ज्योतिष के अनुसार जब 3 बेटियों के बाद बेटे का जन्म होता है या 3 बेटों के बाद बेटी का जन्म होता है तब त्रिखल दोष लगता है. इस दोष में जन्मे जातक का भविष्य कैसा रहता है ?


लड़का लड़कों जैसा व्यवहार नहीं करता लड़की लड़कियों जैसा व्यवहार नहीं करती त्रिखल दोष या तेलरा दोष लगा लड़का या त्रिखल दोष लगी लड़की यह दोनों ही बहुत जटिल व्यवहार करते हैं इनकी उपलब्धि अच्छी नहीं आती। इनका हार्मोन स्तर सामान्य असंतुलित होता है लड़का पुरुष होते हुए भी स्त्रियों चित कार्य बुद्धि रखता है स्त्रियों चित कार्य व्यवहार करता है इसी प्रकार से लड़की भी त्रिखल दोष / तेलरा दोष लगने पर सामान्य स्त्रियों जैसा व्यवहार नहीं करती है । लड़की के व्यवहार में पुरुष आयत या लड़कों जैसा व्यवहार दृष्टिगोचर होता है। इस त्रिखल दुखद दोष के बुरे परिणाम का अंत या अति अंत में अधिक असामान्य असामाजिक व्यवहार करने के कारण तलाक परित्यक्ता या वैधव्य दोष तक में बदल जाती है।

त्रिखल दोष के कारण लड़की पुरुषोचित व्यवहार करने से लड़ाई झगड़ा अधिक करती ह वह बहिर्मुखी बन जाती है लड़की के बहिर्मुखीमुखी बन जाने पर उसके पुरुष उचित व्यवहार के कारण परिवार पर अक्सर लड़ाई झगड़े करने या मुकदमा बाजी बनने जैसी समस्याएं आने लगती हैं । वह लड़कों के संग रहना लड़कों के संग खेलना और लड़कों के जैसे दुस्साहसिक स्वभाव आदत व्यवहार की हो जाती है है । तो त्रिखल दोष लगने के कारण लड़का भी लड़कियों के जैसा भीरु डर्रु श्रम से बचने वाला आलसी आरामी मनोवृति का बन जाता है। जिसका बीएमआर कम होता है जिसमें पुरुष उचित हारमोंस का स्तर सामान्य से कम होता है इससे हम स्त्रैण पुरुष भी कह सकते हैं। ऐसे स्त्रैण पुरुष बनी लड़के के गे ( यौनसंबंध में स्त्री भूमिका प्रिय ) या स्त्री समान लिंग व्यवहार करने वाले दूषित आचरण की संभावना बन जाती है। त्रिखल दोष अनुवांशिक हो सकता है जैसे यदि किसी स्त्री की मां से लगातार तीन लड़कियों उत्पन्न होती हैं तो उस स्त्री की से भी लगातार तीन पुत्रियों के उत्पन्न होने की संभावना बनती है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि त्रिखल /तेलरापन स्त्री पक्ष उत्पन्न अनुवांशिक दोष होता है । यह लिंगिय अनुवांशिक दोष या सैक्सलिंक्ड इनहैरिटैंस अनुवांशिकता का गुण 50% पर चलता है यह कभी भी 51% से अधिक पर नहीं चलता इसलिए अनुवांशिकता को अधिक महत्व देकर अपने जीवन को भ्रम पूर्ण दुख में बना लेना समझदारी नहीं है।

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