ऐसा लगता है मित्र आपको भी मुफ्त के ज्ञान का चस्का लग गया है । इसके बारे में मैं आपको यह स्पष्ट कर दूं कि मुफ्त का ज्ञान ठीक नहीं होता ।
हमारे परिवार में कहावत है दूसरों कुलों की संतान पुत्री का पति जमाई /दामाद और पत्नी का भाई सालों से सपूत नहीं होते , अपना पुत्र अपना और कुल पूत भाईयों की संतान अपना पुत्र होता है । इसी प्रकार से जो लोग दूसरों के कहे ज्ञान को धारण कर ज्ञानी बनने की सोचते हैं या अपने को ज्ञानी समझते हैं उनका अपने ऐसे ज्ञानी होने से अच्छा नहीं कहा जा सकता । क्योंकि जो वक्ता गण है वह तीन प्रकार के हैं खट रागी सामने वाले से वार्ता करने वाला , बटरागी / बटोही रास्ते में वार्ता करने वाला , और सभा रागी ।। इन सभी में सभा रागी वक्ता विशेष उत्तम कोटि की वक्ता होते हैं जो विशेष अध्ययन किए हुए और वार्ता में तरह-तरह के तर्क कुतर्क वितर्क वितंडावाद आदि वाक परंपरा से वाकिफ होते हैं ऐसे में मुफ्त के ज्ञानदाताओं में जो वक्ता जन है उसके ग्रेड का पता नहीं चलता हर कोई जिसे देखिए वह ज्ञान की दुकान लगाए घूम रहा है । ऐसे में सही यथार्थ ज्ञान का मिलना थोड़ा कठिन है कारण कि वक्ता बहुत है श्रोता सम्मुख नहीं तब कोई कुछ भी बक ले । ऐसे में सही यथार्थ ज्ञान का पता नहीं चलता । सही ज्ञान का पता सब हमें लगता है जब एक वक्ता के सम्मुख कुछ श्रोता सवाल करते करते वक्ता के सही स्तर की पहचान पब्लिक को करा देते हैं ऐसे में जो बटुकवक्ता हैं वह ऐसे विद्वानों की सभा से बचते हैं। अगर आपको सही ज्ञान चाहिए तो इसके लिए थोड़ा सा जेब ढीली करनी पड़ेगी । पैसा खर्च करना सीखना चाहिए , अच्छे-अच्छे विद्वानों की किताब लेनी पड़ेंंगी अच्छे-अच्छे विद्वानों की किताब पढ़नी पड़ेगी । तब आप मेरे विचार से उच्च कोटि का ज्ञान हासिल कर पाएंगे यह मैं आपके प्रश्नों की श्रंखला को देखकर आपको सुझाव दे रहा हूं ।
अब आप के सवाल पर आते हैं सबसे पहले तो विज्ञान शब्द में वि शब्द को समझिए , वि एक उपसर्ग ह या प्रत्यय इतना तो मैं नहीं जानता क्योंकि मैं विज्ञान का शिक्षक हूं साहित्य का नहीं ,, मेरे विचार से जो मैंने डिक्शनरी पड़ी हैउसके अनुसार ज्यादातर शब्द जिनमें जिनमें शब्द से पहले वि लगा दिया जाता है तो ऐसे में उस शब्द का अर्थ , विशेष या गुप्त हो जाता है । जैसे विलुप्त में लुप्त का अर्थ है गायब । लुप्त से पहले वि लगा देने पर विलुप्त का अर्थ होता है आज तो है लेकिन भविष्य में गायब हो जाएगा ।। इस प्रकार से वह शब्द जिसमें सबसे पहले वि लगा दिया है तो ऐसे में '' वि ,, का अर्थ है छिपा हुआ । जैसे विशेष में शेष का मतलब है बचा हुआ है । लेकिन शेष से पहले वि लिख देने पर विशेष बन जाने पर उस बचे हुए में से भी आपके लिए कुछ अलग से बचा के रखा गया है । । इसी प्रकार से विज्ञान के बारे में भी यही अर्थ निकलता है ज्ञान तो है पर उस ज्ञान को छुपा दिया गया है ज्ञान से पहले वि लिखकर । इसे आप छंदोग्य उपनिषद के प्रारंभ में ही पढ़ सकते हैं जिसमें क्लियर लिखा हुआ है कि ग्रंथों के अंदर ज्ञान को विद्वानों ने तीन तरह के छंदों में छिपा दिया गया है । जिससे अपात्र व्यक्ति और अज्ञानी लोग ज्ञान का दुरुपयोग न कर सके ।ऐसे में ज्ञान को हासिल करने के लिए अपने से पहले उस पूर्व मनुष्य को ढूंढना पड़ता है जो पहले से ज्ञान हासिल कर चुका है उसे गुरु कहा जाता है ।
