राष्ट्रीय प्राणी उद्यान लोंगोंं के मनोरंजन /टाइम पास के लिए नगरों के निकट बनाए जाते हैं जहाँ पर लोग अक्सर ये देखने के लिए आते हैं कि उनके अलावा दुनिया में तरह तरह के और भी. प्राणी मौजूद हैं । ये राष्ट्रीय प्राणी उद्यान शहरों के निकट एक सीमित क्षेत्र में होता है जिसमें तरह तरह के /विभिन्न प्रकार के जानवर और पेड़ पौधे सरकार के विशेष सुरक्षा नियंत्रण में पाये जाते हैं लेकिन पशु पिंजड़े मेंनहीं सीमित खुली हवा जगत में रहते हैं ,आमतौर पर साधारण बोलचाल की भाषा में इसे चिड़ियाघर /जू़ /अजायबघर कहते हैं ।इसमें पशु पक्षियों /पेड़ पौधों के बीच में जाकर मनुष्य कुछ समय के लिए आमतौर पर उनको देख सकते हैं लेकिन रात में उनके बीच में नहीं रह सकते हैं । रात में उनके बीच केवल उनकी देखभाल के लिए सरकार द्वारा नियुक्त कर्मचारी रहते हैं । जैसे दिल्ली, कलकत्ता,गोहाटी , लखनऊ, बंबई,आदि शहरों के चिडियाघर/अजयाबघर ।
वन्य जीवन अभयारण्य में उन प्राणियों को शिकारी मनुष्य की बुरी नजर /कूदृष्टि से बचाकर उन्हें भूमंडल पर प्राकृतिक परिवेष में अभय या रन्य /सुरक्षित रखा जाता है ।। वन्य जीवन अभयारण्य उन संकटापन्न संकटग्रस्त विलोपशील पशु पक्षियों पेड़ पौधों के लिए बनाए गए हैं जिनका जीवन अस्तित्व मनुष्य की बढ़ती हुई आबादी के कारण खतरे में आगया है ।जो भविष्य में विलोपशील/लुप्त होने के कगार /किनारे पर आ गए हैं उम्मीद है कि यदि उनके अस्तित्व को बचाने के लिए समाज सरकार ने न उनकी जीवन रक्षार्थ उनके जीवन के लिए सुरक्षित जीवन स्थल वन्य अभयारण्य नहीं बनाये गये तो वे पृथ्वी पर से सदाँ के लोगों विलुप्त /गायब हो जायेंगे ।ऐसे में विलोपशील पशुओं पक्षियों के लिए वन्य अभयारण्य सरकार ने बनबाये /निश्चित किये हैं ।जिनमें वे प्राकृतिक रूप से रह रहे हैं ।
वन्य जीव अभयारण्य वे पशु पक्षियों ,पेड़ पौधों के लिए सुरक्षित प्राकृतिक स्थान हैं जिनमें वे पशु पक्षी अपने प्राकृतिक आवास में /खुले में स्वतंत्र रूप से रहते हैं यह एक विशाल सरकार नियंत्रित पशु पक्षियों की सुरक्षार्थ क्षेत्र होता है जिनके बीच बीच में पुरानी आदिवासी मानव आबादी लघु ग्राम /नगर के रूप में पायी जाती है ।इन अभयारण्य क्षेत्रों में पशु अपना जीवन जीने को स्वतंत्र होते हैं लेकिन मानव आबादी का जीवन सरकार के कठोर नियमों प्रणाली के अंतर्गत नियंत्रित रहता है । वन्य जीव अभयारण्य क्षेत्रों में मानव आबादी का आवास निवास प्रतिबंध होता है मनुष्य अपनी मर्जी/इच्छा के अनुसार विस्तार में भवन निर्माण कार्य नहीं कर सकते हैं।वन्य जीव अभयारण्य क्षेत्रों में मनुष्य प्लाट, फ्लैट द्वारा मानव आबादी का विस्तार नहीं कर सकते ,केवल पुराने लोग और आदि वासी जन अपने लिए सीमित घर सरकार के नियंत्रण में मकान का निजी नक्शा बनवाकर अपनी आवश्यकता के अनुसार घर बना कर रह सकते हैं ।