वैसे तो दुनिया में सभी लोगों की अपने अपने सभ्यता संस्कृति के अनुसार कैलेंडर या संवत मौजूद हैं दुनिया में ज्यादातर कलैंडर की शुरुआत विश्व के प्रसिद्ध राजाओं के द्वारा हुई है ।या फिर लोगों ने अपनी अपनी सभ्यता संस्कृति के स्थापक के अनुसार उनके जन्म दिवस से कैलेंडर संवत शुरू किए हैं । जैसे ईस्वी सम्वत ईसा मसीह के जन्मदिन से शुरू हुआ है। इस्लाम में हिजरी संवत मोहम्मद साल की पहली हज यात्रा से/जन्म दिन से शुरू हुआ है ।। विश्व में इसी प्रकार सभी लोगों ने अपने अपने सभ्यता संस्कृति के स्थापक ओ के जन्म दिवस / निर्वाण दिवस ( मरण दिवस ) या विशेष पर्व बैसाखी से शुरू किए हैं जैसे बौद्ध सम्वत जैन सम्वत सिक्ख संवत् आदि ।नैपाल का संवत् नैवारी से शुरू होता है ।
परंतु मेरे विचार से ब्रजवासी पंडित चौरंगीलाल या नौरंगी लाल मथुरा वासी के प्रसिद्ध किताब किस्सा तोता मैना के अनुसार और हिंदुओं के प्रसिद्ध ग्रंथ महाभारत के अनुसार एसा विचित्र किंतु सत्य (विशेष कौतुकी कार्य) ,नये सत्र / नये संवत्सर ( संवत ) का निर्माण या निर्धारण वह राजा कर सकता है ,- उस दिन से जिस दिन उसकी प्रजा पर किसी का किसी पर कर्ज/ ऋण / लोन ना हो सभी लोग पूरी तरह से स्वतंत्र स्वावलंबी आत्मनिर्भर हो किसी का किसी पर लेन देन कर्ज ना हो ॥ उस दिन से राजा एक नए संवत की शुरुआत कर सकता है , इसके लिए उसे पहले अपनी प्रजा में एक निश्चित तिथि को घोषित करना पड़ता है कि उस दिन से नया कैलेंडर या नया पंचांग संवत बनाया जा रहा है उस तारीख से पहले सभी अपने अपने कर्जों / ऋण का भुगतान कर दें किसी पर किसी का कर्ज / ऋण उधार बाकी ना हो ।। यदि कोई व्यक्ति ऋण देने की स्थिति में नहीं है कर्ज पटाने की हालत नहीं है तो ऐसी स्थिति में वह राजकोष से धन लेकर अपने ऋण दाता को देखकर अपने आप को ऋण दाता से मुक्त कर सकता है ।।और जिस दिन कैलेंडर या संवत बांधा जाएगा उस दिन राजा को यह प्रजा में घोषित करना पड़ता है कि राजा का किसी भी प्रजा के व्यक्ति पर कोई ऋण या कर्ज नहीं है यदि किसी ने राजकोट से ऋण लेकर ऋण दाता का भुगतान किया है उस राजकोष से ऋण लेने वाले व्यक्ति कर्ज माफ किया जाता है । और राजा का अब प्रजा पर किसी प्रकार का कोई भी ऋण कर्ज उधारी शेष नहीं है । सभी व्यक्ति सामाजिक व्यवहारिक लेन देन ऋण से मुक्त हैं । और राजा भी उन सबको राजकोषीय ऋण से मुक्त करता है सब स्वतंत्र हैं सब स्वालंबी हैं सब आत्मनिर्भर हैं ।।
आओ हम सब मिलकर एक नई साल की नई शुरुआत नई जिंदगी के लिए करते हैं और उस दिन से साल का पहला दिन शुरू माना जाता है इस दिन राजा भी प्रजा की तरह एक सामान्य नागरिक है राजा प्रजापति प्रजापिता नहीं है समस्त प्रजा और राजा का एक विशाल सामान्य सामाजिक परिवार है जिसमें सब समान हैं किसी पर किसी का कोई ऋण कर्ज उधारी शेष नहीं है ।आज के दिन से नये सत्र /नये साल /नव सम्वत्सर की शुरुआत हो रही है ।
यह निर्माण संवत्सर की शुरुआत अनेक प्रकार की है जैसे राष्ट्रीय संवत्सर यह राष्ट्रीय कैलेंडर जो शक संवत पर आधारित है सामाजिक संवत्सर जो विक्रमादित्य संवत्सर पर आधारित है इसके अलावा अनेक सामाजिक संवत्सर धर्म के स्थापक के नाम पर समाज में प्रचलित हैं इसके अलावा मनुष्य अपना निजी कैलेंडर या निजी संवत्सर भी बना सकता है जो उसकी मैरिज एनिवर्सरी या शादी दिवस से शुरू होता है बच्चों का कैलेंडर उनके जन्म दिवस या बर्थडे से शुरू होता है।
ऐसा विशेष कार्य अब से 5000 पहले महाराजा युधिष्ठिर ने किया था । उन्होंने समाज संवत को विशेष रुप से स्थापित किया था ।। जिससे हमारे समाज में युधिष्ठिर संवतद चैत्र मास शुक्ल प्रतिपदा गोदी पड़वा से प्रारंभ होता है ।सत्र /सम्वत्सर शुरू करने से पहले युधिष्ठिर ने प्रजा के समस्त ऋण का भुगतान अपने राजकोष से करके समस्त प्रजा को ऋण मुक्त किया था ।। उसके बाद दूसरा संवत महाराजा विक्रमादित्य ने बांधा था ,विक्रमादित्य ने अपनी प्रजा के ऋण का भुगतान करने के बाद प्रजा को ऋण मुक्त करने के बाद विक्रम संवत चलाया था । विक्रम संवत् होता है यह वैशाख मास की पहली तिथि से आरंभ होता है चैत्र पूर्णमासी के बाद ।। पेशावर के महाराजा कनिष्क में जो कुषाण वंश के थे उन्होंने शक संवत चलाया जो मकर संक्रांत से आरंभ होता है ।
दुनिया का सबसे पुराना संवत्सर या संवत लिखित रूप में चीन का नूं ही सम्वत है जो 200000 के लगभग पर है । महाराज नूं ही को भारत में मनु कहा जाता है और अरब में नूह कहा जाता है जबकि चीन में नूं ही कहा जाता है यह विश्व का सबसे पुराना संवत है जो मायो सभ्यता से मिलता जुलता है ।
अब चर्चाशेष है पंचांग की :- ज्योतिष में काल गणना के अनुसार यदि सूर्य चंद्रमा की स्थिति राशि नक्षत्र प्रहर घटी /घड़ी तथा सृष्टि वस्तु की उपस्थिति अक्षांश देशांतर स्थिति में घड़ी जोड़कर किसी पत्रक या काल निर्णय अंकसूची पर लिखी जाती है तो उसे पंचांग कहते हैं । जिसमें राशि नक्षत्र प्रहर संक्रांत तिथि और समय सूचक अंकीय तिथि दर्ज होते हैं ।
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