पुराने समय पुराने समय में जब रक्त विज्ञान का उदय नहीं हुआ था पैथोलॉजी की स्थापना नहीं हुई थी उस पुराने समय में लोगों को रक्त और रक्त जनित व्याधियों का ज्ञान नहीं था ।। तब उन्हें उस पुराने समय में भी अपने अपने तरीके से ऋषि-मुनियों ने 3 तरह के रक्त का वात पित्त कफ के रूप में वर्गीकरण किया था । जिसके अनुसार लोगों की बीएमआर या शरीर में खाद्य पदार्थों के ऑक्सीकरण से उर्जा उत्पत्ति की अवधारणा को पहचाना था ।जिसके अनुसार ऋषि-मुनियों ने तीन तरह की नाडिया बनाई अपने-अपने विवेक के अनुसार यह तीन मुख्य नाड़िया हैं आदि नाड़ी , मध्य नाड़ी , अंतय नाड़ी ।। 1:- जिनमें आदि नाड़ी के लोगों का बीएमआर या ऊर्जा उत्पादन पैटर्न तेज होने से यह विशेष ऊर्जावान बुद्धिमान बलवान होते हैं जल्दी बुढ़िया जाते हैं जो अपनी सामान्य आयु से अधिक जाँचें /जाने जाते हैं वातज वायु प्रधान अति सक्रियता गुंण वाले ।। 2 : - मध्य नाड़ी वाले लोग सामान्य ऊर्जा उत्पादन पैटर्न होने से अपनी वास्तविक आयु और जंचित आयु में एक समान देखते हैं पितज शरीर या सामान्य सक्रियता गुंण वाले ।। 3 :- जबकि अंत्य नाड़ी के लोग ऊर्जा उत्पादन पैटर्न मंदा होने से अपनी मानसिक शारीरिक ऊर्जा का उपयोग मंद या धीमा करने से सदैव अपनी आयु से कम दिखते हैं कफज शरीर वाले।। यह जल्दी बूढ़े नहीं होते ।
जैसे जैसे समय समय बदलता गया लोगों को रक्त के बारे में अधिकतम जानकारी प्राप्त होती गई और रक्त से उत्पन्न तरह-तरह की संपूर्ण कारी बीमारियां अनुवांशिक बीमारियां थैलसीमिया स्पाइनाबाईफीदा , हंटिंगटन कोरिया , डिमेंशिया , एडीसन डिजीज आदि अनेकों मानसिक शारीरिक विकृतियां होती हैं जो अनुवांशिक रूप से सम युग्यता के सिद्धांत से अक्सर जाती रहती हैं जिससे स्वस्थ सामान्य लोगों के अस्वस्थ असामान्य बच्चे तरह-तरह की अनुवांशिक विकार युक्त पैदा होते हैं । इसी तरह से अनेकों मेटाबॉलिक डिसऑर्डर्स या बीमारियां भी होती हैं। मेटाबॉलिक बीमारियां आदि तरह तरह के रोगों का पता लगा , तो वर्तमान में लोग जो समझदार हैं जिनकी नई सोच है वह कुंडली मिलान से पहले ब्लड ग्रुप या रक्त समूह का मिलान करते हैं ।। जिससे बाद में पंडित जी से कुंडली मिलान के द्वारा शादी को प्रस्तावित किया जाता है ब्लड ग्रुप में कुंडली मिलान के समय इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए रखा जाता है कि पति पत्नी का ब्लड ग्रुप ए बी , ए बी , समान नहीं होना चाहिए । पति पत्नी का ब्लड ग्रुप सदैव अलग प्रकार ग्रुप का होना चाहिए । या फिर यदि मजबूरी वश ब्लड ग्रुप एक ही है । तो ऐसे में दोनों का ब्लड ग्रुप सेम कैटिगरी ए ए सेम वैरायटी ए पॉजिटिव ए पॉजिटिव होना चाहिए किसी भी हालत में सेम ग्रुप कैटैगरी ए ए है तो sem variety ऐ पौजिटिव ए निगेटिव नहीं होने चाहिए ।इस पर मैंने अपने प्रोफाइल पर पहले भी एक सवाल विस्तार में लिखा है जिन्हें ज्यादा जानकारी चाहिए वह मेरे प्रस्ताव से प्रोफाइल से ढूंढ कर अपनी शंका समाधान कर सकते हैं ।
अतः ब्लड ग्रुप मिलान /मैचिंग को अहमियत देना चाहिए क्योंकि ब्लड ग्रुप की संख्या 16 से ज्यादा है तो ब्लड में अंतर होने की संभावना ज्यादा होने से कुंडली के युगल मिलान में आसानी रहती है । यह आधुनिक भी है जबकि नाड़ी मिलान में नाड़ियाँ सिर्फ तीन तरह की हैं जो अक्सर मिल जाती है ऐसे में नाड़ी मिलान कुंडली को मानते हुए अच्छे रिश्तो को छोड़ देना समझदारी नहीं है अतः ब्लड ग्रुप पद्धति ज्यादा उत्तम और वैज्ञानिक है।
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