क्या अवसाद का इलाज संभव है?

 


अवसाद का इलाज संभव है । संभव ही नहीं अब पूर्णतया संभव हो चुका है । परंतु इसमें कमी यह है कि अवसाद का इलाज दीर्घकालिक है । अवसाद को ज्योतिष के अनुसार तरह-तरह की दशा महादशा विदिशा विपरीत दशा कहा गया है । इसके अनुसार अवसाद को समाप्त होने में यदि उत्तम चिकित्सक मिल जाए और अवसाद के कारण का पता चल जाए तभी अवसाद को समाप्त होने में 1 साल 5 साल 20 साल तक लग सकते हैं ।

अवसाद के लिए सबसे पहले श्रीराम शर्मा की किताब चेतन अचेतन अवचेतन सुपर चेतन मन पढ़ें । अपनी मानसिक स्थिति परिस्थिति को स्वयं समझें । अवसाद का मुख्य कारण हैं मनुष्य के मन का जीते जी मन मर जाना और तन जिंदा रहना । ऐसा मनुष्य जिसका मन मर जाता है वह कुछ भी ठीक से नहीं सोच पाता मरा मन मुर्दा दिल ईंसान सदैव मरी बात सोचता है , जिससे मरे मन वाला व्यक्ति समाज से अलग थलग कटा कटा सा रहने लगता है । सामाजिक , धार्मिक , राजनीतिक, परिवारिक , क्रिया कलाप और कार्यों में रुचि नहीं लेता ।और एक दिन अकेला एकांत वासी एकांकी होकर समाज से अलग होता हुआ चला जाता है ।और अंत में अवसाद की अंतिम अवस्था में यदि अवसाद का इलाज नहीं किया / सोचा गया तो अवसाद ग्रस्त व्यक्ति आत्महत्या कर लिया करता है ।अवसाद ग्रस्त व्यक्ति पलायन वादी होता है घर छोड़कर बाहर भाग जाया करता है ,तनाव से परेशान होकर ।। अब अवसाद लाइलाज नहीं है इसका इलाज संभव है बस जरूरत है थोड़ा सा लंबे समय तक प्रतीक्षा करने की उचित अवसाद मानसिक चिकित्सक के मिलने की , और अवसादी मनुष्य को व्यस्त मस्त रखने के लिए तरह तरह के मानसिक सामाजिक क्रियाकलापों में व्यस्त करने के लिए आर्थिक व्यय करने की ।। अक्सर अवसाद ग्रस्त व्यक्तियों के अवसाद का अधिकतम कारण ऐसी समस्या होता है जिसका उन्हें हल नहीं दिखाई देता , नहीं सूझता है । यदि अवसाद ग्रस्त व्यक्ति को सत्य ज्ञान दे दिया जाए उसे अवसाद का कारण पता लग जाए तो वह स्वयं ही अवसाद को खत्म कर दिया करता है । बात यह है कि अवसाद मनुष्य के निजी मानसिक परिवर्तन के द्वारा ही संभव है । इसमें चिकित्सक का रोल और समाज का रोल दूसरे स्तर पर आता है इसके लिए अच्छी क्वालिटी की किताबें पढ़नी चाहिए जैसे रॉबर्ट्स स्काटी की जीवन की राह ,, नॉर्मल पीर की सकारात्मक सोच की सकारात्मक शक्ति ,, जसेफ मर्फी की अवचेतन मन की शक्ति ,,नेपोलियन हिल की सही सोचिये -अमीर बनिए ,, रोमेश शर्मा की आत्मा चित्त परिवर्तन ,,आदि अनेक मानसिक समस्याओं से पीड़ित लोगों के लिए किताबें लिखी गई हैं परंतु अवसाद के लिए खर्च करना तो पड़ेगा कोरा के लेखक मंडल वाले आपको किताब नहीं भेज सकते ।

यह मैंने आपको अपना निजी अनुभव शेयर किया है अब से लगभग 10 साल पहले मैं भी 2011 में अवसाद या डिप्रेशन की रेंज में आ गया था बल्कि अवसाद से पीड़ित हो गया था मारे भय के मेरे हाथ पैर कांपने लगे थे । सोचने समझने की शक्ति बहुत ही कम रह गई थी । परंतु आज मै सामान्य हूं मैंने पहले श्रीराम शर्मा की पुस्तक चेतन अचेतन सुपर चेतन मन पड़ी इससे मुझे अपने मरे मन की अनुभूति का एहसास हुआ इसके बाद मैंने अपने मन में प्राण फूंकने के लिए अन्य लेखकों की अच्छी-अच्छी किताबें पढ़ी और खुद को अध्ययन में व्यस्त कर दिया और इतना ही नहीं उसके बाद मैंने डायरी लेखन का भी कार्य शुरू कर दिया नतीजा यह हुआ कि मुझे अवसाद या डिप्रेशन से निकलने में लगभग 9-10 साल लगे हैं।

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