वन्य जीव अभयारण्य क्षेत्र में मनुष्य की विस्तारित आबादी के सामूहिक मकान कालोनी निर्माण विस्तार के नियम से असीमित कालोनी नहीं बनाई बढ़ाई जा सकती । वन्य जीव अभयारण्य क्षेत्र में मनुष्य कोई भी औद्योगिक निर्माण कार्य नहीं करवा सकता ,फैकट्री निर्माण कार्य नहीं कर सकते हैं । पशु पक्षियों के जीवन की सुरक्षार्थ इन क्षेत्रों में शिकार पूर्णतया प्रतिबंधित होता है । मनुष्य को अपनी जान की रक्षार्थ शस्त्र लाइसेंस तो मिल सकता है लेकिन वह अपने लाईसेंस से पशु पक्षियों को डरा सकता है अन्य पड़ोसी लोगों की उपस्थिति में लेकिन जंगली जानवरों के मानव आबादी पर हमला कर देने की परिस्थितियों में भी जंगली नर भक्षी पशुओं पर प्राणघातक /मारक गोली नहीं चला सकता है । चाहे मानव आबादी क्षेत्र में जंगली जानवरों घुस कर मनुष्य पल हमला कर दे या मनुष्य को मार दे । ऐसी परिस्थिति में सरकार वन्य अभयारण्य क्षेत्र में रहने वाले मनुष्य की जंगली जानवर द्वारा हत्या हो जाने पर मृतक के अन्तिम संस्कार/क्रियाकर्म को कुछ उपयुक्त धन राशि देती है । लेकिन जंगली जानवर के मनुष्य पर हमला कर देने की स्थिति में यदि कोई मनुष्य अपने निजी सुरक्षा लाईसेंस से गोली चला कर जंगली जानवर को जंगल में या मानव आबादी में बिना सरकार के आदेश के अनुसार मार देता है तो उसका लाईसेंस सरकार जब्त कर लेती है और मनुष्य को तभी पुलिस पकड़ कर जेल में डाल देती है और पशु पक्षी सुरक्षा कानून के तहत 1 से 5 वर्ष तक की कारावास / जेल सजा मिलती है । अर्थात वन्य अभयारण्य क्षेत्र में जंगली पशु मनुष्य को मारने को स्वतंत्र है लेकिन मनुष्य वन्य अभयारण्य क्षेत्र में किसी जंगली पशु को मारकर अपनी प्राण रक्षा नहीं कर सकता है ,वह.अपने सुरक्षा लाईसेंस से जंगली जानवरों को सिर्फ डरा धमका सकता है ।जंगली जानवर को मनुष्य पर या खुद पर हमला कर देने की परिस्थितियों में भी नहीं मार सकता है चाहे वह वन्य अभयारण्य में सरकारी नौकरी करने वाला पशु सुरक्षा गार्ड ही क्यों न हो । जंगल में जंगली जानवर के सीधे तौर पर अपने ऊपर हमला होने की परिस्थिति में भी जंगली जानवर पर सीधी घातक /मारक गोली नहीं चला सकता। वन्य अभयारण्य में मनुष्य का आत्मरक्षार्थ जंगली जानवर पर घातक /मारक गोली चलाना अपराध है ।
कुछ भारत में वन्य जीव अभयारण्य ःः बाघ अभयारण्य जिमकार्बेट पार्क रामनगर जिला नैनीताल उत्तराखंड, डाल्फिन अभयारण्य रामसर साईट नरौरा उ० प्र० , हाथियों का अभयारण्य राजाजी पार्क हरिद्वार उत्तराखंड , गैंडा अभयारण्य काजीरंगा आसाम ,सिंह अभयारण्य गिरिवन गुजरात ,और राजस्थान में चितौड़ ,मध्यप्रदेश में रीवा ,मगरमच्छ अभयारण्य चिल्का लेक उड़ीसा , पक्षी अभयारण्य भरतपुर राजस्थान आदि
No comments:
Post a Comment