधीय जलवायु के कारण स्त्री पुरुषों में प्रज्या कर्म की सार्थकता के सार्थक परिणाम को देखते हुए इसे समाज में प्रति बंधित कर दिया गया है जिससे एक भारतीय सैक्स समस्या होने पर भी किसी मनोरोग तन रोग चिकित्सक के पास इसलिए नहीं जाता है कि उसकी मरदानगी का मजाक उड़ाया जायेगा । परिवार समाज के लोग उसे नपुंसक /स्त्रियों को संतुष्ट करने के अयोग्य घोषित कर के उसे समाज परिवार में दितीयक दर्जे का अर्ध मानष / छक्का कहेंगे और उसकी स्त्री पर सब नजर डालने लगेंगे , उसकी स्त्री को उसके जीते जी पतिता बनाने का प्रयास करेंगे ,जिससे उसके सामने सामाजिक उपहास समस्याएं पैदा हो जायेगी ।
ऐसी स्थिति में भारत का यौनसमस्या रोगी अपनी यौन समस्या को दबा कर रखता है । दूसरे यौन रोगों की चिकित्सा यहां पर महंगी है ।और यौन रोग समस्या चिकित्सक आधुनिक प्रशिक्षण प्राप्त कम हैं । जो योनसमस्या चिकित्सक हैं वे पुराने यूनानी चिकित्सा पद्धति से योन समस्याओं का मंहगा इलाज करते हैं ।उनका ख्याल रोगी को पुष्टावर दवा खिलाकर अपनी दवा बेकना है ।वे योन समस्या का मानसिक निराकरण पक्ष पर ध्यान नहीं देते हैं ।जबकि योन /सैक्स समस्या के निराकरण में मानसिक चिकित्सा की ज्यादा जरूरत होती है ।शारीरक चिकित्सा की जरूरत कम होती है विशेष कर गरीब निर्धन पृष्टभूमि भूमि के रोगियों में ,पुष्टावर चिकित्सा पद्धति की जरुरत होती है ।

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