अब प्रश्न यह आता है कि ज्ञान है क्या ? ? तो इस पर मेरे विचार से :- - ज्ञान वह क्षण की सूचना / जानकारी है विद्वान लोग जिसे शब्दों में बांध देते हैं । । तकनीशियन वीडियो के द्वारा बांध देते हैं ।। कलाकार चित्रकारी के द्वारा बांध देते हैं । । ऐसे में वह क्षण जिसका जो मनुष्य लाभ उठाने में समर्थ हो जाता है या लाभ उठाने की कला सीख लेता है वह विज्ञानी /वैज्ञानिक कहा जाता है। यह क्रिया विधि कई चरणों में सीखी जाती है उन चरणों को विज्ञान की विधा में उद्देश्य ( किस विषय की किस बारे में जानकारी प्राप्त करना है) उपकरण , सिद्धांत ( इस जानकारी से पहले की समाज में गुरुजनों में क्या-क्या तरह तरह की धारणाएं अवधारणाएं प्रचलित है उनमें मुख्य धारणा उत्तम धारणा कौन सी है ) प्रयोग विधि ( इस धारणा से संबंधित लोगों से मिलना या तरह-तरह के प्रयोग करते हुए उस धारणा को पुष्ट करना धारणा को सही रूप से समझना इसे आंकड़े या तथ्य कहा जाता है) , निरीक्षण ( आंकड़े एकत्र करना) ,परीक्षण ( तथ्यों को बार बार दोहराना ),निष्कर्ष ( समस्या को पहचानना) , गणना , सामान्य करण , अनुप्रयोग (लाभ उठाना कहते हैं) ।
जब कुछ धूर्त लोग इस ज्ञान को कुछ इस तरह से शब्द विधि विधान में तरह-तरह के रस समास अलंकार मिलावट करके गायब कर देते हैं कि शब्दज्ञान आसानी से किसी की समझ में नहीं आता तो उसे अज्ञान कहते हैं । एक मनुष्य के सम्मुख जब कई तरह के ज्ञान वक्ता उस विषय से संबंधित अनेक प्रकार के ज्ञान कथन प्रस्तुत किए जाते हैं किस सुनने वाला सही फैसला नहीं ले पाता भ्रमित हो जाता है ऐसे में उस ज्ञान को मिथक ज्ञान या मिथ्या गायन कहा जाता है । जब वक्ता या गुरुजन श्रोता की इच्छा के अनुसार ज्ञान गायन ज्ञान कथन करते हैं जिसमें श्रोता की पात्रता योग्यता का ध्यान नहीं रखा जाता तो ऐसे ज्ञान को काल्पनिक ज्ञान / कल्पित ज्ञान कहते हैं।
प्रतिष्ठित अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बार कहा था जिन लोगों के पास विज्ञान धारित पद्धति का ज्ञान का और विज्ञान पद्धति विज्ञान विषय अध्ययन निपुणता है । जिन राष्ट्रों में विज्ञान का विषय अनिवार्य है। ऐसे राष्ट्र विज्ञान प्रौद्योगिकी में सदैव अग्रणी रहेंगे । परंतु जिन लोगों के पास साहित्य ज्ञान हैं जिन राष्ट्रों के पास साहित्यिक ज्ञान को प्राथमिकता है , अनिवार्यता है ।ऐसे साहित्यक ज्ञान धारी लोग और साहित्यिक ज्ञान धारी राष्ट्र कभी भी तकनीकी तरक्की के क्षेत्र में अग्रणी नहीं हो सकते ।।
ऐसे में जिन लोगों के पास अध्ययन किया हुआ श्रेष्ठ लोगों के द्वारा लिखा हुआ अपना निजी ज्ञान होता है जो ज्ञान सभा में प्रतिभाशाली श्रोताओं के शब्दों के द्वारा परखा शोध आजा होता है वह ज्ञान गोपनीय होता है कुछ गोपनीय ज्ञान की चर्चा सार्वजनिक करना रिस्की होता है ऐसे में समझदार लोग उस गोपनीय रिस्की ज्ञान को छुपा कर रखते हैं । उस पर निजी ज्ञान को विज्ञान कहा जाता है । जिन लोगों के पास विज्ञान का ज्ञान होता है उनकी सोच समझ दृष्टिकोण समाज से कुछ अलग होती है उन पर समाज के दूसरे वाक्य वितंडी झूंठे बूटे शब्दों से ठगी करने वाले लोगों का जादू नहीं चलता । उन्में नए समय की नई सोच और परिवर्तन के अनुसार नई सोच विकसित हो जाती है । ऐसे में वह नई सोच वाले विज्ञानिक मनुष्य श्रेष्ठ होते हैं । ःःःःआपने कहा है कि न्यूनतम विज्ञान का ज्ञान होना चाहिए ःःमेरे विचार में यह लाइन उचित नहीं बल्कि मैं तो यह कहूंगा कि मनुष्य के पास अधिकतम विज्ञान का ज्ञान होना चाहिए जिससे वह समाज के दूसरे अल्प शिक्षित वितंडी वाकछली लोगों के फंदे से स्वयं भी बचे अपने परिवार को भी बचाएं और अपनों को भी बचा है।
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