पीपल वृक्ष का चेतना स्तर और वृक्षों की तुलना में अधिक होता है जैसे यह जब बरसात आती है तो बहुत तेजी से बढ़ने लगता है इसकी सभी जैविक क्रियाएं बरसात में तेज हो जाती हैं ।जैसे-जैसे बरसात हट जाती है तो इसकी जैविक क्रियाएं धीरे-धीरे मंदी पड़ने लगती हैं और गर्मी में इसकी जैविक क्रियाएं रुक सी जाती हैं लेकिन रुकती नहीं है । मंदी पड़ जाती है । पीपल के यह इसी जैविक बौद्धिक स्तर का लाभ लोग अपने अपने तांत्रिक बुद्धि के हिसाब से लेते हैं ।
पीपल के वृक्ष को उसके पत्तों के हरदम हिलते रहने की आदत के कारण : चल पत्र : कहा है यह माना जाता है कि पीपल के वृक्ष से ऑक्सीजन का उत्पादन और वृक्षों की तुलना में ज्यादा होता है । इसके बिना हवा के समय में भी इसके पत्तों का चलायमान रहना इसकी अति चेतन नेता का द्योतक है । जिससे इसके बारे में लोगों ने अपने तरह-तरह के अच्छे बुरे विचार अपनी अपनी अपनी धारणा / बुद्धि मत के अनुसार बनाए हैं । लोगों ने पीपल के बारे में तरह-तरह की धारणा एं भावनाएं बनाई है । ग्रामीण लोगों में पीपल का स्थान ग्राम देवता के रूप में समझा जाता है । यह माना जाता है एक पीपल वृक्ष पर एक गांव के जितनी पक्षियों की , मधुमक्खियों की ,और अन्य जीव-जंतुओं की आबादी रहती है और पीपल उन सभी को खाने के लिए स्वादिष्ट पीपली फल देता है जो विशेष वैद्य औषधीय गुण युक्त है पीपल के वृक्ष की छाल और पीपल फल का उपयोग दमा टीवी खांसी में किया जाता है ।
पीपल के बौद्धिक चेतना या तांत्रिक शक्ति के उदाहरण 1 :- हमारे गांव में एक विशाल पीपल वृक्ष था जिसके नीचे एक आदम पीर की समाधि थी लोग उसे आजम तारा पीपल कहते थे उसे कोई काटने को तैयार नहीं होता था एक बार गांव के एक व्यक्ति ने उसे काटने का प्रयास किया वृक्ष कटकर समाप्त हुआ नहीं था , कि उसके लड़के को पीपल वृक्ष काटने के दौरान वृक्ष के ऊपर से गिरने से बहुत भयंकर चोट लगी । 2 :- दूसरा उदाहरण एक व्यक्ति मंदिर की दीवार पर चढ़कर पीपल की शाखा और टहनियां काटने का प्रयास कर रहा था लोगों ने मना किया वह ढालचंद नहीं माना वह थोड़ी देर बाद दीवार से घिरा बाजू टूट गई । 3:- तीसरा मेरे घर का निजी उदाहरण हमारे बाबा ने खेतों में पीपल का वृक्ष लगाया था जो श्मशान में बाद में आ गया उस वृक्ष को काटने का कई बार सिलसिला उठा हम ने मना कर दिया , हम इसे नहीं कटवाएंगे ना कटने देंगे । तब भी हमारे छोटे चाचा ने ₹10000 में वह वृक्ष बेक दिया । वह वृक्ष कट गया और जब वह पैसे लेकर हमारे हिस्से के , हमारे घर आए तो हम ने मना कर दिया इसका परिणाम यह हुआ हमने पीपल के वृक्ष में काटने में अपनी सहमति नहीं दी थी । आज तलक हमारे छोटे चाचा की आर्थिक स्थिति खराब चल रही है वह परिवार पीपल वृक्ष काटने से अभिशप्त हो चुका है सभी परिवार बुरी तरह संघर्षों में घिरा रहता है और उनका समाज में सम्मान गिर चुका है ।
अंततः में यही कहूंगा कि पीपल वृक्ष की आध्यात्मिक तांत्रिक बौद्धिक शक्ति को देखते हुए पीपल वृक्ष से पंगा ना लिया जाए ना इसे गलत बुरा कहा जाए , ना इसे काटा जाए ना इसे काटने में सहयोग दिया जाए । पीपल वृक्ष की पूजा के दौरान इसकी जड़ों पर कर स्पर्श किया जाता है । बरगद वृक्ष की पूजा के दौरान तने का आलिंगन स्पर्श किया जाता है । गूलर वृक्ष की पूजा के दौरान फल और पत्ती का स्पर्श किया जाता है । तथा पिलखान या पाकर वृक्ष की पूजा के दौरान केवल उसके दूध का या फल का स्पर्श किया जाता है। विशेष अनुरोध या उल्लेखनीय तथ्य यह है कि किसी भी वृक्ष की पूजा करने के दौरान उस में लोहे की कील ना गाड़ी जाए और ना किसी वृक्ष को धागों से बांधा जाए ऐसी तंत्र पूजा करने से लाभ होने की संभावना नहीं है अपितु हानि भी हो सकती है। पीपल समझदार लोग ऐसा ही कहते हैं और करते हैं।
भविष्य पुराण के अनुसार जो ब्राह्मण विद्वान होता है लेकिन अब अपनी विद्वता से समाज का भला नहीं करता अपनी विद्वता को साथ लेकर मर जाता है । ऐसा विद्वान विद्याधर ब्राह्मण पीपल के रूप में पैदा होता है । इसी बात को देखते हुए समाज में वृक्षों में पीपल के वृक्ष ब्राह्मण , बरगद वृक्ष को क्षत्रिय वृक्ष कहा है । गूलर को वैश्य वृक्ष , पिलखन / पाकर को शूद्र वृक्ष कहा है ।
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