शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य ही यही है कि मनुष्य का शिक्षा को उसके आवश्यकताओं के अनुसार उसके हित के अनुसार देखते हुए उचित आवश्यक विचारों को शब्दों के अनुसार अपना नाम और उन विचारों में से उचित आवश्यक विचारों का चयन करते हुए अपनी जीवन पद्धति का निर्धारण करना है शिक्षा है । जिसमें यह प्रमुख वाक्य है मानव व्यवहार स्वभाव समाज परिवार में भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए अपने आप उचित परिवर्तन कर लेना ही शिक्षा है ।
आपने जो अपनी इच्छा विशेष अभिरुचि बताई है कि आपकी रुचि मनोविज्ञान दर्शन शास्त्र शिक्षा शास्त्र राजनीति विज्ञान आदि मानवीय विषय अध्ययन करने की है । तो मित्र में इस पर यही कहूंगा आज तक जितने भी लोगों ने सामाजिक प्रगति की है वे सभी मनोविज्ञान , दर्शन शास्त्र , शिक्षा शास्त्र , राजनीति विज्ञान का अध्ययन करके ही आगे बढ़ सके हैं । परंतु अफसोस इस बात का है कि ऐसे परम आवश्यक मानविकी विषय का अध्ययन करने का सौभाग्य विशेष रूप से कक्षा 12 के बाद ही मिलता है । जो लोग चाहे वह किसी भी अन्य दूसरी शिक्षा धाराओं के अनुसार पढ़ें :- वैज्ञानिक वर्ग , साहित्यिक वर्ग , आर्थिक वर्ग , कलात्मक वर्ग , व्यावसायिक वर्ग परंतु जब हम उनकी समाज में प्रगति को देखते हैं तो हम उनके जीवन में मानविकी विषयों का अध्ययन की महत्ता का अनुभव होता है । आपको यह अध्ययन करने का सौभाग्य कक्षा 12 के बाद मिलेगा ।
यह अध्ययन दो प्रकार का है नंबर 1 मानक अध्ययन जो विशेष सामाजिक मानदंड के अनुसार निर्धारित प्रथम उचित अध्ययन जो स्कूल में विशेष शिक्षक गुरु जन :: प्रोफेसर रीडर लेक्चरर लोगों के सानिध्य में संभव होता है । दूसरा वैकल्पिक अध्ययन यह मानव अध्ययन कहा जाता है जो मनुष्य की निजी सोच पर आधारित उसकी सीमा क्षमता दक्षता आदि पर आधारित होता है । जिसमें व्यक्ति को शिक्षा प्रमाण पत्र नहीं मिलता । लेकिन वह अपनी ज्ञान वृद्धि के लिए जिन आवश्यक विषयों को स्कूली विद्यालय शिक्षा से हटकर शिक्षा के अन्य स्रोत संसाधन जैसे पत्र पत्रिकाएं टीवी रेडियो व्हाट्सएप फेसबुक और तरह-तरह की अन्य धार्मिक सामाजिक पुस्तकें जैसे पंचतंत्र , संविधान/ स्मृति ग्रंथ, धार्मिक ग्रंथ रामायण , महाभारत, वेद , पुराण , उपनिषद , बाइबल आदि विभिन्न पुस्तकों से अपनी अपनी आवश्यकता के अनुसार पड़ता है । जिससे उसका विशेष जाति धर्म पद्धति के अनुसार विकास होता है ।और उसके निजी मानवीय व्यवहार में परिवर्तन आता है । वह मनुष्य होकर दूसरे मनुष्य से संवाद कला वार्तालाप करना सीख पाता है । यह मानवीय विषयों के अध्ययन से ही संभव है।
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