क्या मृत्युभोज शास्त्र सम्मत है?


मृत्यु भोज का जिक्र बाद में करेंगे सबसे पहले मृत्यु भोज से पहले सह भोज या सामूहिक भोज के बारे में जानना बहुत जरूरी है ।अकेले खाना और सबके साथ मिलकर खाना इसमें आपने फर्क देखा होगा , और ना देखा हो तो सबसे पहले इसे अनुभव करना उसके बाद सामूहिक भोजन करके इसे अनुभव करना । जब भी लोग आपस में मिलते हैं तो मिलने के बाद उन्हें समय व्यतीत करने के पश्चात थकान और भूख लगती है उसके पश्चात सभी का सामूहिक खाना अनिवार्य हो जाता है । कारण कि जब वह सब लोग अपना काम छोड़कर मृतक घर आए हैं वह किसलिए आए हैं कभी तुमने उनकी भावनाओं पर गौर किया तो तुम सोचोगे समझोगे ! उन्हें तुमसे लगाव था इसलिए वह तुम्हारे मृत्यु संबंधी दुखद संदेश को सुनते ही पढ़ते ही तुमसे मिलने को आए ! क्योंकि वह जानते हैं कि आप मृत्यु के पश्चात नकारात्मकता नेगेटिविटी से घर गए होंगे ! और आपने सभी सांसारिक कार्य छोड़ दिया होंगे ! आप निरंतर दुख में डूबे रहते होंगे ! तो इस दुख में डूबे रहने वाले अपने एक भाई की समस्या को उबारने के लिए सभी लोग मृत्यु के पश्चात मृत्यु वाले परिवार से मिलने आते हैं । ताकि वह मृत्यु वाला परिवार जिसने अपने सभी सामाजिक सामूहिक कार्य दायित्व छोड़ दिए हैं मृतक की शोक संवेदना के संकट से उबर जाएं और मृतक के पश्चात मृतक के सभी आवश्यक दायित्व को दूसरे लोग करने लगे मृतक परिवार के सम्मुख भोजन पोषण आहार की समस्या सुरक्षा की समस्या दूर हो जाय । मृतक का उतराधिकारी या मृतक का वारिस वह फिर से सांसारिक सामाजिक कार्य क्रियाकलाप करने लगे ।

इसके पश्चात गौर करते हैं जो बहुत जरूरी है ऊर्जा विनिमय नियम जब भी हम किसी से मिलते हैं या कोई हमसे मिलता है तो हमारे मिलन की प्रक्रिया में ऊर्जा का उपयोग प्रयोग होता है ऊर्जा उपयोग प्रयोग की क्रिया के दौरान जो उर्जा हीन होता है वह ऊर्जावान से उर्जा लेता है । जो ऊर्जावान है वह ऊर्जाहीन को ऊर्जा देकर उसे इस फुर्तीमय ऊर्जावान बना देता है ।। ऐसे में जो भी मनुष्य किसी भी मनुष्य से मिलता है तो वह उसे ऊर्जावान बनाकर स्फूर्ति और उत्साह से भर देता है या फिर उर्जा हीन करके उसे थकान सुस्ती और आलस संयुक्त कर देता है । उसके पश्चात जिस भी मनुष्य से वह मिला है उसे थकान या सुस्ती चढ़ जाती है। या वह ऊर्जावान होने से फुर्तीला उत्साह आयुक्त हो जाता है।

उसकी ऊर्जा अतिरिक्त जो उसके पास थी वह मिलने वाला व्यक्ति ले गया । उसे ऊर्जा हीन करके थकावट सुस्ती आलस्य दे गया । यदि वह ऊर्जावान है तो ऐसे में उस उर्जा हीन मनुष्य को मिलने वाले मनुष्य से ऊर्जा मिलती है जिससे वह अपने को ऊर्जावान स्फूर्ति में अनुभव करने लगता है ऊर्जा के नियम में जब सब की ऊर्जा खर्च हो रही होती है । सबको ऊर्जा देने के लिए सह भोज की आवश्यकता होती है । ऐसे में जो मृतक परिवार है जो भी उसके घर आते हैं यदि वह उन को भोजन कराकर उनके घर वापस भेजता है तो ऐसे में उनको मार्ग में थकावट नहीं होती गई ऊर्जा वापस मिल जाती है और वह उससे मिलने के लिए फिर दोबारा कोशिश करते हैं । सोच सकते हैं । लेकिन यदि किसी मृतक परिवार में आए हुए मनुष्य के घर आए हुए सभी लोगों को मृतक परिवार का स्वामी उनकी उचित आओ भगत नहीं करता उन्हें चाय पानी नहीं पिलाता या अपनों को सह भोज नहीं कराता है तो ऐसे में कोई भी उस मृतक के यहां फिर से आना नहीं चाहेगा

मृतक भोज का दूसरा जो सबसे विशेष एवं लाभ है वह यह है आजकल लोग पब्लिसिटी या प्रचार करने के लिए व्हाट्सएप फेसबुक टि्वटर का सहारा लेते हैं पुराने समय में जब प्रचार के लिए फेसबुक व्हाट्सएप टि्वटर उपलब्ध नहीं थे तो ऐसे में मनुष्य अपनी अच्छी या बुरी पुरानी सभी घटनाओं के प्रचार प्रसार के लिए ब्राह्मणों नाइयो और अपने समाज पुरुष के मनुष्यों के ऊपर निर्भर था जिसमें वह मृत्यु भोज के समय सभी में यह घोषित करता था कि अमुक मनुष्य की मृत्यु हो चुकी है और उस मनुष्य की जगह उसका अमुक वारिस यह मनुष्य है इसलिए पुराने मृतक मनुष्य का जो भी लेनदेन का बकाए का जिम्मेदार यह मनुष्य होगा अर्थात पिता के ऋण की वसूली पुत्र करेगा और पुत्र पिता के द्वारा लिए हुए ऋण भी लौट आएगा इस प्रकार से मृतक भोज शास्त्र सम्मत है ।

यह शास्त्र 1 दिन में नहीं लिखे गए इन शास्त्रों को लिखने में पीढ़ियों और युगों का समय लगा यह मनुष्य जब शिक्षित सब हो गया तब लिखे गए लेकिन उसके पहले संवेदना व्यक्त करने के लिए मनुष्य इकट्ठे होते थे और संवेदना व्यक्त करने के बाद चले जाते थे । जब मनुष्य शिक्षित हो गया तो उसको सुविधा के अनुसार शिक्षित करने के लिए शास्त्र बनाए गए जिससे भूतकाल के पुराने लोगों के अच्छे शब्दों अच्छे विचारों को शब्दों में संचित संकलित करके भविष्य के लोगों के लिए सुरक्षित रख सकें । इसी का नाम शास्त्र या स्मृति ग्रंथ है जो दो प्रकार के हैं नंबर एक संवैधानिक ग्रंथ और नंबर दो आचरण संस्कृति ग्रंथ जिनमें संवैधानिक ग्रंथ से सभी परिचित हैं लेकिन आचरण संस्कृति ग्रंथ से सब परिचित नहीं है आचरण संस्कृति ग्रंथ केवल पंडितों ब्राह्मणों और समाज के पुरोहित लोगों के पास ही पाए जाते हैं ।

No comments:

Post a Comment